'हम अब सेक्स के बारे में बातें कर सकते हैं'

  • 19 फरवरी 2014
भूटान में सोशल मीडिया

दुनिया से लगभग अलग-थलग रहने वाले भूटान में टेलीविज़न और इंटरनेट की शुरुआत तो 1999 में हुई लेकिन उसके बाद वहां फ़ेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स के इस्तेमाल में काफ़ी तेज़ी आई है.

एक अनुमान के अनुसार आज भूटान में लगभग 80 हज़ार लोग फ़ेसबुक पर सक्रिय हैं जो कि भूटान की कुल आबादी के 10 फ़ीसदी से अधिक हैं.

बौद्ध धर्म के मानने वाले भूटान में विचारों के मतभेद और आलोचना के लिए कोई जगह नहीं थी लेकिन अब सोशल मीडिया ने भूटान के युवाओं को ये अवसर दिया है कि वे अपने विचारों को व्यक्त कर सकते हैं और बदलाव लाने की कोशिश कर सकते हैं.

बीबीसी संवाददाता अनबरसन एथिराजन ने राजधानी थिम्पू में कुछ युवाओं से बातचीत की जिन्होंने बताया कि किस तरह से सोशल मीडिया उनके समाज को बदल रहा है.

'हम अब सेक्स के बारे में बात कर सकते हैं'

भूटान के एक एफ़एम चैनल कूज़ो एफ़एम की रेडियो जॉकी सोनम यांगडेन कहती हैं कि भूटान में सेक्स और यौन संबंधों के बारे में बातचीत को लेकर भूटानी समाज में एक क्रांति सी आ गई है.

भूटान में सोशल मीडिया

सोनम के अनुसार सोशल मीडिया का बहुत बड़ा प्रभाव पड़ रहा है और अब उन्हें इस बात को जानने का मौक़ा मिलता है कि देश के अंदर और देश के बाहर क्या हो रहा है.

सोनम कहती हैं, ''हमारा समाज एक रूढ़िवादी समाज है. लेकिन सोशल मीडिया के ज़़रिए लोग अब समलैंगिक विवाह और दूसरे संवेदनशील मुद्दों पर अभियान चला रहे हैं.''

सोनम के अनुसार यौन-शिक्षा के मामले में भी सोशल मीडिया ने अहम रोल अदा किया है. सोनम ख़ुद यौन-शिक्षा के लिए जागरूकता फैलाने वाले एक प्रोग्राम से जुड़ी हुईं हैं. सोनम के अनुसार पहले ये सोशल मीडिया पर शुरू हुआ और उसके बाद ही मुख्यधारा की मीडिया ने इन मुद्दों पर बातचीत और बहस शुरू की.

'हमने असहमत होना सीखा'

तारा लिंबू एक पत्रकार हैं और सोशल मीडिया पर काफ़ी सक्रिय हैं. तारा के अनुसार युवा अब सोशल मीडिया के ज़रिए सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर गंभीर बहस करते हैं. भूटान की 60 फ़ीसदी आबादी 22 साल से कम उम्र की है.

भूटान में सोशल मीडिया

तारा के अनुसार 'भूटान स्ट्रीट फ़ैशन' एक फ़ेसबुक पेज है जिसके फ़ॉलोअर किसी भी मुख्यधारा की मीडिया से ज़्यादा हैं. इस पेज पर फ़ैशन से लेकर गंभीर राजनीतिक मुद्दों पर बहस होती है.

तारा कहती हैं, ''भूटान में हमें सरकार या नेताओं की आलोचना करने की आदत नहीं थी. लेकिन सोशल मीडिया ने सब कुछ बदल दिया है. 2013 के संसदीय चुनाव के दौरान लोग अपनी पहचान छिपाए बग़ैर सोशल मीडिया पर राजनीतिक पार्टियों और उनकी नीतियों की जमकर आलोचना कर रहे थे. यहां तक की दोस्तों के बीच और एक ही परिवार के अंदर राजनीतिक विचार धारा के आधार पर लोगों में मतभेद खुलकर सामने आ रहे थे.''

'हमने जेलों में बंद लोगों को बाहर आने में मदद की'

ताशी ग्येल्तशेन पेशे से एक फ़िल्म मेकर हैं. समाज में ठोस सुधार करने में फ़ेसबुक की बड़ी भूमिका की वकालत करते हुए ताशी कहते हैं, ''जब पिछली सरकार ने तंबाकू के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए एक नया क़ानून लाने की कोशिश की तो मैंने इस क़ानून में संशोधन के लिए एक फ़ेसबुक पेज बनाया.

वे बताती हैं, "लगभग चार हज़ार लोगों ने इसमें हिस्सा लिया और हम सरकार को ये बात समझाने में सफल हुए कि इस क़ानून को लेकर लोगों में कितना रोष है?"

ताशी के अनुसार उनके इस अभियान के बाद संसद में इस विषय पर बहस हुई और आख़िरकार सरकार ने तंबाकू क़ानून में संशोधन किया. ताशी कहते हैं कि भूटान के राजा ने तंबाकू क़ानून के तहत गिरफ़्तार 16 लोगों को माफ़ी भी दे दी. ताशी का मानना है कि सोशल मीडिया के बग़ैर ये सब कुछ संभव नहीं था.

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