क्रूर तानाशाह या क़िस्सागोई के सुपरस्टार

  • 26 फरवरी 2014
उत्तर कोरिया के तानाशाहों ने लिखी कहानी

उत्तर कोरिया के नेताओं को आमतौर पर काफ़ी क्रूर और रहस्यमय तानाशाह माना जाता है. लेकिन इस बात पर शायद ही कोई यक़ीन करे कि इन कथित क्रूर तानाशाहों ने बच्चों के लिए रोचक कहानियां भी लिखी हैं.

किम जोंग, उनके पिता और दादा ने परमाणु हथियारों के विकास करने तथा जेल और क़ैदियों के बारे में आदेश जारी करने के बीच वक़्त निकाल कर बच्चों के लिए कई कहानियां लिख डालीं. किम जोंग उत्तर कोरिया के मौजूदा नेता हैं.

"आख़िर में वह फट पड़ा, अंदर से आग की भयावह लपटें निकलने लगीं. कैप्टन गिर पड़ा था. तभी बाहर से लड़ने की तेज़ आवाज़ें सुनाई देने लगीं. गांव वालों ने बचे हुए डाकुओं को भी मार गिराया था."

ये लाइनें उत्तर कोरिया में 'प्रिय नेता' के नाम से मशहूर किम जोंग इल की लिखी कहानी 'ब्यॉय वाइप आउट बैंडिट्स' से ली गई हैं. किम जोंग इल का साल 2011 में निधन हो गया था.

राजनीतिक संदेश

बराक ओबामा
'ऑफ दि आई सींगः ए लेटर टू माई डॉटर' किताब अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने लिखी है.

किम जोंग इल और उनके पिता किम इल सुंग ने किताबों की ताक़त पहचान ली थी. उन दोनों में बाल कहानियों को लिखने का हुनर था.

सिडनी विश्विद्यालय में उत्तरी कोरिया के बच्चों से जुड़े साहित्य पर शोध कर रहे क्रिस्टोफ़र रिर्चडसन का कहना है, "इन कहानियों की विषय वस्तु काफ़ी समृद्ध हैं, साथ ही इनमें असाधारण तरीक़े से हिंसक तत्व भी मौजूद हैं."

क्रिस्टोफ़र रिर्चडसन कहते हैं कि इनमें से ज़्यादातर कहानियां उत्तर कोरिया की पहाड़ियों में छिपे डाकूओं और प्रतिक्रियावादियों की कहानी है. कहानी में ये साफ़दिल और भले गांववालों के साथ लूट-पाट करते दिखाए गए हैं.

वैचारिक पहलू

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के पिता और दादा की लिखी कहानियों के नायक वे बहादुर नौजवान हैं, जो डाकुओं का मुक़ाबला करते हैं.

रिचर्डसन मानते हैं कि इन कहानियों में राजनीतिक संदेश निहित है लेकिन ऐसा होने के बावजूद इस तरह की कहानियों को केवल प्रचार कह कर ख़ारिज नहीं किया जा सकता.

उनका कहना है, "कहानी के धागों को इस तरह से पिरोया गया है कि इन्हें पढ़ना काफ़ी रोचक अनुभव हो सकता है. मुझे नहीं लगता कि बच्चों को कहानी के वैचारिक पहलू से कोई लेना-देना हो सकता है."

वे कहते हैं, "अगर आप 'ब्यॉय वाइप आउट बैंडिट्स' कहानी के किरदारों का कार्टून बनाएं और उसे पश्चिम के किसी छह या सात साल के बच्चे को दिखाएं तो वह इन पर लट्टू हो जाएगा. क्योंकि इनमें भी उसी तरह के मूर्खतापूर्ण हिंसक खेल दिखाए और लिखे गए हैं जो दुनिया में हर जगह हर बच्चा पसंद करता है."

विरोधियों की आलोचना

उत्तर कोरिया के तानाशाहों ने लिखी कहानी
'ब्यॉय वाइप आउट बैंडिट्स' कहानी का चित्रण

किम जोंग इल देश के विरोधियों की आलोचना के लिए व्यंग्यों और दृष्टांतों के इस्तेमाल के पक्ष में रहे हैं. उन्होंने बाल साहित्य पर एक ग्रंथ लिखा है जो बच्चों की किताब में एक पाठ के रूप में शामिल किया गया है.

इन कहानियों के खलनायक अलग-अलग हैं. 'ब्यॉय वाइप आउट बैंडिट्स' में सामंती ज़मींदार की तरह बर्ताव करने वाले अराजक कोरियाई खलनायक हैं. वे सामूहिक हित के बारे में नहीं सोचते. उन्हें देश की क्रांति की विरासत और ज्यूच संस्कृति से कोई मतलब नहीं."

ज्यूच विचारधारा उत्तर कोरिया के पूर्व नेता किम सूंग इल द्वारा विकसित विचारधारा है. यह विचारधारा मानती है कि क्रांति को सफल बनाने के लिए व्यक्ति में ताक़त और ज़िम्मेदारी सहित हर तरह की कुशलता होनी चाहिए. यह विचारधारा विदेशी शक्तियों से उत्तर कोरिया की आज़ादी और आत्मनिर्भरता को पर ज़ोर देती है.

अमरीका विरोधी कहानियां

उत्तर कोरिया के तानाशाहों ने लिखी कहानी
'द बटरफ्लाई एंड द कॉक' का चित्रण

ज्यूच विचारधारा को व्यक्त करती हुई 'द बटरफ़्लाई एंड द कॉक' सहित अमरीका विरोधी ढेरों कहानियां हैं. इन कहानियों की पहले पहल किम सुंग इल ने कल्पना की और बाद में इन्हें लिखा गया.

'द बटरफ़्लाई एंड द कॉक' में एक मुर्ग़े की कहानी है जो अमरीका का प्रतीक है. कहानी में दिखाया गया है कि कैसे वह मुर्ग़ा एक ख़ूबसूरत और हरे भरे बागीचे को नष्ट करने और वहां से दूसरे प्राणियों को भगाने की कोशिश करता है.

कहानी में एक तितली है, जो उत्तर कोरिया की प्रतीक है. वह मुर्ग़े के अत्याचार के ख़िलाफ़ उठ खड़ी होती है और उसके आतंक से बाग़ीचे और दूसरे प्राणियों की रक्षा करती है.

किम सुंग इल की एक और कहानी है जो विदेशी चरमपंथियों के बारे में है. कहानी का नाम 'ए विंग्ड हॉर्स' है. यह उस दौर की कहानी कहती है जब उत्तर कोरिया पर जापानी आक्रमणकारियों का ख़तरा पैदा हो गया था.

किताबों पर प्रतिबंध

रिचर्डसन सवाल करते हैं कि क्या इन कहानियों को सचमुच इन नेताओं ने ख़ुद लिखा होगा? उनकी शंकाओं का समर्थन उत्तर कोरिया में ही पैदा हुई ली हुएन सियो भी करती हैं. उत्तर कोरिया में पैदा हुई ली 17 साल की उम्र में देश छोड़कर चली गई थीं.

उत्तर कोरिया के तानाशाह

वे कहती हैं, "बच्चों की ये किताबें सच नहीं कहतीं. ये सब काल्पनिक हैं."

ली याद करती हैं कि जब वे काफ़ी छोटी थीं तो उन्हें सिंड्रेला जैसी विदेशी किताबों को पढ़ने का मौक़ा मिला था. जब वे बड़ी होने लगी तो उन्होंने पाया कि देश में कई किताबों पर प्रतिबंध था. इनमें लेनिन, मार्क्स की किताबें थीं. क्योंकि ये किताबें साम्यवाद के नज़रिए के बारे में बताती थीं.

नया वाटर पार्क

उत्तर कोरिया के मौजूदा नेता किम जोंग उन ये बात अच्छी तरह जानते हैं कि जिस राज्य को उनके दादा ने बनाया उसके प्रति बच्चों और किशोरों को वफ़ादार रखने की ज़रूरत है.

बच्चों को देश के प्रति वफ़ादार रखने के लिए वे बच्चों के वाटर पार्क और बाल सिनेमा में ख़ूब पैसे लगा रहे हैं.

पश्चिम का असर दबे पांव बच्चों के दिलो दिमाग़ में प्रवेश कर रहा है. सरकारी टेलीविज़न पर मदागास्कर जैसी पश्चिम की फ़िल्में दिखाई गईं. दो साल पहले मोरंगबोंग बैंड द्वारा आयोजित एक कंसर्ट में स्टेज पर डिजनी के कार्टून कैरेक्टरों ने डांस कर बच्चों का ख़ूब दिल जीता था.

रिचर्डसन का कहना है कि विदेशी संस्कृत्ति का अनुसरण नहीं करने की देश की नीति क्रांतिकारी तो थी मगर वह नीति दिनों की मेहमान ही साबित हुई.

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