'बोलते हुए हाथ'
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आंटी वलाया जिंदगी भर एक समर्पित कैथोलिक ईसाई रहीं हैं. वो हर इतवार नियम से गिरिजाघर जाया करती थीं लेकिन अपनी जिंदगी के अंतिम सालों में वे ऐसा नहीं कर पायीं क्योंकि वो काफी बीमार थीं. अपने अंतिम दिनों में वे पोलिश भाषा की कई धार्मिक किताबों को अपने साथ रखती थीं. वो कहती थीं कि इन किताबों में ही हमारी रोज़मर्रा के सवालों के जवाब मिलते हैं. (बेलारूस)
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गांव के लोग उस बिल्ली की तरफ़ कोई ध्यान नहीं देते जिनका रोज़ का काम चूहों को पकड़ना होता है. लेकिन ये बच्चा ऐसा नहीं करता. ये अपनी छु्ट्टियां बिताने अपनी नानी के घर आया हुआ था जहां उसने बिल्ली के मुंह से इस चूहे को बचाया था. इस चूहे की तीसरे दिन मौत हो गई थी जिसके बाद इस बच्चे ने इस चूहे को सेब के पेड़ के नीचे दफ़ना कर, एक क्रॉस बना कर उसके उपर केसरिया रंग के फूल रख दिए थे. (लातगाले, लातविया)
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अलग-अलग सभ्यताओं में जानवरों के साथ अलग तरह से बर्ताव किया जाता है. यूरोप में जानवरों के अधिकारों के लिए अभियान चलाया जाता है और कंपनियाँ दावा करती हैं कि वो जानवरों पर परीक्षण नहीं करते. अमरीका में जानवरों के फर से बने कपड़े पहनें तो कार्यकर्ता उस पर स्प्रे डाल देते हैं. वहीं दुनिया के दूसरे कोने में एक स्कूली छात्र अगर एक चिड़िया के पैर में जंज़ीर डाल कर घूमता है तो कोई उस पर ध्यान नहीं देता. (पंजिम, भारत)
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एक छोटे से गांव की ये महिला डॉक्टर अस्पताल से डिस्चार्ज हुए एक मरीज़ का नोट पढ़ रही है. ये डॉक्टर अपने सभी मरीज़ को करीब से जानती हैं. वे दोपहर तक क्लीनिक में मरीज़ देखती हैं और फिर उसके बाद अस्पताल जाकर सर्जरी करती हैं. इनका काम यहीं खत्म नहीं होता. ये रात में भी किसी इमरजेंसी के लिए हमेशा तैयार रहती हैं. ये अविवाहित हैं और इनके बच्चे नहीं हैं. इन्हें हर महीने 70 अमरीकी डॉलर तनख्वाह़ मिलती है. (पूर्व सोवियत यूनियन)
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मैं इस कारीगर से सुझाऊ प्रांत के एक व्यस्त बाज़ार में मिली थी. ये लोग लकड़ी के पारंपरिक स्टैंप बनाते हैं जिनमें आपका नाम अंकित होता है या फिर आपकी पसंद का कोई शब्द. ये आपको शब्द चुनने में मदद भी करते हैं. जब आप इनसे ये स्टैंप खरीदते हैं तब ये आपको एक छोटी डिबिया में लाल रंग भी देते हैं. इनकी कीमत बहुत ज़्यादा नहीं होती फिर भी आप मोल-भाव कर सकते हैं. (सुझाउ, चीन)













































