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पाकिस्तान में थाने पहुँची लड़की पर छोड़े कुत्ते

 रविवार, 6 अप्रैल, 2014 को 15:37 IST तक के समाचार
भारतीय मुसलमान

पाकिस्तान में वर्ल्ड टी-20 में पाकिस्तानी टीम के लचर प्रदर्शन और अफ़ग़ान राष्ट्रपति चुनावों की चर्चा है तो भारतीय उर्दू मीडिया का ध्यान पूरी तरह आम चुनावों पर ही केंद्रित दिखा.

दैनिक सहाफ़त का संपादकीय है - मुसलमान किसको वोट दें. अख़बार के मुताबिक़ आर्थिक और सामाजिक तौर पर मुसलमान जिस तरह दलितों से भी पीछे चले गए हैं, उसके लिए सिर्फ़ और सिर्फ़ कांग्रेस को ज़िम्मेदार ठहराया जाता है, लेकिन फिर भी उसे सांप्रदायिक पार्टी नहीं माना जाता.

अख़बार के मुताबिक़ एक बात ये भी कही जाती है कि बीजेपी मुसलमानों की खुली दुश्मन है तो कांग्रेस छिपी दुश्मन. दोनों पार्टियों की आर्थिक और विदेश नीति में भी अख़बार को कोई फ़र्क़ नज़र नहीं आता है.

ऐसे में ये सवाल उठना लाज़मी है कि मुसलमान किसे वोट दें और कैसे एकजुट हों. अख़बार के अनुसार मुसलमानों का एकजुट होना मुश्किल है और ये भी सच है कि उनकी कोई सामूहिक सोच नहीं है, इसलिए उन्हें चुनाव को लेकर ठंडे दिमाग से सोचना होगा. अख़बार के मुताबिक तीसरे मोर्च पर भी नज़र रखनी होगी.

सवाल जवाबदेही का

आम चुनावों के मद्देनज़र अपनी पार्टी और सीट बदलने वाले नेताओं पर हमारा समाज लिखता है कि ऐसा करने की ज़रूरत इन लोगों को क्यों महसूस हुई है? इसका तर्क क्या है? पिछली बार उन्होंने अपने मतदाताओं से कुछ वादे किए होंगे?

अख़बार कहता है कि अब अगर वो सीट और पार्टी बदल लेते हैं क्या पिछले मतदाताओं के प्रति उनकी जवाबदेही ख़त्म हो जाती है. और क्या नए चुनाव क्षेत्र में वो फिर इसी तरह के वादे नहीं करेंगे जिनसे डर कर वो पिछली वाली सीट छोड़ कर भागे हैं.

बाबरी मस्जिद

भारत में आम चुनावों से पहले बाबरी मस्जिद से जुड़ा एक स्टिंग चर्चा सामने आया है.

वहीं हिन्दोस्तान एक्सप्रेस ने कोबरापोस्ट वेबसाइट के उस स्टिंग ऑपरेशन पर संपादकीय लिखा है जिसके अनुसार बाबरी मस्जिद को सोची-समझी रणनीति के तहत ढहाया गया था.

अख़बार लिखता है कि इस स्टिंग ने कई चेहरों से नक़ाब हटा दिया है, हालांकि इससे तिलमिलाई बीजेपी कांग्रेस को इसके लिए ज़िम्मेदार बता रही है.

अख़बार के अनुसार चुनाव के वक़्त आए इस स्टिंग के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं.

बचकाना खेल

रुख़ पाकिस्तान का करें तो जंग ने अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई के इस बयान को बेबुनियाद बताया है कि अफ़ग़ान सरकार तो तालिबान से समझौता करना चाहती है लेकिन पाकिस्तान उसमें रोड़े अटका रहा है.

अख़बार के अनुसार करज़ई ने ये शिकायत अमरीकी विदेश मंत्री जॉन कैरी से टेलीफ़ोन बातचीत में कही और राष्ट्रपति चुनाव से पहले हिंसा में होने वाली वृद्धि का हवाला दिया.

जंग कहता है कि करज़ई को अपने देश के हालात से निपटने में अपनी नाकामी के कारण अपनी नीतियों में ही तलाशने चाहिए और वो दूसरों पर इसकी ज़िम्मेदारी न डालें.

"ये पहला मौक़ा है जब पाकिस्तानी टीम वर्ल्ड टी-20 कप के सेमी फ़ाइनल तक भी नहीं पहुंच पाई है. इससे पाकिस्तानी क्रिकेट प्रेमी बहुत मायूस हैं."

दुनिया, पाकिस्तानी अख़बार

रोज़नामा दुनिया ने वर्ल्ड टी-20 में पाकिस्तान के लचर प्रदर्शन पर लिखा है कि ये पहला मौक़ा है जब पाकिस्तानी टीम इस टूर्नामेंट के सेमी फ़ाइनल तक भी नहीं पहुंच पाई है. इससे पाकिस्तानी क्रिकेट प्रेमी बहुत मायूस हैं.

यही वजह है कि वेस्टइंडीज के हाथों शर्मनाक हार के बाद पाकिस्तानी टीम के टी-20 कप्तान मोहम्मद हफ़ीज़ ने कप्तानी छोड़ दी.

अख़बार कहता है कि अगर टीम जान लड़ाने के बावजूद हार जाती तो उसकी इतनी आलोचना न होती, लेकिन अफ़सोस तो इस बात का है कि अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में बेहद बचकाना खेल पेश किया गया.

दुल्हन की तलाश

नवाए वक़्त के संपादकीय में एक ऐसी घटना का ज़िक्र है जिसमें इंसाफ़ के लिए पुलिस थाने पहुँची एक लड़की पर कुत्ते छोड़ दिए गए.

रज़ा मुराद

पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक़ बेटे के लिए पाकिस्तानी दुल्हन तलाश रहे हैं रज़ा मुराद

मामला पंजाब प्रांत के सुखेकी इलाक़े का है, जहां थाने में पहुंची लड़की पर विरोधी पक्ष ने कुत्ते छोड़ दिए और पुलिस तमाशा देखती रही. इस घटना पर दुख जताते हुए अख़बार कहता है कि लड़की को न सिर्फ़ कई चोटें आईं, बल्कि वो वहीं बेहोश होकर गिर भी गई.

वहीं औसाफ़ के पहले पन्ने पर छपी एक तस्वीर में एक व्यक्ति को सलाखों के पीछे बैठे देखा जा सकता है और हवालात के बाहर उसके दो छोटे-छोटे बच्चे बैठे हैं.

इस व्यक्ति पर अपनी पत्नी के क़त्ल का आरोप है, लेकिन अख़बार का फोटो कैप्शन है कि हवालात के बाहर यतीमों की तरह बैठे इन बच्चों का क्या क़सूर है.

और आख़िर में दैनिक एक्सप्रेस की ख़बर है कि भारतीय अभिनेता रज़ा मुराद को बेटे लिए पाकिस्तान से दुल्हन की तलाश है.

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