अमरीका को भूलने की बहुत बुरी लत है

  • 9 मई 2014
एफ़बीआई

अब एक साहब अमरीकी जांच एजेंसी एफ़बीआई के एजेंट हैं. दौरे पर पाकिस्तान गए, किस इरादे से, ये तो वही जानें लेकिन फ़्लाइट पर बंदूक की गोलियां लेकर सवार हो गए.

पुलिस ने पकड़ा तो कहने लगे भूल गया था कि मेरे बैग में गोलियां रखी हुई हैं. ये जनाब उस महक़मे से हैं जो अमरीका में किसी को, ख़ासकर हमारी-आपकी चमड़ी वाले को होम्योपैथी की गोलियों की बात करते हुए भी सुन लें तो कान खड़े हो जाते हैं.

जब भूलने की बात आती है तो अपने पराए में भी फ़र्क नहीं करते. अब मुशर्रफ़ को देख लें. यहां आते थे तो लगता था कि अमरीका का उनसे बड़ा कोई दोस्त नहीं. अब सितारे ग़र्दिश में हैं, देश से ग़द्दारी का मुक़दमा चल रहा है तो अमरीका से कोई खोज ख़बर नहीं ले रहा.

उनकी तारीफ़ के पुल बांधने वालों में से कुछ लोगों से मैने वक़्त मांगा कि कुछ कहना चाहेंगे उनके बारे में. सोचा मेरी ख़बर बन जाएगी और जनरल साहब को भी थोड़ा सुकून मिलेगा. लेकिन सबने कन्नी काट ली.

इराक़ में गिल्ली डंडा

जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने उन्हें थोड़ा बहुत याद भी रखा, उनकी पेंटिंग बनाई लेकिन बाल पूरे सफ़ेद कर दिए. थोड़ा सा काले रंग का इस्तेमाल कर लेते तो कमांडो इतना बूढ़ा तो नहीं नज़र आता. बुश भी भूल गए होंगे कि बड़ी मेहनत से थोड़ी सी सफ़ेदी छोड़ी जाती थी मुशर्रफ़ साहब की कनपट्टियों के ऊपर जिससे उम्र का बस रौब भर नज़र आए.

रूस ने यूक्रेन में कबड्डी खेलनी शुरू कर दी, यहां हाय-तौबा मच गया. विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा किसी देश को दूसरे देश में दख़ल-अंदाज़ी की इजाज़त नहीं है. बिल्कुल सही कहा उन्होंने. साल 2003 में तो अमरीका इराक़ में गिल्ली-डंडा खेलने गया था और केरी साहब ने उसके हक़ में वोट दिया था. भूल गए होंगे!

बराक ओबामा

लेकिन ये सब तो छोटी-मोटी बाते हैं. मुझे तो ऐसा लग रहा है जैसे अमरीका ये भी भूल गया है कि व्हाइट हाऊस में इन दिनों कौन रहता है.

ढाई साल बचे हुए हैं ओबामाजी के अभी, लेकिन टीवी चैनलों पर कई बार ढूंढे से भी नहीं नज़र आते.

बड़ी जद्दोजहद के बाद तो व्हाइट हाऊस की कुर्सी मिली थी, अमरीकियों को ओबामा कहने की आदत पड़ी थी क्योंकि वो तो बस ओसामा-ओसामा की रट लगाए रहते थे. लेकिन कोई पूछ ही नहीं रहा. बाल सफ़ेद होते जा रहे हैं वो अलग.

अमरीका में मिड-टर्म चुनाव हो रहे हैं. लेकिन ख़बर ये भी सुनने को मिल रही है कि कई सेनेटर नहीं चाहते कि ओबामा उनके लिए प्रचार करें.

मंदिर का घंटा

बस भला हो फ़ॉक्स न्यूज़ का कि वो बेचारे नियम से मंदिर के घंटे की तरह बजते रहते हैं, ओबामा को मुसलमान क़रार देने की बहस में जुटे रहते हैं.

गूगल न्यूज़ पर भी ट्रेंड करने वाले नामों की लिस्ट में नरेंद्र मोदी नज़र आते हैं, किम कारदाशियां नज़र आती हैं और पिछले तीन-चार दिनों से मोनिका लेविंस्की नज़र आने लगी हैं. ओबामा का कहीं अता-पता नहीं.

मोनिका लेविंस्की से याद आया कि वो एक बार फिर से मुंह खोल बैठी हैं. कह रही हैं वो पहली बार चुप्पी तोड़ रही हैं क्योंकि अब उस दाग़दार ब्लू ड्रेस को हमेशा कि लिए दफ़ना देना चाहती हैं.

मोनिका लेविंस्की

लेकिन जहां तक मुझे याद है "मोनिकाज़ स्टोरी" के नाम से उन पर लिखी पूरी किताब आ चुकी है जिसमें उन्होंने एक 21 साल की इंटर्न और दुनिया के सबसे ताक़तवर इंसान की प्रेम-कहानी का पूरा ब्योरा दिया है.

बिल क्लिंटन की तरह शायद उन्हें भी भूलने की बीमारी लग गई है क्योंकि क्लिंटनजी तो मोनिका का नाम 1998 में ही भूल गए थे जब एक प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा था- "मेरा 'उस औरत' के साथ कोई सेक्स संबंध नहीं था." और जिस ठंडेपन से उन्होंने ये बात कही थी, उससे रेगिस्तान में भी दो इंच बर्फ़ जम गई होगी.

अमरीका भी मोनिका लेविंस्की को भूल गया था लेकिन आकाशवाणी के भूले-बिसरे गीत की तरह पुराने रेकॉर्ड्स फिर से बजने लगे हैं. बरसाती मेंढ़क की तरह वही आवाज़ें फिर से सुनाई देने लगी हैं जिनमें एक बिल क्लिंटन को राक्षस कहता है दूसरा मोनिका को लूज़ कैरेक्टर.

पोलियो की मार

दरअसल इन दिनों ओबामा से ज़्यादा चर्चा हिलेरी क्लिंटन की रहती है. रिपब्लिकन हमलों का निशाना भी वही बन रही हैं. बुश के उप-राष्ट्रपति रह चुके डिक चेनी की पत्नी ने कहा है कि मोनिका लेविंस्की ने हो सकता है हिलेरी के कहने पर ही दोबारा मुंह खोला हो ताकि जब चुनाव की गर्मी तेज़ हो तो इस मामले पर विरोधियों का मुंह बंद हो चुका हो.

चुनाव से मोदीजी याद आ गए. उनके मामले में भी अमरीका सब कुछ भूल गया है. जिन कारणों से अमरीका उन्हें अब तक वीज़ा देने से इंकार करता रहा, वो सारी बातें वो भूल गया है. अब तो सात रेसकोर्स की चाभी मोदी को मिली नहीं कि अमरीका से आवाज़ जाएगी- पधारो म्हारे देस.

चाभी नहीं मिली तो फिर कुछ पुरानी बातें याद भी आ सकती हैं.

और हां, अगर आप अफ़ग़ानिस्तान या पाकिस्तान में रहते हों और आपको लग रहा हो कि अमरीका आपको भी भूल जाएगा तो आपका डर जायज़ है. वहां पोलियो की तरह इस बीमारी का भी कोई टीका नहीं है.

लेकिन बॉलीवुड की फ़िल्मों में जब याददाश्त चली जाती है तो डॉक्टर कहता है- बेटे, ये सब कुछ भूल गए हैं लेकिन कभी-कभी किसी अचानक लगे बड़े झटके के बाद फिर से सब कुछ याद आ सकता है.

(बीबीसी हिंदी का एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें. आप ख़बरें पढ़ने और अपनी राय देने के लिए हमारे फ़ेसबुक पन्ने पर भी आ सकते हैं और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)