यूक्रेन समस्या पर हुए समझौते पर ओबामा को संदेह

  • 18 अप्रैल 2014

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने यूक्रेन में जारी तनाव को कम करने के लिए जेनेवा में हुई बहु पक्षीय बैठक में हुए समझौते का सावधानीपूर्वक स्वागत किया है.

इस समझौते के बाद ओबामा ने कहा कि अगर हालात में सुधार नहीं हुआ तो अमरीका और उसके सहयोगी देश रूस पर नए प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार हैं.

जेनेवा में हुई बैठक में रूस, यूक्रेन, यूरोपीय संघ और अमरीका के विदेश मंत्री इस समस्या के समाधान के लिए सहमत हुए. समझौते के बाद ओबामा ने वॉशिंगटन में इस बात पर संदेह जताया कि रूस मोल-भाव से पीछे हट जाएगा.

उन्होंने कहा, ''मुझे उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में हम उसे इसका पालन करते हुए देखेंगे. लेकिन उसके पिछले प्रदर्शन को देखते हुए मुझे नहीं लगता कि उस पर हमें भरोसा करना चाहिए.''

उन्होंन कहा,'' हमें पूर्वी और दक्षिण यूक्रेन में रूस के हस्तक्षेप पर प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार रहना चाहिए.''

आशंका और उम्मीदें

जानकारों का कहना है कि यदि कोई समझौता हो जाता है तो रूस के ऊपर लगने वाले उन आर्थिक प्रतिबंधों पर रोक लग सकती है जिनकी पश्चिमी देश तैयारी कर रहे हैं.

वहीं ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के साथ टेलीफ़ोन पर हुई बातचीत में, दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि अगर रूस शांति बहाली में सहयोग नहीं करता है तो अमरीका और यूरोपिय संघ उस पर नए प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार हैं. रूस और यूक्रेन के कुछ प्रमुख राजनेताओं और व्यापारियों पर अमरीका और यूरोपिय संघ पहले से कुछ प्रतिबंध लगा रखे हैं.

जेनेवा में हुई बातचीत के बाद रूस के विदेश मंत्री सरगेई लावरोव, अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी और यूरोपीय संघ की विदेश नीति की प्रमुख कैथरीन एश्टन ने कहा कि इस बात पर समझौता हुआ है कि यूक्रेन में हर तरह की अवैध सैन्य जमावड़े को खत्म किया जाए.

इस बात पर भी समझौता हुआ कि जिन इमारतों पर इन अवैध सेनाओं ने कब्जा कर रखा है उन्हें तुरंत खाली कर दिया जाए.

प्रदर्शनकारियों को माफी

यूक्रेन की एक इमारत पर कब्ज़ा जमाए बंदूकधारी

इन लोगों का ये भी कहना था कि समझौते के तहत सभी सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों को माफ़ कर देना चाहिए.

यूरोप की सुरक्षा और सहयोग संगठन यानी ओएससीई नामक संस्था के निरीक्षक इन सभी बिंदुओं पर विचार करेंगे.

लावरोव का कहना था कि संकट का समाधान यूक्रेन के लोगों को खुद ही करना चाहिए और लंबे समय तक चलने वाले किसी संवैधानिक सुधार को यहां लागू किया जाना चाहिए.

यूक्रेन में तभी से राजनीतिक संकट जारी है जब से यहां रूस समर्थित राष्ट्रपति को सत्ता से हटना पड़ा है. इसके बाद रूस ने क्राइमिया प्रायद्वीप का अधिग्रहण कर लिया था जो कि यूक्रेन का हिस्सा था.

रूस की इस कार्रवाई के बाद रूस समर्थित अलगाववादियों ने पूर्वी यूक्रेन में सरकारी इमारतों पर कब्जा कर लिया और नए सरकारी आदेशों को मानने से इनकार कर दिया.

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