यूरोप में भारत के अलफांसो आमों पर रोक

  • 28 अप्रैल 2014
आम

28 देशों वाले यूरोपीय संघ ने मशहूर भारतीय आम अलफांसो और चार सब्जियों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है. यह प्रतिबंध 1 मई से लागू होगा.

इस घोषणा से यूरोप में भारतीय समुदाय, क़ानूनविदों और व्यापारियों में काफी रोष है.

यूरोपीय संघ की स्वास्थ संबंधी एक स्थायी समिति ने यह फ़ैसला लिया है.

2013 में भारत से आयातित फलों और सब्जियों की 207 खेपों को कीटनाशक पदार्थों से दूषित पाया गया था.

यूरोपीय आयोग के इस प्रस्तावित अस्थायी प्रतिबंध के अंतर्गत आम, बैंगन, अरबी, ककड़ी और चिचिण्डा जैसी सब्जियों को शामिल किया गया है.

हालांकि, भारत से यूरोप में आयात होने वाले कुल फल और सब्जियों में इनका हिस्सा पांच प्रतिशत ही है.

समिति का कहना है कि नए कीटनाशकों के प्रयोग से यूरोप की खेती और उत्पादन पर ख़तरा पैदा हो सकता है.

आम के आम, गुठलियों के दाम

व्यापारियों को भारी नुकसान

इस प्रतिबंध का समर्थन करने वाली ब्रितानी संस्था डेफ्रा (डिपार्टमेंट फॉर एनवायरनमेंट, फ़ूड एंड रूरल अफ़ेयर्स) ने कहा है कि कीटनाशकों के कारण यह प्रतिबंध ज़रूरी था, क्योंकि यह देश के 32.1 करोड़ पौंड (3279.24 करोड़ रुपए) के सलाद उद्योग (खीरा, ककड़ी) के लिए ये ख़तरा हो सकते थे.

ब्रिटेन हर वर्ष 1.6 करोड़ आमों का आयात करता है और वहां इसका बाज़ार 60 लाख पाउंड (क़रीब 62 करोड़ रुपए) का है.

इस प्रतिबंध पर पुनर्विचार 31 दिसम्बर 2015 से पहले किया जाएगा. व्यवसायियों का दावा है कि उन्हें इस प्रतिबंध से लाखों का नुकसान होगा.

ब्रिटेन में भारतीय बहुल इलाकों के थोक एवं फ़ुटकर विक्रेताओं ने इस प्रतिबंध का विरोध किया है.

इस बारे में यूरोपीय आयोग को ख़त लिखने वाले भारतीय मूल के एमपी कीथ वाज़ कहते हैं, ''यह बेवकूफ़ी है और नौकरशाह पागल हो गए हैं. भारतीय आम सदियों से ब्रिटेन में मंगाए जाते रहे हैं. मैं इस बात से नाराज़ हूं कि यह प्रतिबंध लगाते समय उन लोगों से सलाह मशविरा तक नहीं लिया गया जो इससे प्रभावित होंगे.''

उन्होंने इस बारे में भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी ख़त लिखा है.

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