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पाकिस्तान: धर्मांतरण के अल्टीमेटम पर सुप्रीम कोर्ट सख़्त

 रविवार, 23 फ़रवरी, 2014 को 07:45 IST तक के समाचार
राजीव गांधी

पाकिस्तान के उर्दू अख़बारों में जहां तालिबान और सरकार की बातचीत में गतिरोध, पाकिस्तान को ईरान की धमकी और कुछ गैर मुसलमानों को धर्म परिवर्तन करने का चरमपंथियों का अल्टीमेटम सुर्खियों में रहा, वहीं भारत में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के दोषियों से जुड़ा मामला उर्दू मीडिया में लगातार चर्चा में है

क्लिक करें राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों को लेकर पिछले दिनों जिस तरह राजनीति गरमाई, उस पर राष्ट्रीय सहारा ने संपादकीय लिखा- फांसी के गले में सियासत का फंदा.

अख़बार के अनुसार अब इस देश में सज़ा और रिहाई इस बात से तय नहीं होते हैं कि आपने अपराध किस तरह का किया है, बल्कि अब सज़ा और रिहाई का पैमाना ये है कि किस को फांसी चढ़ा कर ज्यादा वोट हासिल किए जा सकते हैं और किसकी रिहाई से ज्यादा सियासी फ़ायदा उठाया जा सकता है.

अख़बार के अनुसार संसद पर हमले के दोषी अफ़ज़ल गुरु को चरमपंथियों से सहयोग करने के लिए फांसी दे दी गई जबकि पूर्व प्रधानमंत्री के हत्यारों की रिहाई की बात हो रही है.

हमदर्दी या ज़्यादती

सुप्रीम कोर्ट की तरफ़ से मुसलमानों को बच्चा गोद लेने का अधिकार दिए जाने पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की आपत्ति को हिंदोस्तान एक्सप्रेस ने अपने संपादकीय में जगह दी है.

अख़बार के अनुसार इस फ़ैसले न सिर्फ शरियत में हस्तक्षेप बताया गया है कि बल्कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ़ से इस फैसले को प्रभावहीन बनाने के लिए कदम उठाने की बात भी कही गई है.

हमारा समाज का संपादकीय है – तिब्बती लोगों की नागरिकता. अख़बार ने चुनाव आयोग के उस निर्देश का हवाला दिया है जिसके अनुसार 26 जनवरी 1950 से एक जुलाई 1987 के बीच भारत में पैदा होने वाले तिब्बतियों के नाम मतदाता सूची में शामिल करने को कहा गया है.

अख़बार लिखता है कि क्लिक करें भारत में तिब्बती लोगों को स्थानीय नागरिकों जैसे सुविधाए दिए जाने पर चीन की ख़ामोशी का गूढ़ अर्थ है. इसका ये मतलब भी निकाला जा सकता है कि अगर तिब्बतियों को भारत की नागरिकता मिलती है कि उनकी आज़ादी की मांग ख़ुद ब ख़ुद ख़त्म हो जाएगी.

अख़बार के अनुसार ऐसे में भारत इन तिब्बतियों के साथ इंसाफ़ नहीं बल्कि ज़्यादती कर रहा है, दूसरा इससे भारत की अपनी परेशानियां भी बढ़ सकती है.

ख़ून की होली बंद करो

नवाज़ शरीफ

नवाज़ शरीफ सरकार पर बातचीत ख़त्म करने के लिए लगातार दबाव बढ़ रहा है

रूख़ पाकिस्तान का करें तो शांति वार्ता में आए गतिरोध पर जंग ने लिखा है कि पांच महीने पहले जब सरकार ने तालिबान के साथ बातचीत की कोशिश शुरू की तब से तालिबान की कार्रवाइयों में 460 लोग मारे जा चुके हैं जिनमें 308 आम नागरिक, 114 सैनिक और 38 पुलिस वाले शामिल हैं.

ऐसे में शांति वार्ता लगातार गतिरोध का शिकार है और नवाज़ शरीफ़ सरकार पर बातचीत ख़त्म करने के लिए लगातार दबाव बढ़ रहा है.

वहीं नवाए वक़्त में पाकिस्तानी गृह मंत्री निसार अली ख़ान का ये बयान है कि शांति वार्ता के लिए गली-कूचे में ख़ून की होली बंद करनी होगी.

जबकि प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ का कहना है कि अब बातचीत को आगे बढ़ाना उन लोगों के साथ नाइंसाफ़ी होगी जिनके परिजन अर्धसैनिक बल के उन 23 जवानों में शामिल थे जिनके सिर तालिबान ने कलम कर दिए.

दैनिक ख़बरें के अनुसार चरमपंथी ठिकानों पर हवाई कार्रवाई पर तालिबान ने कहा है कि बमबारी से हमारे इरादे कमज़ोर नहीं होंगे, और इसका जवाब जरूर देंगे.

नाकाम विदेश नीति

दैनिक वक़्त ने पाकिस्तानी गृह मंत्री से अमरीकी राजदूत की मुलाक़ात पर एक कार्टून के जरिए तंज़ किया है. इसमें पाकिस्तानी गृह मंत्री को अमरीकी राजदूत की जेब में बैठे ये कहते हुए दिखाया गया है अमरीका के साथ रिश्ते और मजबूत करना चाहते हैं.

हाल ही में ईरान की तरफ़ से पाकिस्तान को दी गई धमकी पर दैनिक इंसाफ़ ने लिखा है- ईरान से ये उम्मीद नहीं थी. ईरान ने कहा था कि अगर अगवा किए गए ईरानी सैनिक रिहा नहीं हुए तो वो कार्रवाई के लिए अपनी सेना पाकिस्तान भेजेगा.

अख़बार कहता है कि पाकिस्तान की नाकाम विदेश नीति का इससे बड़ा सबूत क्या होगा कि अमरीका, भारत और इस्राइल के बाद अब भाई जैसा पड़ोसी मुस्लिम देश ईरान भी धमकियां दे रहा है.

धर्मांतरण का अल्टीमेटम

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट

पाकिस्तान की अदालत ने कहा है कि किसी भी गैर मुसलमान पर जबरदस्ती धर्म बदलने के लिए दबाव डालना न तो धार्मिक नजरिए से सही है और न ही कानून नजरिए से

दैनिक खबरें में क्लिक करें सुप्रीम कोर्ट की उस सख़्त टिप्पणी को संपादकीय का विषय बनाया है जिसमें कैलाश और चितराल के अल्पसंख्यकों को इस्लाम स्वीकार करने के लिए दिए गए अल्टीमेटम का संज्ञान लिया गया है.

सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस तस्सदुक हुसैन गिलानी ने कहा कि चरमपंथी चाहते हैं कि लोग उनकी पसंद का धर्म कबूल करें, ये रवैया कबूल नहीं किया जा सकता है.

अख़बार के अनुसार चरमपंथियों ने कैलाश और इस्माइल समुदायों को अपना धर्म बदलने का अल्टीमेटम दिया और ऐसा न करने पर उन्हें मरने के लिए तैयार रहने की धमकी दी है.

पाकिस्तान में बढ़ते चरमपंथी असर के बारे में अख़बार के संपादकीय में कहा गया है कि इससे पहले कराची में हिंदू महिलाओं के धर्मांतरण और उनसे जबरन शादी करने की ख़बरें मीडिया में आ चुकी हैं.

चीफ जस्टिस ने कहा कि किसी भी ग़ैर-मुसलमान पर ज़बरदस्ती धर्म बदलने के लिए दबाव डालना न तो धार्मिक नज़रिए से सही है और न ही क़ानूनी नज़रिए से.

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