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अमरीकी बच्चे सीख रहे हैं बंदूकधारियों से निपटना

 बुधवार, 19 फ़रवरी, 2014 को 04:48 IST तक के समाचार
सैंडी हुक स्कूल में हुई घटना के दौरान डरे हुए दो बच्चे

साल 2012 में हुए सैंडी हुक हत्याकांड के बाद से कई अमरीकी स्कूलों ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है. इस घटना के बाद से सुरक्षा ड्रिल उतनी ही आम हो गई हैं जितनी फायर ड्रिल. लेकिन इसके कारण अभिभावकों को घर पर बच्चों के कई कठिन सवालों का सामना करना पड़ता है.

मेरा सात साल का बेटा बहुत बातूनी है. मेरे तीनों बच्चों में सबसे छोटा होने के कारण वो हमेशा चाहता है कि लोग उसकी बातें सुनें.

उसके जीवन में होने वाली छोटी-छोटी बातें भी उसके लिए बड़ी ख़बर होती हैं. इसलिए उसने अपने दोस्तों के साथ अपने स्कूल में सुरक्षा ड्रिल करने के तुरंत बाद बिना देर किए मुझे इसके बारे में बताया.

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बेन ने बड़ी गंभीरता के साथ कहा, "यह इसलिए है कि हो सकता है किसी के साथ किसी दिन कुछ बुरा हो जाए."

उसने बताया, "हम अपनी टीचर के साथ झुंड बनाकर चुपचाप एक जगह इकट्ठा होते हैं जब तक कि बाहर का ख़तरा टल न जाए."

उसने अपनी बात पर ज़ोर देने के लिए कहा मेरी तरफ देखकर जानबूझकर कहा, "यहाँ अंदर कोई ख़तरा नहीं है."

उसकी बात सुनकर मेरे होंठों पर मुस्कराहट आ गई लेकिन अंदर ही अंदर मैं चौंक भी गई. मैंने तत्काल बताचीत का विषय बदल दिया.

दुखदायी ज़रूरत

सैंडी हुक स्कूल में घटना में मारे गए बच्चों का स्मृति स्थल

सैंडी हुक स्कूल में हुई घटना में मारे गए बच्चों का स्मृति स्थल.

इस विषय के बारे में सोचना अंदर तक हिला देने वाला था कि मेरे बेटे को एक ऐसी स्थिति का सामना करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है जब उसका सामना किसी ऐसे बंदूकधारी से होगा जिसके सिर पर ख़ून सवार हो.

लेकिन अमरीकी स्कूलों में बच्चों को ऐसी स्थिति का सामना करने का प्रशिक्षण देना एक दुखदायी ज़रूरत बन गया है.

हालांकि 1990 के दशक के मध्य से ही अमरीका में स्कूल में होने वाली गोलीबारी की घटनाओं में बढ़ोत्तरी नहीं हुई है लेकिन ऐसी घटनाएँ अमरीकी जीवन की एक कटु सच्चाई हैं.

सितंबर से अब तक स्कूलों में गोलीबारी की 11 घटनाएँ हो चुकी हैं. इनमें कॉलेजों में होने वाली गोलीबारी शामिल नहीं है.

न्यू मैक्सिको में एक 12 वर्षीय बच्चे ने अपने साथियों को बंदूक दिखाकर धमकाया.

सबसे भयानक हादसा

सैंडी हुक स्कूल, अमरीका

सैंडी हुक स्कूल में हुई घटना के बाद ओबामा ने बंदूक नियंत्रण क़ानून बनाने की बात की थी.

स्कूल में गोली चलने का सबसे भयानक हादसा दिसंबर, 2012 में हुआ.

अमरीका के कनेक्टीकट राज्य के न्यूटाऊन शहर के सैंडी हुक एलीमेंट्री स्कूल में हुई गोलीबारी में एडम लैंज़ा नामक हमलावर ने पहली कक्षा में पढ़ने वाले 20 बच्चों को मारे दिया था.

लैंज़ा ने खुद अपनी जान लेने से पहले अपनी माँ और छह अन्य वयस्कों की भी हत्या कर दी थी.

यह घटना इतनी बड़ी और इतनी ज़्यादा भयावह थी और मरने वाले बच्चे इतनी कम उम्र के थे कि इसके बाद अमरीका में बंदूकों के नियंत्रण के लिए क़ानून बनाने का प्रयास हुआ.

हालांकि यह क़ानून कांग्रेस में नहीं पास हो सका.

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न्यूटाउन में हुई घटना की रिपोर्टिंग मेरे जीवन का सबसे दुखदाई पेशेवर काम था.

लोग अपने बच्चों को तरह-तरह से याद कर रहे थे. घटनास्थल के पास ही अस्थाई तौर पर जहाँ बच्चों के शवों को रखा गया था, उसे देखना एक त्रासद अनुभव था.

ज़ेहन में यह ख़्याल आना स्वाभाविक था कि अगर इनमें मेरा बच्चा भी होता तो मैं क्या करती !

घटना का असर

सैंडी हुक की घटना के बाद ओबामा

सैंडी हुक की घटना के बाद ओबामा एक महिला को दिलासा देते हुए. इस महिला का बच्चा घटना में मारा गया था.

न्यूटाउन की घटना के बाद से बहुत से स्कूलों ने सुरक्षा योजनाओं को अपना लिया है. मेटल डिटेक्टर, सर्विलैंस कैमरा और बाड़ लगाना आम हो गया है.

मेरे तीनों बच्चे सुरक्षा ड्रिल करते हैं. स्कूल वाले अभिभावकों को पहले ही बता देते हैं कि बच्चे घर पर असुविधाजनक सवाल पूछ सकते हैं.

मेरे ही तरह एक अन्य अभिभावक के अनुभव भी मेरे जैसे ही थे.

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वो बता रहीं थी कि जब उनका पाँच वर्षीय बातूनी बेटा उन्हें बताता है कि किसी बंदूकधारी से कैसा बचा जाता है तो उनका दिल बैठ जाता है.

एक अन्य माँ ने इस तरह की ड्रिल की ज़रूरत पर सवाल खड़ा किया.

उनका मानना था कि जो घटना अभी हुई नहीं है और जो बहुत कम ही होती है उसे ध्यान में रखकर ऐसी ड्रिल कराना अति सक्रियता दिखाना है.

इसका असर क्या होगा

सैंडी हुक स्कूल में मारे गए बच्चों की तस्वीर दिखाती लड़की

सैंडी हुक स्कूल में मारे गए बच्चों की तस्वीर दिखाती लड़की

हम सब जानना चाहते हैं कि इस तरह की ड्रिल का हमारे बच्चों पर क्या असर पड़ता है और क्या ये हमारे बच्चों को डरपोक बना रहा है.

लेकिन ज़्यादातर अभिभावक इस ड्रिल को स्कूल जीवन में बच्चों की जान बचाने के लिए ज़रूरी चीज़ मानते हैं.

दूसरी तरफ राष्ट्रीय बंदूक नियंत्रण क़ानून पास नहीं हुआ है. राष्ट्रपति बराक ओबामा ने स्टेट ऑफ यूनियन के भाषण में इस क़ानून का उड़ता-उड़ता ही ज़िक्र किया.

जबकि पिछले साल उनके भाषण में यह एक भावुक मुद्दा था.

मैंने अपने बच्चे के साथ इस मामले को हल्के में लिया. मेरे दो बच्चों ने तो स्कूल में होने वाली सुरक्षा ड्रिल का ज़िक्र भी नहीं किया.

ये तो नन्हा बेन है जिस पर इसका सबसे अधिक असर प्रतीत हो रहा था.

दिल को दिलासा

सैंडी हुक स्कूल

सैंडी हुक स्कूल में हुई घटना के बाद स्कूल के अंदर का एक दृश्य

मैंने अपने दिल को दिलासा दिया कि हालांकि अमरीका में जितने लोग हैं उतनी ही बंदूके हैं लेकिन न्यूयॉर्क का बंदूक नियंत्रण क़ानून सख़्त है और पुलिस हमेशा ही आसपास होती है.

मुझे लगता है कि किसी बंदूकधारी के लिए न्यूयॉर्क के किसी स्कूल में सबकी नज़रों से छिपकर घुसना मुश्किल है.

अभी हाल ही में बेन ने ड्रैगन का चित्र बनाते-बनाते बीच में मेरे तरफ देखते हुए पूछा, "क्या आपको लगता है कि मेरे आसपास किसी का दिन बुरा हो सकता है?"

मैंने अपने दिल पर हाथ रखकर जितना हो सकता था उतने विश्वास और दृढ़ता के साथ कहा, "नहीं, तुम्हें इसे लेकर परेशान होने की ज़रूरत नहीं है. ऐसा कभी नहीं होगा."

ऐसा लगा कि नन्हा बेन मेरे जवाब से संतुष्ट हुआ था क्योंकि वो फिर से अपने चित्र में लग गया. लेकिन मैंने अपना चेहरा घुमा लिया क्योंकि मेरी आँखें आँसुओं से डबडबा गई थीं.

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