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क्रांति के चित्र

 मंगलवार, 14 मई, 2013 को 13:36 IST तक के समाचार
  • मिस्र वॉल पेंटिंग, स्ट्रीट आर्टिस्ट
    मिस्र की सड़कों पर, उसकी गलियों में दीवारों पर पेंटिंग करने वाले कलाकारों की एक नई नस्ल सामने उभर कर आई है जिसका काम देखकर कोई भी हैरत में पड़ सकता है. इन चित्रों में पुराने रीति रिवाज और मौजूदा सियासत का अक्स साफ तौर पर देखा जा सकता है.
  • मिस्र वॉल पेंटिंग, स्ट्रीट आर्टिस्ट
    ये कलाकार अपनी चित्रों के ज़रिए अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं. द टेलीग्राफ के कला समीक्षक अलेस्टेयर सूक ने इन कलाकारों से मिलकर हालात का जायजा लिया है. होस्नी मुबारक के पतन के दो साल हो चुके हैं लेकिन काहिरा अब भी कहीं भीतर ही भीतर सुलग रहा है.
  • मिस्र वॉल पेंटिंग, स्ट्रीट आर्टिस्ट
    इसमें मिस्र की क्रांति की निशानियां देखी जा सकती है. तहरीर चौक जो कभी अंसतोष का केंद्र बिंदु रहा था, वहां मुबारक के दौर की चीजें अब भी मौजूद हैं. पास में ही एक कोने पर बदलाव के दौर की एक अलग सी निशानी भी है. इन कलाकारों में ज्यादातर ने 2011 की शुरुआत में मुबारक के खिलाफ़ चल रहे विरोध प्रदर्शनों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था. तब सैंकड़ो लोग इस आंदोलम में मारे गए थे.
  • मिस्र वॉल पेंटिंग, स्ट्रीट आर्टिस्ट
    मोहम्मद महमूद स्ट्रीट- तहरीरक चौक से पूरब की तरफ लगी इस गली में जो दुनिया बसती है वह बेहद ही जीवंत है. इस गली की दीवारों पर शायद ही ऐसी कोई जगह बची हो जिसमें चमकीले और तीखे रंग न भरे गए हों. इसकी शुरुआत हुस्नी मुबारक के खिलाफ़ शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले के साथ ही हुई थी.
  • मिस्र वॉल पेंटिंग, स्ट्रीट आर्टिस्ट
    साल 2001 से ही काहिरा में रह रहे मियां ग्रोन्दाल पेशे से लेखक और फ़ोटोग्राफ़र हैं. पिछले महीने ही ब्रिटेन में उनकी किताब ‘रिवोल्यूशन ग्राफ़िटीः स्ट्रीट आर्ट ऑफ दि न्यू इजिप्ट’ प्रकाशित हुई है. स्ट्रीट आर्ट पर वह कहते हैं, “क्रांति से पहले मिस्र में स्ट्रीट आर्ट का चलन मामूली ही था. और अगर कुछ था भी तो लोगों को इसके बारे में बहुत कम जानकारी था लेकिन मुल्क में ऐसे कलाकार थे जो अपनी बात ईमानदारी से जाहिर करने के लिए बंद दरवाजे से बाहर निकलने का इंतजार कर रहे थे.”
  • मिस्र वॉल पेंटिंग, स्ट्रीट आर्टिस्ट
    प्रदर्शनकारियों के हौसले से साहस पाकर कई कलाकारों ने दीवारों पर पेटिंग शुरू कर दी था जिसमें नारे लिखे होते थे, मुल्क को हिला देने वाली बातें होती थी. जबकि दूसरे नौजवान प्रदर्शनकारी रोड़े फेंक रहे थे, मिस्र के स्ट्रीट आर्टिस्ट्स की नई पौध ने अपने हाथों में पेंट ब्रुश और कलर स्प्रेयर उठा ली थी. ग्रोन्दाल ने अपनी किताब में लिखा भी है कि 2011 की गर्मियों तक लोगों ने मिस्र की इन दीवारों के बारे में बात करना शुरू कर दिया था जिन पर ‘आर्ट अटैक’ जारी था.

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