अब नहीं 'गोरा होगा पाकिस्तान'

  • 28 जून 2014
जुबैदा आपा गोरेपन का साबुन

पाकिस्तान में त्वचा को गोरा बनाने का दावा करने वाला साबुन का विज्ञापन विवादों में घिर गया है.

जुबैदा आपा सोप के विज्ञापन में "गोरा होगा पाकिस्तान" टैग लाइन का इस्तेमाल किया गया था, हालांकि विवाद बढ़ने के बाद इस टैगलाइन को वापस ले लिया गया है.

पाकिस्तान के समाचार पत्र 'डॉन' के मुताबिक इस साबुन को अपना नाम देने वाली सेलिब्रिटी जुबैदा तारिक ने कहा, "मैंने उत्पाद के मालिक से इस टैगलाइन का इस्तेमाल न करने को कहा था, लेकिन उन्होंने नहीं सुना."

उन्होंने कहा, "मुझे पता है कि ये टैगलाइन लाइन सही नहीं है, लेकिन मुझे समझ में नहीं आ रहा कि इस पर इतना अधिक हो-हल्का क्यों मचाया जा रहा है."

'औरत फाउंडेशन' नाम की संस्था से जुड़ीं राबिया हादी ने बीबीसी को बताया, "लोगों की राय बनाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है. जो चीज मीडिया में दिखाई जाएगी लोग उसका आंख बंद करके उस पर अमल करेंगे. वो सही है या नहीं इसके कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है."

बाजार का खेल

जुबैदा आपा गोरेपन का साबुन

पाकिस्तान में त्वचा को साफ़ और गोरा बनाने का दावा करने वाले उत्पाद मर्दों में भी काफी लोकप्रिय है, लेकिन सामाजिक रूप से महिलाओं पर इस बात का दबाव अधिक होता है कि उनका रंग गोरा होना चाहिए.

पाकिस्तान के एक पार्लर में ब्यूटी ट्रीटमेंट कराने आई एक महिला ने बताया कि जब भी किसी लड़की के रिश्ते के लिए उसे देखने वाले आते हैं तो वो वाइटिंग ट्रीटमेंट लेती हैं क्योंकि आजकल ज़्यादातर लोगों को लगता है कि सांवली रंगत के चलते उनके रिश्ते नहीं हो पाते हैं.

पाकिस्तान में गोरेपन की इस चाहत से ब्यूटी पार्लर और कारोबारी भी इससे बहुत मुनाफ़ा कमा रहे हैं.

पाकिस्तान में कॉस्मेटिक्स के दुकानदारों का कहना है कि इस समय वहां के बाजारों में गोरा बनाने वाले देशी और विदेशी कुल 50 से अधिक ब्रांड हैं.

एक दुकानदार मोहम्मद राशिद ने बताया, "लोग पागलपन की हद तक सिर्फ गोरा बनाने वाली क्रीम ही लेना चाहते हैं. बाजार में सौ रुपये से लेकर हजार रुपये तक की क्रीम उपलब्ध हैं."

उन्होंने बताया कि इस कारोबार से जुड़े लोग बहुत पैसा बना रहे हैं.

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