प्रवासियों से होने वाली कमाई में भारत अव्वल

  • 14 अप्रैल 2014
यूरो नोट्स

विश्व बैंक की एक ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि विदेश में काम करने वाले प्रवासी भारतीयों ने 2013 में भारत में 70 अरब डॉलर भेजे और इस दौरान दूसरे देशों से धनराशि पाने (रिमिटेंस) के लिहाज से भारत अव्वल रहा है.

विश्व बैंक ने उम्मीद जताई है कि विदेश में काम करने वाले प्रवासी कामगार 2014 के दौरान विकासशील देशों में 436 अरब डॉलर भेंजेंगे, ये रकम पिछले साल के मुकाबले करीब आठ प्रतिशत अधिक है.

हालांकि विश्व बैंक की ताजा 'प्रवासन और विकास सूचना' में कहा गया है कि इस दौरान प्रवासी कामगारों पर घर वापस का दबाव भी बना रहेगा और कइयों को घर वापस लौटना पड़ेगा.

बीते साल 2013 में यह रकम 404 अरब डॉलर थी. विश्व बैंक का अनुमान है कि 2016 तक यह रकम बढ़कर 516 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है.

अगर इन आंकडों के साथ उन देशों को भी जोड़ दिया जाए जो विकासशील देशों की स्थिती से उपर उठ गए हैं तो अनुमान के मुताबिक पूरे विश्व में इस साल 581 अरब डॉलर भिन्न देशों में भेजे जाएंगे, जो पिछले साल भेजे गए 542 अरब डॉलर से ज़्यादा है.

अनुमान है कि साल 2016 में प्रवासी लोगों द्वारा भेजी जाने वाली यह रकम 681 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है.

अर्थवयव्स्था के लिए महत्वपूर्ण

प्रवासी भारतीय कामगार

प्रवासी लोगों के जरिए विदेशों से भेजा गया पैसा कितनी महत्वपूर्ण है, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह धन देश में आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से न सिर्फ़ ज़्यादा है बल्कि सुरक्षित व स्थायी भी होता है.

नेपाल में प्रवासी लोगों द्वारा भेजा जाने वाला पैसा नेपाल की कुल कमाई का दोगुना है.

वहीं श्रीलंका में यह रकम उसकी कुल कमाई का 50 फीसदी है तो फिलीपींस में यह 38 फीसदी है.

विश्व बैंक के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और चीफ इकॉनॉमिस्ट कोशिक बासु कहते हैं, "प्रवासी लोगों के जरिए भेजा जाने वाला धन विकासशील देशों के लिए संतुलन बनाए रखने में बहुत मददगार हैं. इसके जरिए 70 अरब डॉलर की कमाई करने वाला भारत ऐसे देशों की गिनती में सबसे उपर है. इसके बाद चीन और फिलिपिंस का नाम लिया जा सकता है.

इसमें कोई शक नहीं की यह धन विकासशील देशों में ग़रीबी हटाने और खुशहाली बढ़ाने का काम करता है."

अगर भारत की बात करें तो साल 2013 में विदेशों से 70 अरब डॉलर भारत भेजा गया था, जो भारत को सॉफ्टवेयर सेवाएं से होने वाली 65 अरब डॉलर की कमाई से अधिक है.

यूगांडा जैसे देश में कॉफी के निर्यात से होनी वाली कमाई और विदेशों से भेजा जाने वाला पैसा दोनों मिलकर देश की कमाई को दोगुना बढ़ा देते हैं.

दुनिया के बहुत सारे देशों की अर्थव्यवस्था तो विदेशों से आने वाले इस पैसे से ही चल रही है.

इसबीच विरोध और दूसरे कारणों की वज़ह से प्रवासियों को मेहमान देशों से वापस अपने देश भेजने का सिलसिला भी जारी है. पिछले साल साउदी अरब ने नवंबर 2013 तक 3.7 लाख लोगों को उनके देश वापस भेजा था.

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