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क्राईमिया इतना ख़तरनाक क्यों है?

 मंगलवार, 4 मार्च, 2014 को 13:02 IST तक के समाचार
यूक्रेन, क्रीमीया

यूक्रेन की राजधानी कीएफ़ में पश्चिम समर्थक यूक्रेनी लोगों के राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच को सत्ता से बेदख़ल करने के बाद अब पूरा ध्यान दक्षिणी क्षेत्र क्रीमीया पर आ गया है. इस क्षेत्र में रूस ने अपने सैन्य बल तैनात किए हैं, जिसके जवाब में यूक्रेन ने अपने रिज़र्व सैन्य बलों को बुला लिया है और ये विवाद एक अंतर्राष्ट्रीय संकट में बदल गया है.

क्राईमिया विवाद की वजह क्यों बना हुआ है?

क्राईमिया रूस समर्थक भावनाओं का केंद्र बना हुआ है, इसका अंत अलगाव में भी हो सकता है.

यूक्रेन के काले सागर के नज़दीक इस प्रायद्वीप में 23 लाख लोग रहते हैं, इनमें से ज़्यादातर ख़ुद को रूसी मूल का मानते हैं और रूसी भाषा बोलते हैं.

साल 2010 के राष्ट्रपति चुनाव में इस क्षेत्र ने विक्टर यानुकोविच के लिए भारी मतदान किया था. यहां कई लोग मानते हैं कि उनका तख़्तापलट किया गया. इसके बाद क्राईमिया की संसद में अलगाववादियों ने यूक्रेन से अलग होने के लिए मतदान कराने पर भी ज़ोर दिया.

क्या क्राईमिया वाक़ई यूक्रेनी है?

साल 1783 में अपने क्षेत्र में मिला लेने के बाद से बीते 200 सालों से क्राईमिया में रूस ही प्रभावशाली ताक़त है. लेकिन साल 1954 में रूस ने इसे यूक्रेन को दे दिया था, तब यूक्रेन भी सोवियत संघ का हिस्सा था. रूसी मूल के कई लोग इसे ऐतिहासिक ग़लती के तौर पर देखते हैं.

यूक्रेन, क्रीमीया

एक अन्य महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक समूह, क्राईमियाई तातार मुसलमान, इस ओर ध्यान दिलाते हैं कि कभी यूक्रेन में वो बहुसंख्यक थे और सोवियत नेता जोसेफ़ स्तालिन ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान नाज़ियों से कथित सहयोग की वजह से साल 1944 में उन्हें बड़ी संख्या में निर्वासित कर दिया था.

साल 2001 की जनगणना के मुताबिक़ यूक्रेन मूल के लोग कुल जनसंख्या के क़रीब 24% हैं, रूसी मूल के लोग 58% हैं और क़रीब 12% तातार हैं.

साल 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद से तातार क्राईमिया वापस आ रहे हैं जिसकी वजह से उनमें और रूसी मूल के लोगों में ज़मीन के हक़ को लेकर तनाव होता रहा है.

क्रीमीया का क़ानूनी दर्जा क्या है?

क़ानूनी रूप से क्राईमिया यूक्रेन का हिस्सा है - क्राईमिया के इस दर्जे को रूस ने भी मान्यता दी थी - रूस ने साल 1994 में एक समझौते पर दस्तख़त किए थे और यूक्रेन की क्षेत्रीय संप्रुभता को बनाए रखने का वचन दिया था. इस समझौते पर अमरीका, ब्रिटेन और फ़्रांस ने भी दस्तख़त किए थे.

क्राईमिया यूक्रेन में एक स्वायत्त गणराज्य है, इसकी अपनी संसद है. लेकिन साल 1995 में एक रूस समर्थक क्राईमियाई के भारी बहुमत से जीतने के कुछ समय बाद क्राईमिया के राष्ट्रपति का पद ख़त्म कर दिया गया था.

तभी से यूक्रेन की सरकार ही क्षेत्रीय संसद की सलाह से क्राईमिया के प्रधानमंत्री की नियुक्ति करती रही है. लेकिन गुरुवार को क्राईमिया के सांसदों ने रूस समर्थक एक अनाधिकृत नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया.

शनिवार को उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से शांति बहाल करने के लिए मदद मांगी थी.

रूस क्या कर रहा है?

रूस, सेना, यूक्रेन

क्राईमिया के सेवास्टापोल में रूस का एक बड़ा नौसैनिक अड्डा है, जहां रूस का ब्लैक सी फ़्लीट भी है. लीज़ की शर्तों के मुताबिक़ रूस की सेना अगर इस नौसैनिक अड्डे से बाहर निकलती है तो उसे इसके लिए यूक्रेन की सरकार से इजाज़त लेनी होगी.

लेकिन रूस ने अतिरिक्त सैन्य बल भेजकर और अपनी सैन्य ताक़त का इस्तेमाल कर क्राईमिया पर नियंत्रण कर लिया, उसने अपने बचाव में कहा है कि वो इस क्षेत्र के रूसी मूल के लोगों की सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार है.

इस तरह की ख़बरें भी हैं कि रूसी राजदूत क्राईमिया में रूसी पासपोर्ट बांट रहे हैं. रूस के रक्षा क़ानून "रूस के नागरिकों की रक्षा" के लिए सैन्य कार्रवाई की इजाज़त देते हैं.

क्या युद्ध छिड़ सकता है?

व्लादिमीर पुतिन न सिर्फ़ क्राईमिया बल्कि पूरे यूक्रेन में सैन्य बल तैनात करने के लिए संसद से मंज़ूरी ले चुके हैं. रूस कीएफ़ की नई सरकार को फ़ासीवादी मानता है और पूर्वी यूक्रेन में रूसी बोलने वालों की "रक्षा" के लिए सैन्य बल भेज सकता है.

रक्तपात से इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि ऐसा हुआ तो पश्चिमी यूक्रेन के राष्ट्रवादी इससे नाराज़ होंगे. इसके अंतरराष्ट्रीय परिणाम भी हो सकते हैं. पश्चिमी ताक़तें क्राईमिया को क़ब्ज़े में लेने की निंदा कर चुकी हैं.

न्यूयॉर्क में रूस के ख़िलाफ़ प्रदर्शन

इसकी संभावना कम है कि नेटो सैन्य कार्रवाई करेगा लेकिन इसके मध्य यूरोपीय सदस्य देश पोलैंड-यूक्रेन सीमा पर सेना की तैनाती के लिए दबाव डाल सकते हैं. पश्चिमी देश प्रतिबंध भी लगा सकते हैं लेकिन राष्ट्रपति पुतिन को ये लग सकता है कि ऐसे प्रतिबंध ज़्यादा वक़्त तक टिकेंगे नहीं, जैसा कि जॉर्जिया युद्ध के वक़्त हुआ था.

जॉर्जिया में क्या हुआ था?

साल 2008 में रूस ने दक्षिण ओसेतिया में सेना भेजी थी. रूस का कहना था कि वहां के रूसी बोलने वालों को सुरक्षा की ज़रूरत है. जॉर्जिया के सैन्य बलों को तबाह कर दिया गया. नेटो ने हस्तक्षेप न करने का फ़ैसला किया.

लेकिन क्राईमिया दक्षिण ओसेतिया से ज़्यादा बड़ा है, यूक्रेन भी जॉर्जिया से बड़ा है और क्राईमिया की जनसंख्या दक्षिण ओसेतिया के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा विभाजित है. दोनों ही ओर दांव बहुत ऊंचे हैं.

रूस को यूक्रेन का यूरोपीय संघ और नेटो के साथ पींगें बढ़ाना पसंद नहीं है. ये रूस के लिए सिर्फ़ भू-रणनीतिक लड़ाई ही नहीं है. राष्ट्रपति पुतिन उस ज़मीन को बचाने की कोशिश कर रहे हैं जिसे वो ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से रूस से जुड़ा हुआ मानते हैं.

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