अटल के दौर को वापस लाने की कोशिश करेंगे: नवाज़

  • 6 मई 2014
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने कहा है कि भारत में चुनावों के बाद कोई भी सरकार आए, वह उससे बातचीत के लिए तैयार हैं.

बीबीसी उर्दू से हुई बातचीत में उन्होंने कहा, "हिंदुस्तान में चुनाव हो रहे हैं. जिसको भी हिंदुस्तान की अवाम अपना नुमाइंदा चुनती है, यक़ीनन हम उनके साथ बैठकर बात करेंगे."

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के गठबंधन एनडीए के शासनकाल का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, "1999 में वाजपेयी साहब को हमने आमंत्रित किया. कितना अच्छा वक़्त था वो, कितना अच्छा पीरियड था वो. हम लोग कोशिश करेंगे कि वापस लाएं उसी दौर को. ट्रेन को भी चलना चाहिए. वीजा नियमों को भी नरम करना चाहिए."

उन्होंने भारत के साथ रिश्तों के बारे में कहा, "हिंदुस्तान हमें बिजली देना चाहता था हम उस पर भी बात करेंगे और मैं ये समझता हूँ कि दोनों देश अच्छे ताल्लुकात बनाकर बहुत ख़ुश रह सकते हैं. कश्मीर के अलावा और भी मुद्दे हैं, उनको भी साथ-साथ हल करने की कोशिश की जाएगी."

चरमपंथियों द्वारा युद्धविराम के उल्लंघन के बावजूद नवाज़ शऱीफ़ को लगता है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के साथ शांति वार्ता सफल हो सकती है.

अटल बिहारी वाजपेयी (फ़ाइल)

तालिबान के साथ वार्ता

नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि देश में लंबे समय से जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए वार्ता ही सबसे 'अच्छा विकल्प' है.

पिछले साल हुए चुनावों में नारा दिया गया था कि 'शांति पाकिस्तानी तालिबान (टीटीपी) के साथ-साथ चलती है.'

इस साल फ़रवरी से अब तक तालिबान के साथ वार्ता में थोड़ी प्रगति हुई है. इसके पहले टीटीपी के साथ बातचीत के सभी प्रयास विफल हो गए थे.

एक दशक पहले पाकिस्तान में शुरू हुई आंतरिक बग़ावत से उपजी हिंसा में अब तक हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं.

बीबीसी उर्दू के साथ लंदन में हुई इस ख़ास बातचीत के दौरान नवाज शरीफ़ ने कहा कि उनको यक़ीन है कि उनकी 'बग़ैर ख़ून बहाए शांति हासिल करने' की रणनीति सफल रहेगी.

उन्होंने कहा, "अगर हम किसी तरीके से इस प्रक्रिया को सफल बना पाते हैं तो यह सबसे अच्छा विकल्प होगा."

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान

पिछले साल मई में सत्ता संभालने के बाद से ही शरीफ़ के ऊपर पाकिस्तान में बढ़ती हिंसा को नियंत्रण में लाने का दबाव था.

संवाददाताओं का कहना है कि पाकिस्तान में कुछ लोग चिंतित हैं कि बातचीत से चरमपंथियों को अपनी ताक़त हासिल करने और फिर से संगठित होने में मदद मिलेगी. वहीं कुछ पर्यवेक्षकों को संदेह है कि तालिबान देश के संविधान का सम्मान करने का इच्छुक है.

'हथियार डालने होंगे'

पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर प्रांत में केंद्रित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) पूरे पाकिस्तान में इस्लामी क़ानून या शरिया लागू करवाने के लिए प्रतिबद्ध है.

लेकिन नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि चरमपंथियों को संविधान का सम्मान करना होगा और हथियार डालने होंगे.

उन्होंने कहा, "वास्तव में यह हमारी पहली प्राथमकिता है जिसे हासिल करना होगा."

पाकिस्तान, तालिबानी लड़ाके

उन्होंने कहा, "हम इस मुद्दे पर तरक्की कर रहे हैं. हमें देखना चाहिए कि अगले दौर की वार्ता सफल हो और हम एक-दूसरे के साथ वार्ता को आगे बढ़ाने का रास्ता निकाल सकते हैं."

पाकिस्तान सरकार की तालिबान के साथ दो दौर की वार्ता पहले ही हो चुकी है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ़ ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच दो या तीन दौर की वार्ता के बाद ही दोनों पक्ष यह समझ पाएँगे कि "हम एक-दूसरे के साथ कितने गंभीर हैं और वार्ता कैसे आगे बढ़ रही है?"

वहीं तालिबान का कहना है कि वे बातचीत को लेकर प्रतिबद्ध हैं, लेकिन उन्होंने सरकार पर उनकी माँगों को लेकर ख़ामोश रहने का आरोप लगाया, जिसमें क़ैदियों की रिहाई का मुद्दा भी शामिल है.

(बीबीसी हिंदी का एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें. आप ख़बरें पढ़ने और अपनी राय देने के लिए हमारे फ़ेसबुक पन्ने पर भी आ सकते हैं और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार