लादेन केस: डॉक्टर के वकील ने मुक़दमे से हाथ खींचा

  • 10 मई 2014
शकील अफरीदी

ओसामा बिन लादेन को पकड़ने में अमरीका की मदद करने वाले डॉक्टर के वकील ने हत्या की धमकियों के बाद इस मुक़दमे से ख़ुद को अलग करने का फ़ैसला लिया है.

बीबीसी से बातचीत में वकील सामीउल्लाह अफ़रीदी ने कहा कि डॉ. शकील अफ़रीदी को रिहा करने के लिए पाकिस्तान पर अमरीकी दबाव भी उनके फ़ैसले का एक कारण है.

डॉ. अफ़रीदी पर आरोप है कि बिन लादेन की तलाश में अमरीका की मदद के लिए उन्होंने सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम का सहारा लिया था.

जब 2011 में एक छापे के दौरान अल क़ायदा नेता की हत्या हुई थी, तो पाकिस्तान को इसकी सूचना नहीं दी गई थी.

सामीउल्लाह अफ़रीदी ने बीबीसी को बताया कि दो साल पहले जब उन्होंने मुक़दमे को अपने हाथ में लिया था, तबसे उन्हें अपनी जान का ख़तरा पैदा हो गया था.

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एक ख़बर में कहा गया है कि अफ़रीदी ने सुरक्षा चिंताओं की वजह से पिछले दिसंबर में ही पाकिस्तान छोड़ दिया था.

उन्होंने कहा कि चरपंथियों ने 'सही रास्ता' चुनने के लिए एक समय सीमा दी है, इसका मतलब है कि वे उस मुक़दमे से अलग हो जाएं.

अफ़रीदी ने कहा, ''मैंने यह मामला मानवीय आधार पर अपने हाथ में लिया था, लेकिन अब मुझे अपनी जान की फ़िक्र है. यह ज़्यादा महत्वपूर्ण है.''

उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. शकील को रिहा करने के लिए पाकिस्तान पर अमरीका द्वारा डाला जा रहा दबाव 'ग़लत' है और वह मुक़दमे में रुकावट डाल रहा है.

डॉ. शकील की तरफ़ से मुकदमा लड़ रहे चार वकीलों में से एक वकील अफ़रीदी ने कहा कि इस मुक़दमे से हटने के अलावा, उनके पास कोई और चारा नहीं था.

शकील अफ़रीदी को लेकर पाक पर बढ़ा अमरीकी दबाव

अमरीकी दबाव

चरमपंथी समूहों से संबंध रखने के आरोप में डॉ. शकील को दोषी ठहराया गया था और 2012 में एक कबीलाई अदालत ने उन्हें 33 वर्ष की क़ैद की सज़ा सुनाई थी.

इसे बिन लादेन को पकड़वाने की सज़ा के बतौर देखा जा रहा था, हालांकि वो इससे इनकार करते हैं.

अमरीका और चिकित्सक के परिजनों की ओर से दबाव के कारण, इसी वर्ष पेशावर की एक अदालत ने उनकी सज़ा 10 वर्ष कम कर दी थी.

हालांकि, उनके ख़िलाफ़ अभी भी एक अन्य मामले में अभियोग चलाया जाना है. इसमें उन पर सीआईए के साथ मिलकर साज़िश रचने का आरोप है.

अमरीका के विशेष सुरक्षाबलों ने एबटाबाद में बिन लादेन के परिसर पर धावा बोलकर उनकी हत्या कर दी थी और शव को पाकिस्तान से बाहर ले जाकर समुद्र में दफ़न कर दिया था.

यह कार्रवाई पाकिस्तान के लिए काफ़ी शर्मसार कर देने वाली थी और इसके बाद अमरीका के साथ पहले से ही तनावपूर्ण चल रहे संबंधों में और खटास आ गई थी.

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