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ईमानदारी, श्रद्धा और प्यार से सेवा की इच्छा: राजेश खन्ना

 बुधवार, 18 जुलाई, 2012 को 15:33 IST तक के समाचार

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हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ 1987 में बीबीसी हिंदी की विशेष बातचीत सुनिए...

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हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना का 69 वर्ष की आयु में मुंबई में निधन हो गया है. सुनिए बीबीसी के आर्काईव से 1987 में राजेश खन्ना के साथ तब की बंबई में किया गया इंटरव्यू. ये इंटरव्यू बीबीसी हिंदी के सिद्धार्थ भाटिया ने किया था.

बीबीसी के सिद्धार्थ भाटिया से साल 1987 में हुई राजेश खन्ना की बातचीत

राजेश खन्ना साल 1992 में पहली बार कांग्रेस की टिकट पर सांसद बने, हालांकि उसके कुछ वर्ष पहले से ही वे राजनीतिक गलियारे में सुर्खिया बटोर रहें थे.

सिद्धार्थ भाटिया के साथ इस साक्षात्कार में राजेश खन्ना ने फिल्मों से राजनीति की तरफ अपने रुझान की चर्चा की.

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राजनीति में आना...

राजेश खन्ना ने कहा, “राजनीति में आने के पीछे एक खूबसूरत छोटी सी बात है, मैं इंडस्ट्री के लिए कुछ करना चाहता था....यहां इतने साल काम किया है....और हम फिल्म लोगों के लिए बनाते हैं, राजनीति लोगों की सेवा का बड़ा माध्यम है और अगर इससे मैं लोगो के काम आ सकू तो क्यों नहीं.”

सिद्धार्थ भाटिया के सवालों का जवाब देते हुए राजेश खन्ना ने तब कहा था कि उनकी फिल्में भी चल रही है और वो फिल्म उद्योग में सक्रीय भी हैं.

राजेश खन्ना ने कहा, “राजनीति का काम बहुत बड़ा काम है. फिल्मों का काम मेरे दिल के समान है....जान है और श्रद्धा है....उसे मैं अपने दिल से कभी नहीं निकाल सकता...फिल्में कम हो गईं इस वजह से मैं राजनीति में आया, ये कहना गलत है.”

देशसेवा...

राजनीति के जरिए राजेश खन्ना किस तरह से देश की सेवा करने की योजना बना रहे हैं, इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “मै कौन होता हूं ये सब सोचने वाला...मै सिर्फ एक बूंद हूं जिसकी वजह से हमारी पार्टी या हमारे देश या प्रधानमंत्री को थोड़ा सहयोग मिले या उनके हाथ मजबूत कर पाऊं तो ये हमारा फर्ज और भाग्य बन जाता है.”

बीबीसी के साथ साक्षात्कार में उन्होंने कहा, “मैं जानता हूं कि देश बहुत सी कठिनाओं से जूझ रहा है, कुछ विदेशी ताकतें हमें एक दूसरे से अलग करना चाहती हैं, लेकिन हम उन्हें ऐसा नहीं करने देंगे. देशवासियों में आपसी सहयोग की भावना होनी जरूरी है. अगर हर इंसान अपना-अपना काम कर ले तो 21वीं सदी में भारत कामयाबी की राह पर चल सकेगा.”

बंगाल यात्रा

जिस समय 1987 में ये इंटरव्यू किया गया तब राजेश खन्ना पश्चिम बंगाल से एक चुनावी यात्रा में भाग लेकर लौटे थे.

बीबीसी श्रोताओं के साथ अपनी यात्रा के अनुभव बांटते हुए राजेश खन्ना ने कहा, “इस बार जब हम पश्चिम बंगाल गए तो वाकई लोगों के दिलों की आवाज समझ में आ रही थी. वो सच में चाहते हैं कि पश्चिम बंगाल में कुछ तब्दीलियां हों. अब हम वहां किस तरह से जीत पाएंगे ये तो वक्त ही बताएगा.”

सिद्धार्थ भाटिया के सवाल, “क्या आप कह सकते हैं कि ये आपकी जिंदगी का एक नया मोड़ है जिसके बाद आपकी जिंदगी बदलेगी?” पर राजेश खन्ना ने कहा, “मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहता हूं कि इस रोल में मैं चाहता हूं कि इमानदारी, श्रद्धा और प्यार से लोगों की सेवा कर सकूं और इस देश की सेवा कर सकूं. मेरा यहीं मकसद रहेगा. यही आखिरी दम तक करना चाहता हूं. ....मैं चाहता हूं कि पूरे दिल के साथ लोगों की सेवा कर सकूं, हर इंसान की खुशी तक पहुंचना चाहता हूं. यहीं मेरी तपस्या होगी."

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