इराक़: विदेशी चरमपंथियों को मारने पर इनाम

  • 22 फरवरी 2014
रमादी में एक सरकारी दफ़्तर की तलाशी लेते चरमपंथी

इराक़ सरकार ने अलक़ायदा और आईएसआईएस के नाम से मशहूर संगठन 'इस्लामिक स्टेट इन इराक़ एंड दी लीवेंट' से जुड़े किसी विदेशी चरमपंथी के मारे जाने पर पुरस्कार देने की घोषणा की है.

यह पुरस्कार 17,200 डॉलर यानी क़रीब 11 लाख रुपये का होगा.

इसके अलावा इन दोनों संगठनों से जुड़े किसी चरमपंथी को ज़िंदा पकड़ने पर 25,800 डॉलर या 16 लाख रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा भी की गई है.

सांप्रदायिक हिंसा

इन पुरस्कारों की घोषणा इराक़ सरकार के रक्षा मंत्रालय की बेवसाइट पर की गई है.

पिछले साल देश में हुई सांप्रदायिक हिंसा के लिए अधिकारी अल क़ायदा और आईएसआईएस को ही ज़िम्मेदार ठहराते हैं.

इराक़ के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ जनवरी, 2013 में एक हज़ार से अधिक लोगों की मौत हुई थी.

दिसंबर के अंत तक आईएसआईएस और उसके सहयोगी संगठनों ने फ़जूला और रमादी शहरों के कुछ हिस्से पर नियंत्रण हासिल कर लिया था. ये दोनों शहर पश्चिमी प्रांत अनबर के सुन्नीबहुल इलाक़े हैं.

सरकार समर्थक आदिवासियों की मदद से सुरक्षा बलों ने रमादी के कुछ हिस्सों पर नियंत्रण वापस पाने में सफलता पाई है. हालांकि इन लोगों ने फ़जूला में कोई कार्रवाई नहीं शुरू की है. इसकी जगह स्थानीय लोगों से कहा जा रहा हैं कि वो चरमपंथियों को चले जाने के लिए कहें.

संयुक्त राष्ट्र ने पिछले हफ़्ते कहा था कि अनबर में लड़ाई की वजह से तीन लाख लोग विस्थापित हुए हैं.

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