जिस घर में रचा गया मार्केज़ का कालजयी उपन्यास

  • 18 अप्रैल 2014
गार्सिया का घर

मैक्सिको सिटी की ला लोमा सड़क पर बहुत सारे हरे-भरे पेड़ दिखते हैं. यहां की शांति हैरान करने वाली है. यहां से कुछ ही क़दमों की दूरी पर आलीशान इलाक़ा बिज़नेस एवेन्यू है.

19, ला लोमा एक सफ़ेद रंग का मकान है, जिसके आगे कोपाडा पौधे की लताएं लटकी हुई हैं. पहली नज़र में यह किसी आम मध्यवर्गीय लातिनी अमरीकी घर की तरह दिखता है.

लेकिन यह एक ख़ास घर है. इसी घर में वर्ष 1965 से 1966 के बीच नोबेल पुरस्कार विजेता लेखक गैब्रियल गार्सिया मार्केज़ ने अपनी सबसे उत्कृष्ट कृति यानी ''वन हन्ड्रेड ईयर्स ऑफ़ सॉलिट्यूड'' उपन्यास लिखा.

अब मार्केज़ के निधन के बाद ये जानना जरूरी है कि उन्होंने ये कालजयी उपन्यास जिस घर में लिखा, वह कहां और कैसा था और तब वह किस तरह की स्थितियों से जूझ रहे थे.

18 महीनों तक उन्होंने यहां रोज छह घंटे लिखते हुए गुजारे. आमतौर पर वह सुबह लेखन में जुट जाते थे. पहले उन्होंने 2000 पेज लिखे और फिर कांट छांट के बाद इसे 590 पेजों में समेटा.

दोस्तों के बीच 'गैबो' के नाम से मशहूर इस लेखक के लिए यह समय मुश्किल और आर्थिक दुश्वारियों से भरा हुआ था. रात में यहां उनके कुछ दोस्त ज़रूर जमा होते थे और पत्रिकाओं व किताबों को लेकर तमाम चर्चाएं होती थीं.

इस किताब को लिखने से पहले मार्केज़ ने एड कॉपीराइटर और कुछ पत्रिकाओं में संपादक की नौकरी की थी. लेकिन बाद में ये उपन्यास लिखने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी.

महीनों तक नहीं दिया किराया

उनकी पत्नी मर्सीडीज पार्डो बार्चा को सान एंजेल इन के मांस विक्रेता, बेकर और सब्जी बेचने वालों से लगातार उधार लेना पड़ता था. घर में पति-पत्नी के अलावा दो बच्चों का भी जीवनयापन करना था.

ये कहानी इस घर के पड़ोस में रहने वाले कम ही लोगों को मालूम हो. बीबीसी ने जब एक गार्ड और दो पड़ोसियों से पूछा क्या उन्हें लेखक के परिवार के बारे में कुछ याद है, तो उन्होंने इससे इनकार किया. शायद उन्हें जानने वाले जो रहे भी होंगे वो या यहां रहे नहीं या फिर उनका निधन हो गया होगा.

19, ला लोमा मकान के मालिक लुई कौडियूरर मैक्सिको सिटी के मेयर ऑफिस में वरिष्ठ अधिकारी थे. जब मार्केज ने उपन्यास पर काम करना शुरू किया तो उन्होंने नौ महीने तक मकान का किराया भी नहीं दिया था.

मार्च 1966 में कौडियूरर ने फ़ोन कर किराए के बारे में पूछा, तब श्रीमती मार्केज़ ने फ़ोन उठाया. कुछ मिनट की बातचीत के बाद उन्होंने कहा कि छह महीने में वो लोग सारा पैसा चुका देंगे.

गार्सिया का घर

''एक्सक्यूज मी, मेम क्या आपको लगता है कि तब किराया और ज़्यादा नहीं बढ़ चुका होगा?", मकान मालिक ने पूछा, तब गार्सिया ने आवाज़ में कंपन लाए बगैर कहा, ''गैब्रियल एक किताब लिख रहे हैं, जैसे ही वह इसे पूरा कर लेंगे, तब यकीनन हम आपका पैसा चुकाने की स्थिति में होंगे.''

मकान मालिक कौडियूरर ने तब कहा, ''ओके, आपके शब्दों पर यकीन करके मैं आपको सात सितंबर तक का समय देता हूं.''

बदल गई ज़िंदगी

कुछ ही दिनों बाद मार्केज़ को अपने उपन्यास के लिए 500 डॉलर अग्रिम भुगतान मिला. इसके बाद गार्सिया ने समय से पहले ही घर का किराया अदा कर दिया.

इस उपन्यास के प्रकाशन के बाद 19, ला लोमा में ज़िंदगी बदल गई. 38 वर्ष की उम्र तक गार्सिया मार्केज़ की चार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी थीं. लातिनी अमरीका में सांस्कृतिक हलकों के दरवाजे उनके लिए खुल चुके थे. तब वह ऐसे लेखक में तब्दील हो गए, जिनकी पूजा होती थी.

जब उनकी ख्याति बढ़ने लगी तो सान एंजेल इन के उनके मकान में समृद्धि भी दिखने लगी. अब उन्होंने मैक्सिको की राजधानी के दक्षिण में कोयोकान में एक बड़ी संपत्ति खऱीदी.

अस्सी के दशक के आख़िर में मार्केज़ ला लोमा स्ट्रीट में मकान खरीदना चाहते थे, ख़ासकर अपना पुराना मकान, लेकिन प्रस्ताव अस्वीकार हो गया.

तब कौडयूरर ने कहा कि वह मकान नहीं बेच सकते, क्योंकि ये बहुमूल्य है यहीं पर ''वन हन्ड्रेड ईयर्स ऑफ़ सॉलिट्यूड'' उपन्यास लिखा गया.

पड़ोसी असहज

पहले इस मकान के सामने एक धातु की प्लेट सहसा आकृष्ट करती थी कि महान उपन्यास यहीं लिखा गया था. एक रात किसी ने इसे चुरा लिया तब से यहां कुछ नहीं लगा. ये मकान अब उनके पास है, जो इस बारे में जानते हैं लेकिन लेखक के बारे में कुछ नहीं. बीबीसी को मकान के अंदर आने से भी उन्होंने मना कर दिया.

यहां से कुछ दूर टेलेविसा सान एंजेल अध्ययन केंद्र है, जहां कुछ सबसे लोकप्रिय सोप आपेरा, संगीत और लाउरा बोजो अभिनीत विवादास्पद टीवी कार्यक्रम बनाए गए, जिन पर मैक्सिको के कुछ संगठनों ने देश में भेदभाव भड़काने के आरोप लगाए.

मैक्सिको सिटी के कुछ अलग इलाक़ों की तरह यहां भी पास-पडोस के इलाक़े सुरक्षा समस्याओं से गुज़र रहे हैं, इसी के चलते यहां सड़कों पर प्राइवेट गार्डों का पहरा है.

1965 में ये इलाक़ा राजधानी का उपनगर था लेकिन बाद के बरसों में सान एंजेल का फैलाव हुआ. पास-पडोस में पहाड़ियों और घाटियों तक पर तमाम कॉलोनियां बन गईं.

वहां शायद ही कोई जानता हो कि यहां नोबल पुरस्कार प्राप्त मार्केज़ के कालजयी उपन्यास का जन्म हुआ था. जो इस इलाक़े में रहते हैं, वो रोज़ाना अपराध और पानी की कमी जैसी समस्याओं से जूझते हैं.

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