क्या आम लोगों के लिखे रिव्यू भरोसेमंद होते हैं?

  • 20 फरवरी 2014
online_shopping

किसी उत्पाद को ख़रीदने या किराए पर लेने से पहले अकसर लोगों के मन में दुविधा बनी रहती है. ऐसे ग्राहकों की मदद क्राउडसोर्सिंग रिव्यू करते हैं. यानी ऐसे रिव्यू या समीक्षाएँ जिनमें हजारों लोग उस उत्पाद पर अपनी राय लिखते हैं.

आज के दौर में क्राउडसोर्सिंग रिव्यू कारोबार को काफी हद तक प्रभावित कर रहे हैं.

होटल और रेस्टोरेंट की समीक्षा करने वाली वेवसाइट 'ट्रिपएडवाइजर' पर आने वालों की संख्या में पिछले साल 55 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई. वेबसाइट पर हर महीने आने वाले यूनीक विजिटरों (ऐसे लोग जो एक कंप्यूटर से एक या ज़्यादा बार उस वेबसाइट पर आए) की संख्या बढ़कर 26 करोड़ हो गई.

वेबसाइट अब अपने दायरे को तेज़ी से बढ़ा रही है और हाल ही में उसने सीटगुरु डॉटकॉम को ख़रीदा है, जो किसी ख़ास एयरलाइंस में उपलब्ध सबसे सही सीट चुनने में यात्रियों की मदद करती है.

लोकल बिज़नेस रिव्यू साइट येल्प ने हाल में याहू सर्च के साथ एक गठजोड़ किया है और ब्रिटेन में बिल्डर सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनी रेटेडपीपल लंदन शेयर बाज़ार में सार्वजनिक निर्गम लाने की तैयारी कर रही है.

ये कंपनियां अपने पेजों पर दिखने वाले किसी भी कारोबार को बना या बिगाड़ सकती हैं लेकिन असली दिक्कत तब शुरू होती है जब वे कुछ ऐसी राय को बढ़ावा देते हैं, जिन पर भरोसा नहीं किया जा सकता.

पढ़ें: इंटरनेट पर लोग भलाई का काम क्यों करते हैं?

बुरे अनुभव

online_shopping

प्रमुख रिव्यू साइटों का कहना है कि वे नकली खातों की सफ़ाई के लिए अपने संपादकीय नियंत्रण का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कुछ लोगों को इस बात पर शक है क्योंकि उन्हें बुरे अनुभवों से गुज़रना पड़ा.

फिओला चॉस्टनेट सेंट लूसिया स्थित अपने पारिवारिक होटल में बिक्री प्रबंधक हैं. हाल ही में अपने कर्मचारियों की एक बैठक के दौरान उन्हें ट्रिपएडवाइजर पर उनके कारोबार के बारे में आई एक समीक्षा के बारे में बताया गया. ये समीक्षा काफ़ी बुरी थी.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि जिस व्यक्ति ने ये पोस्ट किया था, उसने कमरा बदलने की मांग की, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. इसके बाद वो इंटरनेट पर गया और उसने अपना ग़ुस्सा निकाल दिया.

चॉस्टनेट का कहना है कि ज़्यादातर रिव्यू सही नहीं होते हैं और जब किसी वजह से लोगों के अनुरोध को नहीं माना जाता है तो वे अपना ग़ुस्सा निकालते हैं.

वे इस साइट पर प्रकाशित कुछ पोस्टों पर संदेह भी जताती हैं. उन्होंने कहा कि आख़िर एक गेस्ट ये कैसे जान सकता है कि होटल की मरम्मत पर कितना ख़र्च किया गया है.

ट्रिपएडवाइजर के ग्लोबल वाइस प्रेसिडेंट जूलियो ब्रूनो कहते हैं कि फ़र्ज़ी खातों का पता लगाने के लिए एक गोपनीय बीजगणित का इस्तेमाल किया जाता है. सॉफ्टवेयर प्रत्येक रिव्यू की जांच करता है.

शापिंग मॉल

उन्होंने बताया कि इसके लिए सैकड़ों कर्मचारी भी काम करते हैं. ब्रूनो ने बताया, "हम उन्हें कटेंट इंटेग्रिटी टीम कहते हैं."

पढ़ें: 'एक घंटे में बिके 20 लाख ब्रा'

चुनौतियां

भेदभाव भरी बुरी समीक्षा से बिक्री घटती है, लेकिन अगर किसी ने ग़लत इरादे के साथ किसी उत्पाद की तारीफ कर दी है, तो बाद में ग्राहकों को पछताना पड़ता है.

येल्प भी कहता है कि वो ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करता है.

बोस्टन यूनिवर्सिटी में मार्केटिंग के सहायक प्रोफेसर जोर्जस जेर्वस ने बताया कि ताज़ा शोध से पता चला है कि संदिग्ध रिव्यू की संख्या बढ़ रही है.

उन्होंने बताया, "उपभोक्ता फ़ैसला करने के दौरान रिव्यू पर काफी ध्यान दे रहे हैं."

वह कहते हैं कि आखिरकार सच्चा दिखने वाला रिव्यू तैयार करना मुश्किल काम नहीं है और फ़र्ज़ी रिव्यू करने वाले अब बहुत चालाक होते जा रहे हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार