यूरोप में प्रवेश के लिए जानवरों की तरह रहना मंज़ूर

  • 20 अप्रैल 2014
मोरक्को की पहाड़ी पर रह रहे विभिन्न सब सहारा अफ़्रीकी देशों के युवा

सब सहारा अफ़्रीकी देशों के हज़ारों प्रवासी मोरक्को की एक पहाड़ी पर रह रहे हैं. यह पहाड़ी यूरोप की सीमा से केवल कुछ ही दूरी पर है.

स्पेन के शहर मेलीलिया की सीमा पर लगी बाड़ें, यूरोप में घुसने को मुश्किल बनाती हैं. अधिकारियों का कहना है कि सीमा पर प्रवासियों की बाढ़ सी आ गई है. इसलिए सीमा पर लगी बाड़ों को और मज़बूत किया जा रहा है.

डाई डोबी 19 साल के हैं और यूरोप में प्रवेश करने के लिए उन्होंने अपना जीवन दांव पर लगा दिया है. वो कहते हैं कि पिछले 14 महीने से वो गुरुगु पहाड़ी के जंगलों में जानवरों की तरह रह रहे हैं. वो पत्थरों, लकड़ियों और कंबलों से बनी एक झोपड़ी में रह रहे हैं.

पढ़ाई की चाह

फ़ेलिक्स 25 साल के है और कैमेरून के रहने वाले हैं. वह अपनी पढ़ाई लंदन में पूरी करना चाहते हैं. उन्होंने सात बार मेलीलिया को पार करने की कोशिश की है.वहीं 22 साल के ओगी को सिएरा लियोन स्थित घर से इस पहाड़ी तक पहुँचने में चार महीने लगे.

अवैध प्रवासी होने की वजह से पुलिस से बचने के लिए 24 साल के लेनी ओठे चार साल तक जंगलों में रहे. वो कहते हैं, '' मैं सड़क पर नहीं जा सकता क्योंकि वहाँ मुझे पुलिस पकड़ सकती है. मेरे पास आज़ादी नहीं है. इसलिए में रहने के लिए जंगल में चला आया."

इस तरह के प्रवासी मोरक्को के नज़दीकी शहर नाडोर में भीख मांगते हैं. प्रमुख रूप से उनका खाना ब्रेड होता है.

एक व्यक्ति ने मुझे बताया कि कभी-कभी वो मांस के लिए बिल्ली और कुत्तों को मारते हैं.

इनमें से कइयों ने कहा कि वो पढ़े-लिखे हैं. एक ने बताया कि उन्होंने खाना बनाने में डिप्लोमा किए हुए हैं वहीं एक दूसरे ने कहा कि वो टेक्निशियन हैं.अधिकांस प्रवासी कम से कम दो भाषाएं बोलते हैं.

कैसे पार करें सीमा

मोरक्को की पहाड़ी पर बनी झोपड़ियां

पहाड़ी पर कैमेरून से ऊपर माली का कैंप है. इससे ऊपर एक दूसरा कैंप अफ़्रीका के अन्य देशों के लोगों का है.

लेकिन इन कैंपों में रहने वाले पुरुषों और कुछ महिलाएं केवल एक बात को लेकर चिंतित हैं कि आखिर आठ मीटर ऊंचे धातु की सीमा को पार कर यूरोप में कैसे दाखिल हुआ जाए.

ये कैंप जहाँ ये प्रवासी रह रहे हैं, वह जगह मोरक्को से लगती मेलीलिया की सीमा से केवल पांच मिनट की दूरी पर है.

इस सीमा पर प्रतिदिन मोरक्को और मलेलीया के बीच 40 हज़ार लोगों का आधिकारिक आवागमन होता है.

इस सीमा को पार करने के लिए कई बार गाड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है. प्रवासी गाड़ी की चेचिस की खाली जगह में भरकर उस पार चले जाते हैं.

इस सीमा को तीन तरह से सुरक्षित किया गया है, बाड़, कंटीले तार और कैमरा. स्पेन की सरकार के मीलीलिया में प्रतिनिधि अब्देलमलिक अल बरकानी कहते हैं, यूरोप का साढ़े 11 किलोमीटर लंबा हिस्सा बहुत अधिक दबाव में है.

पुलिस की मौज़ूदगी

स्पेन मेलीलिया में बाड़बंदी को बढ़ावा दे रहा है और उसने वहाँ और पुलिस के जवान भेजे हैं.

इस सीमा पर अब सुबह जब इस तरह के सैकड़ों लोग सीमा पार करने की कोशिश करते हैं, तब वहाँ पुलिस की भारी मौज़ूदगी होती है. कुछ लोग सफल भी हो जाते हैं.

स्पेन की पुलिस इसे इंसानों का हिमस्खलन बताती है. उनका कहना है कि प्रवासी एक मिनट से भी कम समय में भी सीमा पर लगी बाड़ों को पार करना सीख जाते हैं.

इनमें से कुछ मोरक्को की सीमा पर लगी बाड़ का उपयोग ख़ुद को तीसरी बाड़ पर फेकने के लिए गुलेल के रूप में करते हैं, वहाँ से वो मेलीलिया में कूद सकते हैं.

बरकानी कहते हैं, यूरोपिय संघ को यूरोप के दक्षिण में स्थित इस सीमा की रक्षा के लिए स्पेन को और सहायता देनी चाहिए.

एक बार मेलीलिया में घुस जाने के बाद प्रवासी को अस्थायी रूप से विदेशियों के लिए बने केंद्र में रहना पड़ता है.

इस केंद्र में पांच सौ लोगों के लिए कमरे बने हैं. लेकिन इस समय वहाँ 19 सौ लोग रह रहे हैं.

आज़ादी का एहसास

स्पेन में घुसने की फिराक में लोग

कांगो निवासी मूसा पिछले तीन महीने से मेलीलिया में हैं. वह कहते हैं कि स्पेन की सीमा में आना आज़ाद होने जैसे था, क्योंकि कैंप में जीवन बहुत कठिन था.

अब वो यूरोप में रहने की योजना बना रहे हैं. वो कहते हैं कि उन्हें विश्वास है कि मेरा सपना एक दिन जरूर पूरा होगा.

वहीं गाबान के 24 साल के फ़ुनवई ईबेनजीर यूरोप में अपने नए जीवन को लेकर अधिक आशावादी हैं. वो जर्मनी में रहना चाहते हैं. लेकिन अभी वो अन्य प्रवासियों की तरह उपेक्षित हैं और उनका मुकदमा चल रहा है.

मेलीलिया की सड़कों पर खड़ी कारों का पोछने के अलावा उनके पास कोई और काम नहीं है.

मेलीलिया के अधिकारियों का कहना है कि अधिकांस प्रवासियों को स्पेन की मुख्य भूमि में ले जाया जाएगा. लेकिन बहुत से लोग वहीं फिर लौट आएंगे, जहाँ से उन्होंने अपनी यात्रा शुरू की थी.

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