पाकिस्तान-चीन रिश्तों से जुड़े पाँच सवाल

  • 15 मई 2014
पाकिस्तान और चीन के राष्ट्रपति

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मियां नवाज़ शरीफ़ हाल ही में गवादर गए और उन्होंने बीबीसी से बात करते हुए ख्वाहिश जताई कि गवादर 'फ्री पोर्ट' बने.

वे चाहते हैं कि पाकिस्तान चीन आर्थिक कॉरीडोर के नतीजे के तौर पर गवादर दुबई, सिंगापुर और हांगकांग की तरह 'फ्री पोर्ट' बन सकता है.

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पाकिस्तान चीन आर्थिक कॉरीडोर की बात कई सालों से हो रही है लेकिन इस योजना को लेकर मौजूदा घरेलू और बाहरी आशंकाओं और आपत्तियां अपनी जगह हैं और इन सबकी मौजूदगी में गवादर को सिंगापुर बनाने का सपना या बलूचिस्तान की किस्मत बदलने का सपना सच बन सकेगा?

पाकिस्तान चीन आर्थिक कॉरीडोर (पीसीईसी) चीन के उत्तर पश्चिमी शहर काशगर को पाकिस्तान के दक्षिणी हिस्से से मिलाता है जिसके ज़रिए चीन का संपर्क गिलगित बलतिस्तान से होकर बलूचिस्तान में गवादर के गहरे पानी के बंदरगाह के जरिए अरब सागर तक हो सकता है.

पीसीईसी परियोजना का उद्देश्य संचार के अलावा समुद्री और ज़मीनी व्यापार में वृद्धि करना भी है. गवादर बंदरगाह का प्रबंधन इन दिनों एक चीन की सरकारी कंपनी के पास है और यह ईरान सीमा के पास स्थित है जो हरमुज़ जलडमरूमध्य की ओर जाता है. हरमुज़ जलडमरूमध्य खुद तेल के समुद्र परिवहन का मुख्य रास्ता है.

आर्थिक हालात

यह कॉरिडोर चीन को पश्चिम और मध्य एशिया से अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने की सुविधा देता है और साथ ही पाकिस्तान के आर्थिक हालात में सुधार की उम्मीद भी की जा रही है. पाक चीन आर्थिक गलियारे का उद्देश्य पाकिस्तान की सड़कों, रेलवे और पाइप लाइनों के पुनर्निर्माण करना है ताकि समुद्र के माध्यम से माल का वितरण हो सके.

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उसी के हिस्से के तौर पर आर्थिक ज़ोन, औद्योगिक पार्क, बुनियादी ढांचे और ऊर्जा परियोजना भी शामिल हैं. चीन और पाकिस्तान के बीच व्यापारिक सहयोग इस समय 12 अरब डॉलर है जो चीन के अन्य देशों (जैसे भारत) के साथ व्यापार संबंध की तुलना में कम है.

और यह भी कि पाकिस्तान और चीन के बीच व्यापार संतुलन इस समय चीन के पक्ष में है जो पाकिस्तान के साथ चीन के दूरगामी संबंधों की दिशा की पहचान करता है.

सीनेटर मुशाहिद हुसैन जो इस्लामाबाद स्थित पाकिस्तान चाइना इंस्टीट्यूट (पीसीआई) के प्रमुख भी हैं, वे कहते हैं कि चीन पाकिस्तान में इस समय 120 परियोजनाओं पर काम कर रहा है जिसकी वजह से देश में 15 हजार तक चीनी इंजीनियर और तकनीशियन मौजूद हैं.

सार्वजनिक संपर्क

पाकिस्तान और चीन के राष्ट्रपति

उन्होंने बताया कि दस हजार पाकिस्तानी छात्र चीन में पढ़ रहे हैं और इसके अलावा एक बड़ी संख्या में चीनी पाकिस्तानी विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे हैं, जैसे इस्लामिक यूनीवर्सिटी और नैशनल यूनिवर्सिटी ऑफ माडर्न लैंग्वेजेज, जहां एक कन्फ्यूशियस अध्ययन केंद्र भी है.

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सीनेटर मुशाहिद के अनुसार पाकिस्तान और चीन के बीच सांस्कृतिक और सार्वजनिक रूप से संपर्क फिलहाल कम हैं लेकिन इस सहयोग में आहिस्ता आहिस्ता इजाफा हो रहा है.

पीसीआई का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान और चीन के लोगों के बीच सांस्कृतिक आदान प्रदान बढ़ाना है. यह अपनी तरह का पहला संस्थान है जिसने चीनी भाषा को पाकिस्तानी शैक्षिक संस्थानों के पाठ्यक्रम में शुरू करवाया है. पीसीआई के अनुसार देश में तीन हजार छात्र चीनी भाषा सीख रहे हैं.

चीन में पूर्व पाकिस्तानी राजदूत और इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटेजिक स्टडीज़, इस्लामाबाद (आईएसएसआई) के मौजूदा अध्यक्ष खालिद महमूद का कहना है कि लोगों के बीच आपसी बातचीत अभी भी पाकिस्तान चीन संबंध का कमजोर पहलू है और इसकी एक वजह भाषा का अंतर है. फिर भी थिंक टैंक और यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम इस दिशा में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे हैं.

सर्वेक्षणों के अनुसार एक तिहाई चीनी पाकिस्तान के बारे में सकारात्मक राय रखते हैं जबकि 23 प्रतिशत भारत के बारे में और 42 प्रतिशत अमेरिका के बारे में अच्छी राय रखते हैं. दूसरी ओर 2013 में प्यू रिसर्च सेंटर की ओर से कराए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार 81 प्रतिशत पाकिस्तानी चीन को पसंद करते हैं.

'प्यार भरी' दोस्ती

सीनेटर मुशाहिद

सवाल यह उठता है कि इस अंतर से क्या पता चलता है? क्या इसकी वजह पाकिस्तान में सुरक्षा को लेकर खराब स्थिति है, जिससे अतीत में चीनी भी प्रभावित होते रहे हैं? पिछले साल जून के महीने में दो चीनी और चीनी मूल के अमरीकी नागरिक पाकिस्तान में मारे गए थे. इससे एक साल पहले एक चीनी महिला को कथित तौर पर तालिबान पाकिस्तान ने हत्या कर दी थी.

(हथियारों का सबसे बड़ा खरीददार)

इसके अलावा चीन के उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में जारी चरमपंथ को भी पाकिस्तान में चरमपंथियों के पनाहगाह से जोड़ा गया है. पाकिस्तान चीन की 'प्यार भरी' दोस्ती की कहानी में एक कांटा सुरक्षा की समस्या है जिसके कारण पीसीईसी में भी रुकावट पैदा होने की आशंका है.

क्या इसका हल विशेष सुरक्षा बलों की तैनाती है? सीनेटर मुशाहिद हुसैन का कहना है कि एक विशेष सुरक्षा बल जिसे सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त हो, वे चीनी परियोजनाओं को 'फ़ूल प्रूफ' सुरक्षा प्रदान कर सके, उसे बलूचिस्तान और गिलगित बलतिस्तान में तैनात किया जाने की योजना पर काम हो रहा है.

खालिद महमूद का कहना है कि चीन और पाकिस्तान इस बात पर सहमत हैं कि पाकिस्तान में चीनी हितों की सुरक्षा के संरक्षण के संबंध में पाकिस्तान हर संभव प्रयास कर रहा है और चीन पाकिस्तान के प्रयासों से 'संतुष्ट' है.

गवादर बंदरगाह

गवादर बंदरगाह

याद रहे कि पाकिस्तान की हथियारों को लेकर जो सैन्य आत्मनिर्भरता है उसमें चीन की अहम भूमिका है और 2008 से 2013 के बीच आधे से अधिक चीनी हथियारों का खरीददार पाकिस्तान ही था.

(पाकिस्तान के साथ परमाणु सहयोग)

पाकिस्तान चीन आर्थिक संबंधों में बाधा डालने में 'बाहरी तत्वों' की संभावित भूमिका के बारे में सवाल के जवाब में सिनेटेर मुशाहिद ने कहा कि ऐसा संभव है लेकिन चीन इस बात को समझता है और पाकिस्तान पर विश्वास रखता है.

बलोच अलगाववादियों के मंसूबे पर संभावित असर या रुकावट के बारे में सीनेटर मुशाहिद हुसैन का दावा है कि गवादर के आसपास का इलाका शांतिपूर्ण है और उनके प्रभावित होने की संभावना कम है.

मई 2014 में जहां नवाज सरकार ने अपना पहला साल पूरा किया है वहीं चीन पाकिस्तान संबंधों को 63 साल पूरे हो रहे हैं और पीसीईसी जैसी बड़ी परियोजनाओं पर काम आगे बढ़ रहा है.

इस बारे में सुरक्षा चिंताओं पर भी बेशक काबू पाने की रणनीति नजर आती है, मगर सवाल उठता है कि इस क्षेत्र के बदलते हालात में ये ' रणनीति' किस हद तक कारगर होगी और पाकिस्तान जहां अपनी ही आंतरिक सुरक्षा के खतरों से जूझ रहा है वह एक ' मित्र देश' के हितों की रक्षा कर पाएगा?

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