शीतलहर ने बेघरों के लिए मुश्किलें बढ़ाई

 मंगलवार, 20 दिसंबर, 2011 को 09:40 IST तक के समाचार

दिल्ली के बेघरों के लिए मुश्किलें बढ़ी

  • बेघर लोग दिल्ली
    दिल्ली में हर साल की तरह इस साल भी ठंड के मौसम में लाखों बेघर लोग सड़कों पर रात काटने को मजबूर हैं. शरीर को चुभने वाली हवा के ठंडे झोंके से बचने के लिए ये लोग आग की आंच का सहारा लेते हैं. (तस्वीरें: बीबीसी संवाददाता शालू यादव)
  • बेघर लोग दिल्ली
    दिसंबर के महीने में रात का तापमान 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, और ऐसी परिस्थितियों के बीच फ़ुटपाथ और फ़्लाईओवरों के नीचे बेघरों की कतार दिल्ली में हर रात एक आम नज़ारा है.
  • बेघर लोग दिल्ली
    दिल्ली हाई कोर्ट में बेघरों के अधिकारों के लिए जारी बहस के दौरान दिल्ली सरकार ने दलील दी है कि नए रैन बसेरे बनाए जाने की कोई ज़रूरत नहीं है, क्योंकि वहां ज़्यादा लोग आश्रय लेने नहीं आते.
  • बेघर लोग दिल्ली
    सरकार की दलील को ख़ारिज करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई और कहा कि वो समुचित सुविधाओं सहित रैन बसेरों का विस्तार करे.
  • बेघर लोग दिल्ली
    ये साल का वो वक़्त है जब रात के अंधेरे में चलने वाली शीतलहर कई लोगों को हमेशा के लिए सुन्न कर देती है. सुबह उठ कर अपने आस-पास लाशें देखना मानो इन बेघर लोगों की आदत सी हो गई है.
  • बेघर लोग दिल्ली
    85 वर्षीय हरी राम पिछले 40 सालों से यमुना किनारे पीपल के पेड़ के नीचे दिन और रात काटते आ रहे हैं. उनका कहना है कि ठंड के मौसम में हर दिन कम से कम चार बेघर लोग सड़कों पर ही दम तोड़ देते हैं.
  • बेघर लोग दिल्ली
    जहां सरकार का कहना है कि लोग रैन बसेरों में आश्रय लेने नहीं आते, वहीं बेघर लोगों का कहना है कि रैन बसेरों की दयनीय हालात की वजह से वे वहां रात काटना पसंद नहीं करते.
  • बेघर लोग दिल्ली
    इन रैन बसेरों और फ़ुटपाथ के बीच केवल एक छत भर का फ़र्क है. धूल चढ़े कंबल, गंदगी, बदबूदार वातावरण, सुरक्षा व्यवस्था और मूलभूत सुविधाओं के अभाव का आभास अंदर क़दम रखते ही हो जाता है.
  • बेघर लोग दिल्ली
    गुब्बारे बेचने का काम करने वाले कन्हैया का कहना है कि उन्हें रैन बसेरे में रहना अच्छा तो नहीं लगता, लेकिन मजबूरी और ठंड की मार उन्हें यहां खींच लाई. उनका कहना है कि वहां उन्हें कंबल भी मुहैया नहीं करवाए जाते.
  • बेघर लोग दिल्ली
    पिछले कुछ सालों में दिल्ली सरकार को कोर्ट की ओर से कई बार आदेश दिए जा चुके हैं कि वो ठंड से लोगों को बचाने के लिए समुचित रात्रि आवास प्रदान करे, लेकिन इसके बावजूद इन लाखों बेघरों के लिए कुछ नहीं बदला है.
  • बेघर लोग दिल्ली
    पिछले दिनों दिल्ली सरकार ने फ़ैसला किया था कि फ़ुटपाथ पर सोने वाले बेघरों को ठंड से बचने के लिए बब्बल रैप शीट (एक प्रकार की प्लास्टिक की चादर) दी जाएगी. लेकिन ग़ैर सरकारी संस्थाओं के कड़े विरोध के बाद उन्होंने ये फ़ैसला वापस ले लिया.
  • बेघर लोग दिल्ली
    जहां सरकार का दावा है कि शहर में 64 रैन बसेरे हैं, तो वहीं ग़ैर सरकारी संस्थाओं का कहना है कि इनमें से कुछ ही रैन बसेरे चालू हैं. शहर में रैन बसेरों का दौरा करते हुए हमने पाया कि कुछ इमारतों पर तो ताला ही लगा हुआ था.
  • बेघर लोग दिल्ली
    बेघरों के अधिकारों के लिए कोर्ट में जारी बहस के दौरान दिल्ली सरकार के वकील ने जब दावा किया कि शहर में बहुत कम बेघर लोग हैं, तो उनकी टांग खींचते हुए जस्टिस सिकरी ने जवाब दिया कि आप आंखें बंद कर के चलें तो वाकई शहर में कोई बेघर नहीं है.

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