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भारत के बच्चों को बचाने की जंग

 सोमवार, 12 नवंबर, 2012 को 12:35 IST तक के समाचार
  • भारत में बच्चों और महिलाओं को बचाने की सेव द चिल्ड्रन की मुहिम
    भारत में बाल मृत्यु दर कम करने के सेव द चिल्ड्रन संस्था के कैंपेन के साथ पिछले तीन साल से जुड़े हैं जाने-माने भारतीय फ़ोटोग्राफ़र रघु राय. "औरतों और बच्चों की शोचनीय हालत को कैमरे में उतारने के लिए" रघु राय दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ियों में पहुंचे. सभी तस्वीरें साभार रघु राय और सेव द चिल्ड्रन संस्था.
  • भारत में बच्चों और महिलाओं को बचाने की सेव द चिल्ड्रन की मुहिम
    भारत में बाल मृत्यु का मुख्य कारण कुपोषण है. पांच साल से कम उम्र में होने वाली मौतों में एक-तिहाई की वजह कुपोषण होती है. तस्वीर में दिख रहे बच्चे का जन्म के समय वज़न डेढ़ किलो से थोड़ा ज़्यादा था. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, भारत में हर साल पांच साल से कम उम्र के 16.5 लाख बच्चों की मौत ऐसी बीमारियों से होती है जिनका इलाज हो सकता है. ये संख्या दुनिया में सबसे ज़्यादा है.
  • भारत में बच्चों और महिलाओं को बचाने की सेव द चिल्ड्रन की मुहिम
    रघु राय की ये तस्वीरें एक फ़ोटोबुक के रूप में छपी हैं और इस किताब का नाम है 'आउटसाइड द मार्जिन्स'. राय कहते हैं किताब का ये नाम इसलिए रखा गया है क्योंकि ये उन लोगों के बारे में है जो "हाशिये के बाहर" ज़िंदगी बिताते हैं. जैसे ये तस्वीर सलमा और उनकी तीन साल की बेटी नग़मा की है जिसे कुपोषण होने का ख़तरा है.
  • भारत में बच्चों और महिलाओं को बचाने की सेव द चिल्ड्रन की मुहिम
    रघु राय पिछले पचास साल से फ़ोटोग्राफ़ी कर रहे हैं. इन तस्वीरों के बारे में वो कहते हैं, "सही पूछिए तो ग़रीबी को तस्वीरें में उतारना बहुत आसान है, काफ़ी नाटकीय होती हैं ये तस्वीरें. इसलिए ऐसी तस्वीरें इस तरह से खींचनी चाहिए जिससे लोगों के आत्मसम्मान को ठेस न लगे."
  • भारत में बच्चों और महिलाओं को बचाने की सेव द चिल्ड्रन की मुहिम
    रघु राय कहते हैं कि सेव द चिल्ड्रन के साथ काम के पहले दिन तो वो शुरुआती कुछ घंटों तक अपना कैमरा भी नहीं उठा पाए. "झुग्गी-झोपड़ियों और खुली नालियों को देखकर मैं विह्वल हो गया था....जो मैंने देखा वो तो अवमानवीय हालातों से भी बदतर था."
  • भारत में बच्चों और महिलाओं को बचाने की सेव द चिल्ड्रन की मुहिम
    सेव द चिल्ड्रन संस्था का कहना है कि भारत में आधी से ज़्यादा महिलाओं का प्रसव प्रशिक्षित दाई की मदद के बिना ही होता है. संस्था की हाल की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में एक महिला के प्रसव या गर्भावस्था के दौरान मौत होने की संभावना श्रीलंका की महिला के मुक़ाबले आठ गुना ज़्यादा है.
  • भारत में बच्चों और महिलाओं को बचाने की सेव द चिल्ड्रन की मुहिम
    भारत में आधे से ज़्यादा बच्चों का जन्म घर में ही होता है. शहरों की झुग्गी-झोपड़ियों में ऊंची बाल मृत्यु दर की वजह अथाह ग़रीबी, जगह की तंगी और साफ़-सफ़ाई की कमी है जिससे बीमारियां फैलती हैं और बच्चों में टीकाकरण स्तर कम रहता है.
  • भारत में बच्चों और महिलाओं को बचाने की सेव द चिल्ड्रन की मुहिम
    बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के ग्रामीण इलाकों से हज़ारों लोग एक बेहतर भविष्य की तलाश में दिल्ली आते हैं. लेकिन दिल्ली में भी उन्हें निराशा ही मिलती है.
  • भारत में बच्चों और महिलाओं को बचाने की सेव द चिल्ड्रन की मुहिम
    मां और बच्चों की देखभाल और सलाह-मश्विरे में स्वास्थ्य कर्मियों की अहम भूमिका होती है. सेव द चिल्ड्रन संस्था चाहती है कि ग़रीब इलाकों में सरकार ज़्यादा स्वास्थ्य कर्मियों की भर्ती करे और उन्हें प्रशिक्षण दे. ये तस्वीर क़मर जहान की है जो पांचवी बार गर्भवती हुई हैं. उनकी एक साल की बच्ची तरन्नुम की डाईरिया की वजह से मौत हुई थी.

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