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जर्मनी चाहता है यूरोप का अपना 'इंटरनेट'

 रविवार, 16 फ़रवरी, 2014 को 03:09 IST तक के समाचार
एंगेला मर्केल, जर्मनी

जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल ने यूरोप का अपना संचार नेटवर्क तैयार करने का प्रस्ताव दिया है ताकि जासूसी से बचा जा सके. ये संचार नेटवर्क ईमेल और दूसरे डाटा के खुद-ब-खुद अमरीका से गुज़रने से बचाएगा.

अपने साप्ताहिक पॉडकास्ट में मर्केल ने कहा कि वो बुधवार को फ़्रांस के राष्ट्रपति फ़्रांसुआ ओलांद से मुलाकात में ये मुद्दा उठाएंगी.

अमरीका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी के निगरानी कार्यक्रम की जानकारी सामने आने के बाद से यूरोप के कई देश चिंतित हैं. अमरीकी खुफिया एजेंसी सीआईए के पूर्व कॉन्ट्रैक्टर एडवर्ड स्नोडेन ने जो जानकारी लीक की थी उनके आधार पर कहा गया कि अमरीकी जासूस अमरीका के सहयोगी देशों के नेताओं, जैसे कि एंगेला मर्केल, के फ़ोन की भी निगरानी कर रहे थे.

एनएसए के गोपनीय दस्तावेज़ों के सामने आने से पता चला कि अमरीकी और ब्रितानी निगरानी कार्यक्रम इंटरनेट से बड़ी मात्रा में निजी जानकारी जुटाते हैं.

मर्केल ने इस बात की भी आलोचना की कि फ़ेसबुक और गूगल जैसी कंपनियां ऐसे देशों में स्थित हो सकती हैं जहां डेटा प्रोटेक्शन के लिए बहुत सख़्त नियम नहीं हैं जबकि उनका कारोबार ऐसे देशों में होता है जहां इस बारे में सख़्त नियम हैं.

ब्राज़ील, अमरीका, जर्मनी

एनएसए के निगरानी कार्यक्रम की जानकारी सामने आने के बाद ब्राज़ील और जर्मनी से अमरीका के संबंध बिगड़े हैं.

उन्होंने कहा, "सबसे पहले, हम यूरोप की सेवा प्रदाता कंपनियों के बारे में बात करेंगे जो हमारे नागरिकों को सुरक्षा दे सकें ताकि किसी को अटलांटिक के उस पार ईमेल और दूसरी जानकारी न भेजनी पड़े. बल्कि यूरोप में ही संचार नेटवर्क बनाया जा सके."

संबंधों पर असर

उन्होंने कहा कि इस बारे में कोई शक नहीं है कि यूरोप को डेटा प्रोटेक्शन को लेकर बहुत कुछ करने की ज़रूरत है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एक फ़्रांसीसी अधिकारी के हवाले से कहा है कि फ़्रांस सरकार की जर्मनी के इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की योजना है.

जर्मनी में निजता एक संवेदनशील मुद्दा है. नाज़ी दौर में और फिर पूर्वी जर्मनी के कम्युनिस्ट शासन में जर्मनी बड़े पैमानी पर निगरानी रखी जाती थी.

एंगेला मर्केल की क्रिश्चियन डेमोक्रेट्स पार्टी के एक विदेश नीति प्रवक्ता फ़िलिप मिसफ़ेल्डर ने हाल ही में कहा था कि अमरीका की जासूसी के बारे में जो जानकारी सामने आई है उससे दोनों देशों के संबंध साल 2003 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं.

जर्मनी ने कोशिश की थी कि अमरीका जासूसी न करने को लेकर समझौते पर राज़ी हो जाए लेकिन उसे सफलता हाथ नहीं लगी.

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