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यूपी में आलू का चुनावी महत्व

 मंगलवार, 21 फ़रवरी, 2012 को 13:39 IST तक के समाचार
  • सुबह के नाश्ते से लेकर रात के डिनर और चाट में भी हम तरह तरह से आलू का इस्तेमाल करते हैं. मगर आलू पैदा करने वाले किसान से कम ही मुलाक़ात होती है. (तस्वीरें: बीबीसी संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी और बीबीसी हिंदी सेवा प्रमुख अमित बरुआ)
  • कन्नौज, फर्रुखाबाद, मैनपुरी, इटावा, हरदोई और आसपास के कई जिलों में आलू की खेती होती है, जिससे कई लाख किसान, मजदूर, व्यापारी और ट्रांसपोर्टर अपनी रोज़ी-रोटी कमाते हैं.
  • आलू की खेती करने वाले किसान फूल सिंह के खेतों में आलू का पहाड सा लग गया है, पूरा परिवार आलू संभालने में लगा है.
  • यहां के आलू उत्पादक किसान चाहते हैं कि इलाके में आलू चिप्स , आलू पाउडर और अल्कोहल बनाने के कारखाने लगें तो उन्हें आलू का अच्छा दाम मिल सकता है.
  • फर्रुखाबाद की सातनपुर आलू मंडी एशिया की सबसे बड़ी आलू मंडी है, जहां से पूरे देश को आलू की सप्लाई होती है. रोज़ाना लगभग पचास हजार कुंतल आलू इस मंडी में आता है.
  • किसानों की शिकायत है कि उन्हें समय से खाद, बीज और बिजली-पानी नहीं मिलता. इसके अलावा कोल्ड स्टोरेज का किराया बहुत ज्यादा है और कई बार लागत भी न निकलने से आलू फेंकना पड़ता है.
  • किसानों का कहना है कि राजनीतिक नेता चुनावों में आलू किसानों से सब वायदे करते हैं, मगर बाद में भूल जाते हैं.
  • सरकार ने आलू और उसके व्यापार पर तरह तरह के टैक्स भी लगा रखे हैं, जिससे लागत बढ़ जाती है.

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