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इराक़ युद्ध के 'आठ खिलाड़ी'

 मंगलवार, 19 मार्च, 2013 को 14:16 IST तक के समाचार
  • जॉर्ज बुश

    जॉर्ज बुश

    अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के पास इराक़ से युद्ध की तीन वजहें थीं.

    पहला महाविनाश के हथियारों का खात्मा, दूसरा आतंकवाद को सद्दाम के समर्थन का अंत और तीसरा इराक़ी लोगों की आजादी.

    मार्च 2008 में उन्होंने इराक़ पर हमले के फ़ैसले का यह कहते हुए बचाव किया कि सद्दाम हुसैन को हटाने के लिए युद्ध जरूरी था.

  • टोनी ब्लेयर

    टोनी ब्लेयर

    पूर्व ब्रितानी प्रधानमंत्री ने इराक युद्ध का समर्थन करते हुए संसद में कहा था कि सद्दाम के साथ कूटनयिक कोशिशों के बिना बल प्रयोग के प्रभावी नहीं हो पाएंगी.

    हालांकि उन्होंने बाद में स्वीकार किया कि सद्दाम हुसैन को लेकर उपलब्ध खुफिया सूचनाओं में खामियां थी.

  • कोफ़ी अन्नान

    कोफ़ी अन्नान

    सुरक्षा परिषद में इराक़ के मसले पर चल रहे संघर्ष ने 21 वीं सदी में संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए.

    उस दौरान संगठन के महासचिव कोफी अन्नान ने समझौते और एकता की अपील की. लेकिन फ्रांस, चीन और रूस ने इराक़ में अमरीकी कार्रवाई को समर्थन देने वाले प्रस्ताव पर वीटो लगाने की चेतावनी दी.

    सितंबर 2004 में अन्नान ने बीबीसी से कहा कि संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के मुताबिक इराक़ पर सैन्य कार्रवाई अवैध थी.

  • कॉलिन पॉवेल

    कॉलिन पॉवेल

    अमरीका के तत्कालीन विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल ने फरवरी 2003 में संयुक्त राष्ट्र में विवादास्पद सबूत पेश किए जिनके बिना पर इराक़ के खिलाफ लड़ाई शुरू की गई थी.

    साल 2007 में पॉवेल ने रहस्योद्घाटन किया कि उन्होंने जॉर्ज बुश को इराक़ में सैन्य दखलंदाजी न करने के लिए समझाया था.

  • सर्जेई लवारोफ़

    सर्जेई लवारोफ़

    उस समय संयुक्त राष्ट्र संघ में रूस के राजदूत रहे सर्जेई लवारोफ़ ने इराक़ में अमरीकी सैन्य कार्रवाई को लेकर अपने देश के विरोध को मुखर आवाज़ दी.

    उन्होंने तब कहा था कि रूस ने कभी भी इराक़ के मसले के हल के तौर पर युद्ध का समर्थन नहीं किया है.

    पांच साल बाद रूस के विदेश मंत्री के तौर पर लवारोफ़ ने अपने पुराने रवैए को फिर से दोहराया और कहा कि इराक़ के संघर्ष ने उसके पड़ोसी देशों को भी अस्थिर किया है.

  • हांस ब्लिक्स

    हांस ब्लिक्स

    हांस ब्लिक्स ने इराक में संयुक्त राष्ट्र के हथियार निरीक्षकों की टीम की अगुवाई की थी. महाविनाश के हथियारों का पता लगाने के लिए उन्होंने ज्यादा मोहलत भी मांगी थी.

    एक साल बाद उन्होंने कहा कि महाविनाश के हथियारों को लेकर अमरीका ने बिना किसी आधार के रवैया बना रखा था.

    उसकी खुफिया सूचनाओं में कई गलतियां थी.

  • अज़नार

    होसे मारिया अज़नार

    इराक युद्ध को स्पेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री होसे मारिया अजनार के समर्थन ने यूरोप के अमरीका के साथ रिश्तों को नए आयाम दिए.

    सुरक्षा परिषद के एक सदस्य की हैसियत से स्पेन ने अमरीका और ब्रिटेन का साथ कधे से कंधा मिलाकर दिया.

    साल 2004 के चुनाव में हारने के बाद 2007 में अजनार ने कहा कि उन्होंने सद्दाम के खतरे को बढ़ा चढ़ाकर आंका था.

  • विलेपां

    डोमिनिक डी विलेपां

    फ्रांस के पूर्व विदेश मंत्री डोमिनिक डी विलेपां ने इराक युद्ध को लेकर अपने देश के विरोध की अगुवाई की थी.

    इराक़ युद्ध पर अपने मुखर विरोध की वजह से उन्हें घरेलू मोर्चे पर बेहद लोकप्रियता मिली और वे साल 2005 से 2007 के दौरान फ्रांस के प्रधानमंत्री बने.

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