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कौन हैं वो लोग जो समलैंगिक शादी का कर रहे विरोध

 बुधवार, 26 मार्च, 2014 को 21:00 IST तक के समाचार

समलैंगिक शादी संबंधी क़ानून के प्रभाव में आ जाने के बाद वो कौन से लोग हैं जो इसका विरोध कर रहे हैं और वो ऐसा क्यों कर रहे हैं.

कुछ लोग इस बात पर बहस करते हैं कि समलैंगिक शादी पर लोगों का ध्रुवीकरण हो गया है, इसके समर्थकों को सही सोच वाला बताया जाता है तो इसका विरोध करने वालों को अतार्किक और समलैंगिकता से घृणा करने वाला क़रार दिया जाता है.

क्लिक करें समलैंगिक शादी से संबंधित क़ानून को बहुत जल्दबाज़ी में पास किया गया और कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो यह सोचते हैं कि उन्हें इसको लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त करने का समय नहीं मिला.

धार्मिक शंका

वहाँ कुछ धार्मिक लोग भी हैं, जो क्लिक करें समलैंगिक शादी का इस डर से विरोध कर रहे हैं कि समानता का क़ानून किसी दिन समारोह का आयोजन करने के लिए चर्च, मस्जिद और मंदिर पर भी थोप दिया जाएगा.

"बहुत से समलैंगिक जोड़े नहीं चाहते कि उन पर शादी के लिए धार्मिक संस्थाएं थोपी जाएं, इससे यह तो साफ़ है कि ऐसे लोगों की संख्या बहुत कम है, जो यह चाहते हैं कि समानता को पूजा स्थलों पर थोपा जाए"

फ़ियोना ओ'रिले, कैथोलिक वायस

धार्मिक संस्थाओं को ऐसी स्थिति से बचाने के लिए एक तथाकथित 'चार स्तरीय नियम' बनाया गया है. यह क्लिक करें क़ानून यह सुनिश्चित करेगा कि धार्मिक संगठनों के ख़िलाफ़ कोई भेदभाव का आरोप न लगाया जाए. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनका इस 'चार स्तरीय नियम' पर विश्वास नहीं है.

'कैथोलिक वायस' की फ़ियोना ओ'रिले कहती हैं, ''यह कमज़ोर है. अंतत: यूरोपीय अदालतें ही हमारा फ़ैसला करती हैं, और वो चीज़ों को अलग ढंग से देख सकते हैं.''

वो कहती हैं, ''यूरोप में बहुत से समलैंगिक जोड़े नहीं चाहते कि उन पर शादी के लिए धार्मिक संस्थाएं थोपी जाएं. इससे यह तो साफ़ है कि एक अल्पसंख्यक वर्ग ऐसा है जो चाहता है कि समानता के क़ानून को पूजा स्थलों पर भी लागू किया जाए. इसलिए उन्होंने इसकी माँग भी शुरू कर दी है. ऐसे सुरक्षा उपाय कमज़ोर पड़ सकते हैं और और संभव है कि 10 साल बाद उनका कोई मतलब नहीं रह जाएगा.''

यहाँ शादी की पारंपरिक समझ को नए तरीके से परिभाषित करने का भी धार्मिक आधार पर विरोध होता है.

फ़ियोना ओ'रिले कहती हैं,'' सिविल साझेदारी क़ानून (क्लिक करें समलैंगिकों के साथ रहने को क़ानूनी मान्यता देने) को पास होता देख चर्च बहुत अधिक खुश था. लेकिन शादी एक बहुत ही अनोखा संबंध हैं, जिसमें एक पुरुष और एक महिला साझीदार होते हैं. वो बच्चे के रूप में एक नया जीवन रचने की क्षमता होती है. चर्च शादी की अपनी परिभाषा को दूसरों पर थोपने के बारे में नहीं सोच रहा है. लेकिन वह चाहता है कि शादी की परिभाषा की रक्षा की जानी चाहिए.''

ऐतिहासिक अर्थ का मामला

लेकिन शादी की परिभाषा को लेकर केवल धार्मिक आपत्तियां नहीं हैं. दार्शनिक ब्रेंडा अलमांड मानते हैं कि शादी का पारंपरिक और ऐतिहासिक लक्ष्य प्रजनन है. वे कहते हैं, '' समलैंगिक संबंध विषमलिंगी संबंधों से इतने अलग हैं कि इस अंतर को क़ानून के ज़रिए नहीं मिटाया जा सकता.''

नॉटिंघम विश्वविद्यालय में औद्योगिक अर्थशास्त्र पढ़ाने वाले और पारंपरिक शादी को समाज के लिए फ़ायदेमंद बताने वाले समूह कोलिशन फॉर मैरिज़ के समर्थक प्रोफ़ेसर डेविड पैटन कहते हैं, ''शादी के मामले से राज्य के जुड़े होने का प्रमुख कारण बच्चे हैं.''

वो यह मानते हैं कि सभी शादियों का परिणाम बच्चे नहीं होंगे. वो कहते हैं कि पेंशन और विरासत से संबंधित क़ानूनों में सरकार को इन वैकल्पिक संबंधों की भी अलग तरीके से पहचान करनी होगी.

वो कहते हैं, लेकिन क्लिक करें समलैंगिक शादी का क़ानून इसके बारे में नहीं है. बल्कि यह शादी की सभी परिभाषाओं को बदलने और विपरीत संबंधों को सहज रूप से शामिल करने के लिए है. यह दोनों ग़ैर-ज़रूरी है और इससे प्राकृतिक रूप से माता-पिता के बच्चा पैदा करने को प्रोत्साहन देने के क़ानूनी ढांचे के कमज़ोर होने का ख़तरा है.''

सभी समलैंगिक समर्थक नहीं

"हर समलैंगिक व्यक्ति समलैंगिक शादी के समर्थन में नहीं है. कुछ इसके विरोध में भी है. मैं एक रूढ़ीवादी और समलैंगिक हूँ और मैं समलैंगिक शादी का विरोध करता हूं"

एंड्रूय पियर्स

डेली मेल के क्लिक करें एंड्रयू पियर्स ने 2012 में लिखा था, ''हर समलैंगिक व्यक्ति क्लिक करें समलैंगिक शादी के समर्थन में नहीं है. कुछ इसके विरोध में भी है. मैं एक रूढ़ीवादी और समलैंगिक हूँ और मैं समलैंगिक शादी का विरोध करता हूं.'' उन्होंने लिखा था, ''क्या मैं कट्टर हूँ.''

क्लिक करें इतिसाहकार डेविड स्टार्कि ने 2012 में डेली टेलीग्राफ में लिखा था कि वो इससे सहमत नहीं हैं. उन्होंने कहा था, ''मैं व्यथित हूँ. एक नास्तिक समलैंगिक के रूप में शादी का सम्मान करता हूं, जो कि विषमलिंगी समाज का एक हिस्सा है. लेकिन उसे कभी पूरी तरह साझा नहीं कर सकते हैं. मैं यह कहनाचाहता हूँ कि आपके दोनों घरों में एक दुखदायक वस्तु है.''

क्लिक करें अभिनेता रूपर्ट एवरेट इसके ख़िलाफ़ सबसे रंगीन दलील देते हैं. गार्डियन अख़बार को 2012 में दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था, ''दो विपरीत लिंग के लोगों की शादी से मैं घृणा करता हूं. शादी का केक, पार्टी और शैंपेन दो साल बाद तलाक को आमंत्रित करते हैं. यह विपरीत लिंग के लोगों की दुनिया में समय की बर्बादी है. और समलैंगिकों की दुनिया में मैं ख़ुद इसे दुखद पाता हूँ और हम इस संस्था की नकल करना चाहते हैं, जो कि निस्संदेह एक त्रासदी है.''

शब्दावली बदल रही है

यहां कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो यह दलील देते हैं कि शादी और सिविल साझेदारी में केवल भाषायी अंतर है.

पियर्स ने पिछले साल कहा था, ''हमने शादी की है. इसे एक सिविल साझेदारी कहा जाता है. मैं इस बात से ख़ुश होता हूं कि मेरे जैसे लोग, जो कि विषमलिंगी लोगों से अलग है, कुछ ऐसा कर सकते हैं, जो वो नहीं कर सकते हैं. मैं इसे कर चुका हूं.''

वहीं कुछ अन्य लोगों को कहना है कि सिविल साझेदारी और शादी के बचे हुए अंतर को मौजूदा क़ानून के ज़रिए ख़त्म कर देना चाहिए.

हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स के क्लिक करें लार्ड बिशप ने 2013 में कहा था, ''समाज बहुत से लोगों को क़ानूनी और संस्थागत अभिव्यक्ति का अधिकार देता है, समलैंगिक और लैस्बियन के पास भी अपनी प्रतिबद्धताओं को औपचारिक रूप देने और सामाजिक और क़ानूनी फ़ायदे, जो कि विपरीत लिंग के जोड़ों के पास है, उसका लाभ उठाने के लिए लिए इस तरह के अधिकार होने चाहिए.''

साल 2006 से सिविल पार्टनरशिप या सिविल साझेदारी में रह रहे लेबर पार्टी के सांसद बेन ब्राडशॉ कहते हैं, ''क़ानून के नज़र में यह वस्तुत: सिविल पार्टनरशिप से अलग नहीं है.'' लेकिन ब्राडशॉ कहते हैं कि वो समलैंगिक शादी के समर्थन में हैं, क्योंकि यह प्रतीकात्मक और पूरी समानता की दिशा में एक ज़रूरी क़दम होगा.

क़ानून का सवाल

"मेरी समस्या यह थी और आज भी है, वह यह कि सरकार इस पर बहुत अधिक विचार नहीं किया और प्रक्रिया का पालन नहीं किया, उन्हें इसे संवेदनशीलता के साथ करना चाहिए था.'' इसे अनुचित जल्दबाजी में संसद के ज़रिए आगे बढ़ाया गया"

लार्ड डीयर, पूर्व चीफ़ कांस्टेबल, हाउस ऑफ़ लार्ड

कुछ लोगों के लिए मुख्य मुद्दा क़ानून पारित करने का तौर-तरीका ही है. इस विधेयक पर जब हाउस ऑफ लार्ड्स में बहस हुई थी तो पूर्व चीफ़ कांस्टैबल लार्ड डीयर ने इसे रोकने का प्रयास करते हुए एक संसोधन रखा था. उन्होंने कहा था, ''मुझे समलैंगिक शादियों या पार्टनरशिप से कोई समस्या नहीं है.''

वो कहते हैं, ''मेरी समस्या यह थी और आज भी है, वह यह कि सरकार इस पर बहुत अधिक विचार नहीं किया और प्रक्रिया का पालन नहीं किया, उन्हें इस पर संवेदनशीलता के साथ करना चाहिए था.'' इसे अनुचित जल्दबाजी में संसद के ज़रिए आगे बढ़ाया गया.

विद्वता का प्रदर्शन करने वाले हेडमास्टर की तरह डीयर कहते हैं, ''मैं जो कह रहा हूँ वह यह कि इसे अलग ले जाएं, इस पर दुबारा काम करें और फिर इसे लेकर आएं.''

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