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कहानी हाथों की ज़ुबानी

 शुक्रवार, 10 फ़रवरी, 2012 को 20:55 IST तक के समाचार

'बोलते हुए हाथ'

  • अन्ना युरकोवस्का लात्विया द्वारा ली गई तस्वीरें
    'स्पीकिंग हैंड्स' बीबीसी रशियन सर्विस की अन्ना युरकोवस्का लात्विया की एक परियोजना है. ये संकलन कई विभिन्न देशों से इकट्ठा किया गया है जिसमें उन लोगों की कहानी कही गई है जिनसे हम इत्तेफाक से मिलते हैं, लेकिन इस मुलाकात की यादें हमारे साथ ताउम्र रह जाती हैं. इन हाथों से मैं भारत के अजंता में मिली थी.
  • त्रिंबक गांव, भारत
    इस तस्वीर में ये महिला छोटे छोटे दीये बनाकर एक शिव मंदिर के बाहर बेचती हैं. ऐसा कहा जाता है कि तीर्थयात्री यहां उस अमृत की तलाश में आते हैं जिसे भगवान विष्णु ने एक युद्ध के दौरान छलकाया था. इस महिला के हाथ इतने फुर्तीले हैं कि ऐसा लगता है मानो दीये की लौ उनकी उंगलियों के बीच से निकल रहे हैं. (भारत)
  • आंटी वलाया, बेलारूस
    आंटी वलाया जिंदगी भर एक समर्पित कैथोलिक ईसाई रहीं हैं. वो हर इतवार नियम से गिरिजाघर जाया करती थीं लेकिन अपनी जिंदगी के अंतिम सालों में वे ऐसा नहीं कर पायीं क्योंकि वो काफी बीमार थीं. अपने अंतिम दिनों में वे पोलिश भाषा की कई धार्मिक किताबों को अपने साथ रखती थीं. वो कहती थीं कि इन किताबों में ही हमारी रोज़मर्रा के सवालों के जवाब मिलते हैं. (बेलारूस)
  • भारत
    भारत में गोदावरी नदी के तट पर जनवरी महीने की एक सुबह. वैसे यहां का तापमान 18 डिग्री सेल्सियस है लेकिन स्थानीय लोगों को ज्य़ादा ठंड लग रही है. यहां के लोग आग जलाकर पर्यटकों के फेंके गए कूड़े को जला रहे हैं. (भारत)
  • वाईटैलिटी, रिगा, लातविया
    वाईटैलिटी एक फोटो कैमरा मैकेनिक है. वे उन गुणी लोगों में से एक है जिनके बारे में कहा जाता है कि इनका हाथ सोने का है. मैंने ईबे पर 1956 में बना एक पुराना लाइका कैमरा खरीदा जिसे वाईटैलिटी ने बड़ी आसानी से काम लायक बना दिया. (लातविया)
  • बेलारूस
    इन हाथों को देखकर कोई भी इन्हें तुरंत पहचान कर कह सकता है कि ये हाथ पूरी ज़िंदगी खेतों में काम करते हैं. बेलारूस में ऐसे कई लोग हैं जिनके पास उनके अपने खेत हैं. जाड़े के लिए वे अनाज को जमा कर के रखते हैं, जिसे वे अगले कई दिनों तक चुन-बिन कर खाने लायक बनाते हैं. (बेलारूस)
  • लाटगाले, लातविया
    गांव के लोग उस बिल्ली की तरफ़ कोई ध्यान नहीं देते जिनका रोज़ का काम चूहों को पकड़ना होता है. लेकिन ये बच्चा ऐसा नहीं करता. ये अपनी छु्ट्टियां बिताने अपनी नानी के घर आया हुआ था जहां उसने बिल्ली के मुंह से इस चूहे को बचाया था. इस चूहे की तीसरे दिन मौत हो गई थी जिसके बाद इस बच्चे ने इस चूहे को सेब के पेड़ के नीचे दफ़ना कर, एक क्रॉस बना कर उसके उपर केसरिया रंग के फूल रख दिए थे. (लातगाले, लातविया)
  • चीन, सुज़ाऊ का एक चिड़ियाघर.
    चीन के सुज़ाऊ प्रांत के इस चिड़ियाघर में एक बच्चा बंदर के इस बच्चे को भुट्टा खिलाते हुए. ख़ास बात ये है कि कुछ ही मिनटों पहले इस भुट्टे को ये बच्चा ख़ुद खा रहा था. (सुझाउ, चीन)
  • मुंबई, भारत
    जीन-पीयर जेनेट्स की फ़िल्म 'अमीली' की मुख्य किरदार बींस के बड़े थैलों में अपना हाथ डालते हुए काफी खुश होती थी. कुछ ऐसा ही इस तस्वीर में दिखाया गया है जिसमें मुंबई के कोलाबा के एक बाज़ार में ये महिला मूंगफली के ढेर में करती है. ये महिला मूंगफली बेचकर अपना गुज़ारा चलाती है. (मुंबई, भारत)
  • भारत
    इस तरह के धार्मिक संस्कार आपको गोदावरी के तट पर जगह जगह देखने को मिल जाएंगे. तीर्थयात्री बड़ी संख्या में दोनों में फूल खरीदकर गोदावरी नदी के मटमैले पानी में बहा देते हैं. (भारत)
  • नोवी प्रोगोस्त गांव, बेलारूस
    एलेक्जैंडर पिछले 40 सालों से मधुमक्खियां पाल रहे हैं. मधुमक्खियों को पालने-पोसने का उन्होंने अपना अलग तरीक़ा विकसित किया है. उनको मधुमक्खियों को सहेजते हुए देखना किसी ओझा का झाड़-फूंक देखने जैसा है. (नोवी, बेलारूस)
  • पंजिम, भारत
    अलग-अलग सभ्यताओं में जानवरों के साथ अलग तरह से बर्ताव किया जाता है. यूरोप में जानवरों के अधिकारों के लिए अभियान चलाया जाता है और कंपनियाँ दावा करती हैं कि वो जानवरों पर परीक्षण नहीं करते. अमरीका में जानवरों के फर से बने कपड़े पहनें तो कार्यकर्ता उस पर स्प्रे डाल देते हैं. वहीं दुनिया के दूसरे कोने में एक स्कूली छात्र अगर एक चिड़िया के पैर में जंज़ीर डाल कर घूमता है तो कोई उस पर ध्यान नहीं देता. (पंजिम, भारत)
  • पूर्व सोवियत यूनियन
    एक छोटे से गांव की ये महिला डॉक्टर अस्पताल से डिस्चार्ज हुए एक मरीज़ का नोट पढ़ रही है. ये डॉक्टर अपने सभी मरीज़ को करीब से जानती हैं. वे दोपहर तक क्लीनिक में मरीज़ देखती हैं और फिर उसके बाद अस्पताल जाकर सर्जरी करती हैं. इनका काम यहीं खत्म नहीं होता. ये रात में भी किसी इमरजेंसी के लिए हमेशा तैयार रहती हैं. ये अविवाहित हैं और इनके बच्चे नहीं हैं. इन्हें हर महीने 70 अमरीकी डॉलर तनख्वाह़ मिलती है. (पूर्व सोवियत यूनियन)
  • गोवा, भारत
    इस बंजारन महिला ने समुद्र तट पर लगाए गए एक टेंट में अपने हाथ से बनाए सजावटी सामान और कपड़ों को टांग कर रखा था. थोड़ी देर में वो अपने सामानों को एक बड़े बैग में डाल एक स्थानीय होटल में जाती दिखाई देती है. (गोवा, भारत)
  • सुझाऊ, चीन
    मैं इस कारीगर से सुझाऊ प्रांत के एक व्यस्त बाज़ार में मिली थी. ये लोग लकड़ी के पारंपरिक स्टैंप बनाते हैं जिनमें आपका नाम अंकित होता है या फिर आपकी पसंद का कोई शब्द. ये आपको शब्द चुनने में मदद भी करते हैं. जब आप इनसे ये स्टैंप खरीदते हैं तब ये आपको एक छोटी डिबिया में लाल रंग भी देते हैं. इनकी कीमत बहुत ज़्यादा नहीं होती फिर भी आप मोल-भाव कर सकते हैं. (सुझाउ, चीन)
  • नासिक, भारत
    नदी किनारे कूड़े के ढेर में लगी आग के सामने बैठ कर हाथ सेंकते हुए एक वृद्ध महिला. दिन के वक्त ये भक्तों द्वारा चढ़ाए गए नारियल को चुन कर सुखाती हैं और उन्हें दलालों को बेच देती हैं. ये दलाल इन नारियलों को फिर से भक्तों को बेच देते हैं. (नासिक, भारत)
  • जर्मनी
    भुने हुए अखरोट दुनियाभर के पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है, लेकिन बर्लिन में मिलने वाले ये अखरोट बाकी जगहों के मुक़ाबले मुझे ज्य़ादा स्वादिष्ट लगे. (जर्मनी)
  • गोवा, भारत
    इस तस्वीर में ये मछुआरा पकड़ी गई इन मछलियों को धूप मे सुखाने की तैयारी कर रहा है. इसका टेंट मछलियों के पुराने जाल से बना है, जिसके उपर एक मरा हुआ कौव्वा लटका दिया गया है जो चिड़ियों को भगा सके. मछुआरा इन मछलियों को रेत और नमक के मिश्रण में फेंकता है और बाकी काम तेज़ धूप कर देता है. (गोवा, भारत)
  • चीन
    बुलबुला छोड़ने वाले इस खिलौने के व्यापारी शंघाई की सड़कों पर एक बड़ा दृश्य पैदा कर देते हैं. इन बुलबुलों से सकारात्मक भावनाओं का प्रदर्शन होता है. इस आयोजन में हर उम्र और पृष्ठभूमि के बच्चे बिना किसी थकान के शामिल होते हैं. (चीन)
  • सेंट जेम्स पार्क, लंदन, यूके
    हममें से सभी लोगों ने जीवन में कभी ना कभी कबूतरों को खाना ज़रूर खिलाया होगा और उन्हें एक दूसरे को धक्का देते हुए, दाना चुगते देखा होगा. लंदन के पूर्व मेयर ने जब इन कबूतरों को 'उड़ता हुआ चूहा' कहा तो इसके बाद ये बहस शुरु हो गई कि इन्हें खाना खिलाना चाहिए या नहीं. (लंदन, ब्रिटेन)

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