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जब एक राजनीतिक विज्ञापन ने खेल बदल दिया

 बुधवार, 16 अप्रैल, 2014 को 11:24 IST तक के समाचार
सोनिया गाँधी का विज्ञापन

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का "भारतीयता ख़तरे में" वाला वीडियो संदेश मतदाताओं पर क्या असर डालेगा, ये तो अगले महीने ही पता चलेगा, लेकिन दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र अमरीका में इस तरह के विज्ञापन कई बार कामयाब हो चुके हैं.

अमरीकी चुनावी इतिहास का सबसे कामयाब और विवादास्पद टीवी विज्ञापन भी एक डर की बुनियाद पर बना था और वो सिर्फ़ एक बार प्रसारित हुआ.

केनेडी की हत्या के बाद उप-राष्ट्रपति लिंडन बी जॉनसन ने एक साल के लिए उनकी कुर्सी संभाली थी और फिर 1964 में राष्ट्रपति चुनाव हुए जिनमें उनका मुकाबला था रिपब्लिकन पार्टी के बैरी गोल्डवाटर से.

टक्कर कांटे की थी लेकिन फिर आया जॉनसन का वो विवादास्पद विज्ञापन जिसने राजनीति शास्त्र के जानकारों के अनुसार सभी समीकरण बदल दिए और राष्ट्रपति की कुर्सी जॉनसन की झोली में डाल दी. पचास में से 44 अमरीकी राज्य जॉनसन के खाते में आए.

दी डेज़ी गर्ल

उस विज्ञापन का नाम पड़ा "दी डेज़ी गर्ल".

उसमें एक छोटी सी बच्ची एक डेज़ी का फूल लिए खड़ी है और फिर एक-एक कर उसकी पंखुड़ियों को तोड़ती है और साथ में गिनती है एक, दो, तीन...... जब वो नौ तक पहुंचती है तो एक भारी रौबदार आवाज़ में एक और उल्टी गिनती शुरू हो जाती है---दस, नौ, आठ, सात...और जब गिनती एक तक पहुंचती है तो कैमरा पूरी तरह से ज़ूम होकर बच्ची की आंखों की पुतलियों पर केंद्रित हो जाता है.

और फिर होता है एक बड़ा सा धमाका. आसमान में उठने वाले बादलों से साफ़ है कि वो एक परमाणु बम का धमाका है. और फिर पृष्ठभूमि से आती है लिंडन जॉनसन की आवाज़: "दांव पर यही है. एक ऐसी दुनिया जहां भगवान के बच्चे जी सकें या फिर अंधकार में मिल जाएं. हम या तो एक दूसरे से प्यार करें या फिर हम सब मौत को गले लगा लें."

लिंडन बी जॉनसन

लिंडन बी जॉनसन उतरे थे चुनावी मैदान में

जॉनसन के प्रतिद्वंदी बैरी गोल्डवाटर एक आक्रामक दक्षिणपंथी एजेंडा लेकर चुनाव में उतरे थे. वो एक आक्रामक सैन्य नीति के हक़ में थे और उनके बयानों से ये आभास निकला था कि अगर ज़रूरत आ पड़े तो परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किया जा सकता है. वो वियतनाम युद्ध के समर्थक थे और वहां भी परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का सुझाव दे चुके थे.

जॉनसन ने उन्हीं बयानों पर निशाना साधा और एक तरह से ये दिखाया कि गोल्डवाटर जान बूझकर परमाणु युद्ध शुरू करेंगे.

ये विज्ञापन सिर्फ़ एक बार चला और फिर जॉनसन कैंप ने एक सोची-समझी योजना के तहत उसे वापस ले लिया. एक डर का माहौल पैदा करने के लिए उनकी आलोचना भी हुई लेकिन विज्ञापन के बाद जो मीडिया में बहस हुई वो काफ़ी थी बैरी गोल्डवाटर का पत्ता काटने के लिए.

और फिर यहां नकारात्मक विज्ञापनों का दौर चल पड़ा.

'देर हो चुकी है'

रोनाल्ड रेगन, जिमी कार्टर, जार्ज एच डब्लयू बुश, बिल क्लिंटन ने तो इसका इस्तेमाल किया ही, अपने पहले चुनाव में "होप" या उम्मीद के मंत्र पर व्हाइट हाउस पर कब्ज़ा करने वाले बराक ओबामा ने भी अपने दूसरे चुनाव में मिट रॉमनी के ख़िलाफ़ जमकर जनता को डराने वाले नकारात्मक विज्ञापनों का इस्तेमाल किया.

डेनवर विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के प्रोफ़ेसर वेद नंदा लिंडन जॉनसन के चुनावी अभियान के दौरान येल विश्वविद्यालय के छात्र थे और उन्होंने उस पूरे मंज़र को देखा था.

नरेंद्र मोदी

उनका कहना है कि सोनिया गांधी का ये वीडियो विज्ञापन ऐसे वक्त पर आया जब चुनावी हवा काफ़ी हद तक मोदी के पक्ष में बन चुकी है.

प्रोफ़ेसर नंदा कहते हैं, "सोनिया खुद इस विज्ञापन में हैं तो शायद इसलिए थोड़ा असर हो सकता है. लेकिन मोदी जब से इस रेस में कूदे हैं तब से उन पर इस तरह के हमले हुए हैं और इसके बावजूद हवा उनके हक़ में बनती नज़र आई है. इसलिए भारतीय परिपेक्ष में देखें तो शायद अब थोड़ी देर हो चुकी है."

अमरीकन इंटरप्राइज़ इंस्टीट्यूट में भारत और दक्षिण एशियाई मामलों के विशेषज्ञ सदानंद धूमे का कहना है कि लिंडन जॉनसन के विज्ञापन में बहुत प्रभावशाली तस्वीरों का इस्तेमाल हुआ था, कांग्रेस के इस विज्ञापन में सिर्फ़ सोनिया गांधी का संदेश है जो बहुत असरकारी नहीं होता.

इसके अलावा उनका कहना है कि ये संदेश उसी तबके को संबोधित कर रहा है जो पहले से ही कांग्रेस की गांधी-नेहरू वाले भारत के नारे के साथ हैं.

उनका कहना है, "ज़रूरत इस बात की थी कि कांग्रेस उस तबके पर निशाना साधे जो मोदी के पीछे चल पड़ा है. और इसलिए ये संदेश टू लिटिल टू लेट यानी 'बहुत कम और बहुत देर से' की श्रेणी में आता है."

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