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मायावती को सत्ता में आने से रोकने के लिए अगर कोई सबसे कोशिश कर रहा है तो वो हैं पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव. मुलायम बहुत अच्छे से जानते हैं कि अगर इस बार वो मायावती को नहीं रोक सके तो फिर पांच साल के बाद ही उन्हें मौक़ा मिलेगा और तब तक राज्य और देश के राजनीतिक हालात पूरी तरह बदल जाएंगे. वो काफ़ी मेहनत कर रहे हैं और कुछ हद तक आश्वस्त भी लग रहें हैं कि उनकी पार्टी इस बार बेहतर प्रदर्शन करेगी.
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समाजवादी पार्टी के मुस्लिम चेहरा आज़म ख़ान पार्टी में वापस आ गए हैं और कांग्रेस की तरफ़ आकर्षित हो रहे मुसलमानों को समाजवादी पार्टी की तरफ़ खींचने के लिए दिन रात एक कर रहे हैं. पार्टी में उनकी वापसी भले ही हो गई है लेकिन एक समय में यूपी के सबसे बड़े मुस्लिम नेता माने जाने वाले आज़म ख़ान के लिए मुसलमानों का वोट पार्टी की झोली में डालना इस बार बहुत मुश्किल लग रहा है.
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इस बार उत्तर प्रदेश के चुनाव में अगर किसी एक नेता पर सबकी निगाहें टिकीं हैं तो वे हैं मुलायम सिंह के पुत्र और समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव. जानकार बताते हैं कि युवा अखिलेश ने पूरी तरह से पार्टी का कमान संभाल लिया है और उम्मीदवारों के चयन में भी उनकी राय ही अंतिम मानी गई. वो काफ़ी मेहनत कर रहें हैं और समीक्षकों के अनुसार उनकी सभाओं में काफ़ी भीड़ भी जुट रही है.
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इस बार उत्तरप्रदेश में भाजपा की नैया को पार लगाने की ज़िम्मेदारी दी गई है मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को. रामजन्म आंदोलन से राष्ट्रीय राजनीति में अपने लिए जगह बनाने वाली उमा भारती एक समय में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में गिनी जाती थीं लेकिन उन्हें 2005 में पार्टी से निकाल दिया गया था. छह साल के बाद 2011 में पार्टी में उनकी वापसी हुई लेकिन उनकी मंज़िल बहुत कठिन है . 2009 लोकसभा चुनाव के बाद तो वो कांग्रेस से भी पिछड़ गई थी. उमा भारती पूरी कोशिश कर रहीं हैं लेकिन ख़ुद उनकी पार्टी के कई लोग उनके साथ पूरा सहयोग नहीं कर रहें हैं.



































