बेनतीजा रही अमरीका और रूस की बातचीत

  • 31 मार्च 2014

यूक्रेन की समस्या के हल के लिए पेरिस में हुई अमरीका और रूस के बीच बातचीत बिना किसी नतीजे के ख़त्म हो गई है. चार घंटे तक चली इस बातचीत में दोनों ही पक्ष किसी कूटनीतिक नतीजे की तलाश करते रहे, लेकिन आखिरकार बातचीत बेनतीजा ही ख़त्म हो गई.

अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी का कहना था कि बातचीत काफी खुलकर हुई लेकिन दोनों ही पक्ष किसी कूटनीतिक हल के लिए कटिबद्ध थे. उनका कहना था कि कोई भी अंतिम निर्णय तभी लिया जा सकता है जबकि यूक्रेन के लोग खुद वार्ता प्रक्रिया में शामिल हों.

जॉन केरी ने कहा, "अमरीका हर कदम पर यूक्रेन से मशविरा कर रहा है. हम ऐसे किसी भी निर्णय को स्वीकार नहीं करेंगे जिसमें यूक्रेन के लोगों की सहमति न हो. हमारा स्पष्ट मानना है कि यूक्रेन के बारे में कोई भी फैसला बिना यूक्रेन के नहीं हो सकता. आज जब मैंने प्रधानमंत्री यात्सेन्युक से बात की तो मैंने जोर देकर कहा कि अमरीका का पूरी तरह से इस प्रक्रिया में यूक्रेन को समर्थन है."

जॉन केरी ने रूस से ये भी मांग की कि वो यूक्रेन की पूर्वी सीमा से अपनी सेनाओं को वापस बुला ले. उन्होंने कहा, "रूसी विदेश मंत्री लावरोव के साथ बातचीत में मैंने साफतौर पर कहा कि रूस की इस कार्रवाई को अमरीका अभी भी अवैध मानता है. वार्ता में कोई सार्थक प्रगति तभी हो सकती है जब कि बड़ी संख्या में यूक्रेन की सीमा पर डटी रूसी सेनाएं वहां से हट जाएं. हमारा मानना है कि ये सेनाएँ यूक्रेन में भय और आतंक का माहौल बना रही हैं."

संघीय राज्य

वहीं रूस के विदेश मंत्री सरगेई लावरोव ने ज़ोर देकर कहा कि यूक्रेन को एक संघीय राज्य बनने की जरूरत है. लावरोव का कहना था कि यूक्रेन को इसके लिए एक नया संविधान बनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि एक नया संविधान ही यूक्रेन के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा कर सकता है.

लावरोव का कहना था, "बातचीत का परिणाम यूक्रेन में एक नए संविधान के रूप में होना चाहिए जिसके तहत वहां एक संघीय ढांच बन सके. यूक्रेन में हम सबके लिए निश्चित तौर पर रूसी समुदाय का हित काफी महत्व रखता है, लेकिन चेक, हंगरी, जर्मन और दूसरे समुदायों के हित भी सुरक्षित होने चाहिए. यदि हमारे सहयोगी इसके लिए तैयार हैं तो हम हरसंभव सहयोग करेंगे."

यूक्रेन ने लावरोव के इस बयान को कड़े शब्दों में ख़ारिज किया है और कहा है कि ये यूक्रेन को बाँटने की कोशिश है.

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