'हिंदुस्तानियत की बिसात है दिल्ली'

 मंगलवार, 16 अक्तूबर, 2012 को 19:18 IST तक के समाचार
  • दिल्ली की तस्वीरें
    कहते हैं भारत का कोई भी शहर अगर हिंदुस्तानियत के सही रंग में रंगा है तो वो है शहर दिल्ली. यहीं से शुरुआत होती इस ख्याल की दिल्ली है दिलवालों की.
  • दिल्ली
    दिल्ली के कई इलाकों को सांस्कृतिक ऐतिहासिक धरोहर घोषित करने के लिए दिल्ली सरकार की ओर से एक सुनियोजित प्रस्ताव भेजा गया है.
  • जामा-मस्जिद
    महाभारत से अंग्रेज़ों के राज तक हर शासक ने दिल्ली पर अपनी बादशाहत साबित करने के लिए दिल्ली में अलग-अलग शहरों को बसाया. मुग़लों की बसाई दिल्ली और जामा-मस्जिद जैसी इमारतें दिल्ली की सबसे बड़ी विरासत हैं.
  • जामा-मस्जिद
    जामा-मस्जिद की अज़ान से निज़मुद्दीन की कव्वाली तक दिल्ली की संस्कृति और इसके इतिहास की कई निशानियां आज भी गलियों में गूंजती हैं.
  • अशोक का स्तंभ
    ये है दिल्ली की सबसे पुरानी निशानियों में से एक अशोका स्तंभ या लौह स्तंभ. माना जाता है कि यह स्तंभ 912 ईसा पूर्व में बनाया गया जिस पर कभी ज़ंग नहीं लगा. लोहे का ये स्तंभ इस खूबी के लिए देश-दुनिया में मशहूर है.
  • दिल्ली
    दिल्ली शहर से प्यार करने वालों का मानना है कि ये शहर अपनी हर गली, हर सड़क पर भारत के इतिहास की इतनी कहानियां समेटे है कि इसका कोई सानी नहीं.
  • दिल्ली, परेड मैदान
    दिल्ली के परेड मैदान की मशहूर रामलीला. कायस्थों, बनियों, मुसलमानों और पंजाबियों ने दिल्ली के अलग-अलग इलाकों को अपने कलेवर में ढाला और आज इस शहर में हर समुदाय से जुड़ा त्योहार अपनी रंगत बिखेरता है.
  • दिल्ली
    विस्थापन के बाद बड़ी संख्या में पंजाबी दिल्ली में शरण लेने के लिए आए और इस शहर की संस्कृति का हिस्सा हो गए. दिल्ली की ज़िंदादिली को आज पंजाबियों की देन माना जाता है.
  • लाल किला
    दिल्ली स्थित लाल किले के भीतर का दृश्य. शाहजहानाबाद के इस इलाके को शाहजहां ने 17वीं शताब्दी के मध्य में बसाया. कहते हैं इस शहर की नींव रखते समय शाहजहां ने इसकी बुनियाद में सोने-चांदी के सिक्के और बेशकीमती जवाहारात बिखेरे.
  • लाल किला
    लाल किले के साए में बसे शाहजहानाबाद में पुरानी दिल्ली यानी चांदनी चौक की रौनक पसरी. चांदनी चौक का ये इलाका आज भी उस धरोहर की जीवंत निशानी है.

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