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ग्वांतानामो की जेल के क़ैदियों का क्या होगा?

 बुधवार, 26 फ़रवरी, 2014 को 00:09 IST तक के समाचार
ग्वांतानामो जेल

अब्दुल मलिक अहमद अब्दुल वहाब अल-रहाबी ग्वांतानामो जेल के एक क़ैदी हैं और दूसरे क़ैदियों की तरह अपनी क़िस्मत के फ़ैसले का इंतज़ार कर रहे हैं.

जनवरी की 28 तारीख़ को अल-रहाबी मामले की सुनवाई कर रहे एक बोर्ड के सामने हाज़िर हुए थे. ओबामा प्रशासन की ओर से इस सुनवाई को पहली बार पत्रकारों को देखने की इजाज़त दी गई थी. ऐसी और सुनवाईयां होनी हैं. हिरासत में रखे गए क़ैदियों को इस क़दम से उम्मीद की किरण दिखाई दी है. अल-रहाबी और उनके जैसे क़ैदियों को खुले दिल से अपनी बात कहने की इजाज़त दी जाएगी.

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सफ़ाई का मौक़ा मिलने पर अल-रहाबी को कहना होगा कि उन्हें क्यों रिहा कर दिया जाना चाहिए. इस बात की भी याद दिलाई गई है कि कुछ लोगों की रिहाई को मंज़ूरी दे दी गई है लेकिन वे फिर भी इसी जेल में बंद हैं. ग्वांतानामो में ऐसे लोग भी हैं जिन पर अभियोजन चलाया जाना है लेकिन शायद ही कभी ऐसा किया जाए. उनकी क़िस्मत बदलने के आसार कम ही हैं.

सालों पहले अमरीकी अधिकारियों ने कहा था कि अल-रहाबी ओसामा बिन लादेन के बॉडीगार्ड थे. अल-रहाबी 'पीरियोडिक रिव्यू बोर्ड' या क़ैदियों के मामलों की समीक्षा करने वाले बोर्ड के सामने हाज़िर हुए और ये सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के ज़रिए की गई थी.

अस्थिर यमन

रामज़ी बिनालशिभ

एफ़बीआई ने रामज़ी बिनालशिभ की तस्वीर 2002 में जारी की थी. अब वे ग्वांतानामो में हैं.

ग्वांतानामो जेल की शुरुआत जनवरी 2002 में की गई थी और एक वक़्त ऐसा भी आया जब यहाँ 750 क़ैदी हिरासत में रखे गए. फ़िलहाल यहाँ 155 लोग बंद हैं. राष्ट्रपति बराक ओबामा ने वादा किया है कि वे इस जेल को बंद कर देंगे. 'पीरियोडिक रिव्यू बोर्ड' का गठन भी इसी इरादे से किया गया था कि वे मामलों को निपटाने की प्रक्रिया में तेज़ी लाएंगे. पहली सुनवाई पतझड़ के मौसम में हुई थी.

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महमूद अल-अज़ीज अब्द अल-मुजाहिद की उम्र 36 साल है. उन पर अल-क़ायदा के लिए काम करने का आरोप है. बोर्ड के सामने सुनवाई के लिए हाज़िर होने के बाद उन्हें किसी और जेल में भेजने की सिफ़ारिश की गई थी. लेकिन वे अभी भी वहीं हैं. हालांकि इसकी वजह ये मानी गई कि यमन अपनी राजनीतिक अस्थिरता की वजह से अल-मुजाहिद की घर वापसी के लिए तैयार नहीं है.

अल-मुजाहिद को किसी और मुल्क ने भी पनाह देने की पेशकश नहीं की. फ़ोर्डहम यूनिवर्सिटी की मार्था रायनर कहती हैं कि फ़िलहाल ग्वांतानामो की जेल में 77 ऐसे क़ैदी हैं जिन्हें किसी और जेल में भेजने की सिफ़ारिश की गई है. इसमें मुजाहिद भी एक है और इनमें से ज़्यादातर यमन के हैं. सउदी अरब समेत अन्य देशों के 45 नागरिक अलग अलग श्रेणियों में रखे गए हैं.

सघन पूछताछ

ग्वांतानामो जेल का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी

सेटन हॉल में क़ानून के प्रोफ़ेसर मार्क डेनबॉक्स इसे कुछ यूँ समझाते हैं, "ये एक तरह से अनिश्चितकालीन हिरासत की तरह है." ग्वांतानामो के क़ैदियों में से एक ख़ालिद शेख मोहम्मद हैं. उन पर सितम्बर 11 की साज़िश रचने का आरोप है. इसी श्रेणी में कुछ ऐसे भी क़ैदी हैं जिन पर बेहद गंभीर आरोप हैं. उन पर सेना के ट्रिब्यूनल में युद्ध अपराधों के लिए मुक़दमा चलाया जाना है.

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फाइनेंशियल टाइम्स अख़बार ने अमरीकी सेना के अधिकारी ब्रिगेडियर जनरल और मुख्य अभियोजक मार्क मार्टिंस के हवाले से बताया है, "ये कमीशन धीरे धीरे ही सही लेकिन सुचारू रूप से काम कर रहा है." बाक़ी लोगों पर मुक़दमा चलाए जाने की कम ही संभावना है. साल 2002 में अधिकारियों ने ये दावा किया था कि इनमें से एक अबू ज़ुबैदा अल-क़ायदा के नेटवर्क का एक प्रमुख हिस्सा है.

सीआईए के पूर्व वकील जॉन रिज़्ज़़ो बताते हैं कि अबू को सीआईए के गुप्त ठिकानों पर रखा गया था और उससे सघन पूछताछ की गई थी. अब वह बाक़ी दुनिया से कटा हुआ 'कैम्प सेवन' में कैदी नंबर 10016 है. अब वहाँ वकीलों को भी जाने की इजाज़त नहीं है. उसे जंजीरों से बांधकर 20 फ़ीटी गुना 10 फ़ीट के एक लकड़ी के बक्से में यहाँ लाया गया है.

अबू पर किसी अपराध के लिए कभी कोई मुक़दमा नहीं चलाया गया है. उसके वकील जोसेफ़ मार्ग्वेलिज़ कहते हैं, "उस पर कभी कोई मुक़दमा चलाया जाएगा भी नहीं. सालों पहले अधिकारियों ने उसे ग़लत समझा था और वे उसे लगातार गहन पूछताछ कर रहे हैं. हिरासत में रखे गए क़ैदी मुश्किल हालात में है. उन्हें बाघ की पूछ पकड़कर उसे बांध लिया है लेकिन उन्हें पता नहीं है कि आगे क्या करना है."

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