यूक्रेन: राष्ट्रपति ने की संघर्ष-विराम की घोषणा

  • 21 जून 2014
यूक्रेन के राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको

यूक्रेन के राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको ने देश के पूर्वी इलाक़े में लड़ रहे रूस समर्थक चरमपंथियों के साथ एक हफ़्ते के लिए एक-तरफ़ा संघर्ष-विराम की घोषणा की है.

फ़ौज और रूस समर्थक विद्रोहियों के बीच भीषण लड़ाई होती रही है और अब ख़बरें मिल रही हैं कि इस दौरान रूसी लड़ाके और भारी सैन्य साज़ो-सामान यूक्रेन में दाख़िल कराया जा रहा है.

शांति योजना लागू होने से पहले संघर्ष-विराम की उम्मीद की जा रही थी.

संवाददाताओं का कहना है कि रूस समर्थक लड़ाकों का हथियार डालने का कोई इरादा नहीं है.

राष्ट्रपति बनने के बाद पोरोशेंको शुक्रवार को पहली बार पूर्वी यूक्रेन के दौरे पर गए थे.

वहां उन्होंने विद्रोहियों के क़ब्ज़े वाले स्लोवियान्स्क शहर के उत्तर में स्थित एक क़स्बे के लोगों और वहां तैनात यूक्रेन के सैनिकों से बात की थी.

पोरोशेंको ने कहा कि संघर्ष विराम का यह मतलब नहीं है कि हम अपने सैनिकों के ख़िलाफ़ किसी कार्रवाई पर चुप बैठेंगे, लेकिन यह कहने के पीछे उनका इरादा ये था कि विद्रोहियों को हथियार डालने के लिए समय मिल सके.

पोरोशेंको ने कहा, ''हम अपने राष्ट्र के इलाक़े को बचाने के लिए सब कुछ करेंगे.''

'आमंत्रण नहीं चेतावनी'

वहीं रूस ने यूक्रेन की इस पहल को यह कहते हुए ख़ारिज़ कर दिया है कि यह ''शांति और बातचीत के लिए आमंत्रण नहीं बल्कि एक चेतावनी है.''

यूक्रेन की न्यूज़ एजेंसियों के मुताबिक़, विद्रोहियों के एक वरिष्ठ कमांडर ने कहा है कि विद्रोही तब तक अपने हथियार नहीं डालेंगे जब तक कि सैनिक इस इलाके से नहीं चले जाते.

व्लादिमीर पुतिन

यूक्रेन की ओर से संघर्ष विराम की घोषणा तब हुई है जब एक दिन पहले ही पोरोशेंको ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से एक हफ़्ते में दूसरी बार फ़ोन पर बात की है.

पोरोशेंको ने जिस शांति योजना का प्रस्ताव रखा है, उसमें सत्ता के विकेंद्रीकरण और स्थानीय तथा संसदीय चुनाव जल्द कराने का वादा किया गया है.

इसमें यूक्रेन-रूस सीमा पर दस किलोमीटर लंबा बफ़र-ज़ोन और संघर्ष वाले इलाक़े से जाने के लिए रूस समर्थक पृथकतावादियों को सुरक्षित रास्ता देने का भी वादा किया है.

बीबीसी संवाददाता का विश्लेषण

यूक्रेन की राजधानी कीएफ़ में मौजूद बीबीसी संवाददाता डेविड स्टर्न का कहना है कि पोरोशेंको ने शांति योजना में जो बातें कहीं हैं, उनमें से अधिकतर बातें नई नहीं हैं.

पेट्रो पोरोशेंको

मसलन एकतरफ़ा संघर्ष विराम, इलाक़े में पहले से अधिक स्वायत्ता, रूसी भाषा को संरक्षण की बात पहले से ज़ाहिर हैं.

जो बात अभी स्पष्ट नहीं है, वो ये है कि पोरोशेंको इस योजना को किस तरह से लागू करने का इरादा रखते हैं और इस पर दूसरा पक्ष क्या प्रतिक्रिया देता है.

बहरहाल, लगता नहीं है कि रूस समर्थक लड़ाके अपने हथियार डालेंगे और संघर्षविराम का पालन करेंगे.

वहीं रूस मिले-जुले संकेत दे रहा है. राष्ट्रपति पुतिन ने पोरोशेंको के प्रस्ताव पर एक तरह से सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है.

लेकिन यूक्रेन और पश्चिमी देशों के अधिकारियों का कहना है कि रूस ने यूक्रेन की सीमा के आसपास सक्रियता बढ़ा दी है.

पीड़ित लोग
लगातार लड़ाई होने की वजह से इलाक़े से हाल के दिनों में कई लोगों को पलायन करना पड़ा है

ख़बरें ये भी मिल रही हैं कि रूसी लड़ाके और भारी सैन्य साज़ो-सामान यूक्रेन में दाख़िल कराया जा रहा है.

ज़ाहिर है कि पोरोशेंको इस वास्तविकता से अवगत हैं. अब जो देखना बाकी है, वह दरअसल यह है कि शांति योजना विफल होने पर पोरोशेंको क्या रुख़ अपनाते हैं.

व्हाइट हाउस का कहना है कि वह स्थिति पर नज़र बनाए हुए है और ''पूर्वी यूक्रेन में रूसी सैन्य बलों के इस्तेमाल को मंज़ूर नहीं करेगा.''

ताज़ा घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में रूस और यूक्रेन के बीच चला आ रहा विवाद है जो यूक्रेन के रूस समर्थन राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच को अपदस्थ करने और क्राईमिया को रूस में शामिल करने की वजह से पैदा हुआ था.

इस दौरान, गुरुवार को पोरोशेंको ने कहा कि वह यूरोपीय संघ से मेलजोल संबंधी विवादित समझौते पर 27 जून को को दस्तख़त करेंगे.

यानुकोविच को इस वर्ष फ़रवरी में सत्ता से तब हटा दिया गया था जब उन्होंने यूरोपीय संघ के साथ इस समझौते पर दस्तख़त करने से मना कर दिया था.

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