भारत दक्षिण एशिया में मौजूदगी दर्ज करे: चीनी अख़बार

  • 2 सितंबर 2014
शिंजो और आबे

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान दोनों देशों की बढ़ती नज़दीकी पर चीन के अख़बारों और विशेषज्ञों ने सधी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

चीन में अंग्रेज़ी के अधिकांश अख़बारों ने मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे की दोस्ती का ज़िक्र तो किया है लेकिन दोनों नेताओं की बैठक से कोई अनुमान लगाने से परहेज किया है.

चीन के सरकारी अख़बार 'ग्लोबल टाइम्स' ने आबे और मोदी की इस नज़दीकी को ज़्यादा भाव नहीं दिया है.

अख़बार के मुताबिक़ चीन भारत का ऐसा पड़ोसी है जिसे दिल्ली नज़रअंदाज नहीं कर सकती. जापान और भारत की दोस्ती से भारत और चीन के रिश्तों को किसी भी तरह संतुलित नहीं किया जा सकता है.

आगे पढ़िए विस्तृत रिपोर्ट:

ग्लोबल टाइम्स कहता है, "चीन और भारत के रिश्ते मोदी और आबे के बीच बढ़ रही दोस्ती से व्यापक हैं. आख़िरकार जापान भारत से बहुत दूर है. भारत और प्रशांत क्षेत्र के बारे में आबे के प्रभावशाली भाषण से भारतीय सहज महसूस कर सकते हैं लेकिन आख़िरकार भारत को दक्षिण एशिया में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी है."

नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ जी मिंगकुई 'चाइना नेट' में लिखते हैं कि भारत जापान के साथ अपने संबंधों को तेज़ी से बढ़ा रही है लेकिन चीन को संतुलित करने के लिए उसने कभी भी टोक्यो को संतोषजनक जवाब नहीं दिया.

चीनी भाषा के अख़बार मुखर

शिंजो और आबे

उनके विचार में भारत ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि वह चीन को घेरने या संतुलित करने की मुहिम में शामिल नहीं होगा और भारत और जापान की दोस्ती चीन के ख़िलाफ़ नहीं है.

भारत और जापान के संबंधों के बारे में चीन के विचारों को समझने के लिए चीनी भाषा के अख़बारों को क़रीब से देखने की ज़रूरत है.

अंग्रेज़ी के अख़बारों ने जहां इन संबंधों पर नपी-तुली प्रतिक्रिया जताई है वहीं चीनी भाषा के अख़बारों ने मोदी और आबे की दोस्ती को सिरे से ख़ारिज किया है.

'ग्लोबल टाइम्स' की चीनी भाषा का अख़बार कहता है कि चीन और भारत के रिश्तों को साधने के लिए चीन के पास आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति होनी चाहिए. अगर मोदी अपने पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह की नीति से हटते हैं तो चीन को उन पर दबाव बनाना चाहिए.

भारत की सैन्य शक्ति

हुआनकियू शिबाओ कहता है, "भारत की सैन्य शक्ति चीन के सामने बहुत कमज़ोर है. चीन के ख़िलाफ़ अमरीका और जापान के साथ लामबंद होना भारत के हित में नहीं है."

शिंजो और आबे

अख़बार कहता है, "जापान यात्रा के बाद मोदी को भारत में राष्ट्रपति शी जिनपिंग का स्वागत करना है. उनकी यह यात्रा भारत के साथ वास्तविक दोस्ती और सहयोग के लिए है और इससे भारत और जापान के चीन के ख़िलाफ़ हाथ मिलाने की कल्पना भी छूमंतर हो जाएगी."

'द डोंगफेंग डेली' ने कहता है कि मोदी भारत के आर्थिक विकास के लिए जापान की मदद चाहते हैं और वास्तव में भारत चीन के ख़िलाफ़ नहीं जा सकता है.

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ जिया शियूडोंग ने बीजिंग न्यूज़ में लिखा है कि मोदी केवल आर्थिक संबंधों के लिए जापान का साथ चाहते हैं और इस प्रक्रिया में चीन को संतुलित करने का सवाल नहीं है.

(बीबीसी मॉनिटरिंग दुनिया भर के टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित होने वाली ख़बरों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करता है. आप बीबीसी मॉनिटरिंग की खबरें ट्विटर और फेसबुक पर भी पढ़ सकते हैं.)