गद्दाफ़ी के वो रहस्य, जिनसे 'पर्दा हटा' है....

  • 6 फरवरी 2014
लीबिया मोउम्मद गद्दाफी

लीबिया में अक्तूबर 2011 को हुए विद्रोह के दौरान कर्नल ग़द्दाफ़ी की मौत के बारे में काफी कुछ लिखा और कहा गया है.

लेकिन एक नई फिल्म ग़द्दाफ़ी के जीवन के कई अनछुए पहलुओं पर नए सिरे से रोशनी डालती है.

यह फिल्म ग़द्दाफ़ी के बेहद करीबी लोगों से ली गई जानकारी के आधार पर बनी है और लीबिया के इस विवादास्पद नेता के विभिन्न पहलुओं को पेश करती है.

ग़द्दाफ़ी के करीबी लोगों में अली ऑजली शामिल थे. वो ग़द्दाफ़ी के शासन के दौरान अमरीका में राजदूत भी रहे थे.

वर्ष 1969 में ग़द्दाफ़ी के सत्ता में आने के दो साल के बाद ऑजली ने लीबिया की राजनयिक सेवा में काम करना शुरू किया था.

ऑजली ने अपने वयस्क जीवन का ज्यादातर हिस्सा ग़द्दाफ़ी की सेवा में गुजार दिया. वो ग़द्दाफ़ी को याद करते हुए कहते हैं कि उनके पास ग़द्दाफ़ी के लिए कुछ भी अच्छा कहने को नहीं है.

ऑजली ने ग़द्दाफ़ी के बारे में कई राज बताए. इनमें कई ऐसे दावे थे जिनकी हम पड़ताल नहीं कर पाए.

इनमें से एक दावा ये था कि एक व्यक्ति ने जब शिकायत की थी कि ग़द्दाफ़ी ने उसकी बीवी के साथ संबंध बनाए हैं, तो उस व्यक्ति को दो कारों से बांध कर चीर डाला गया था.

लेकिन कुछ ऐसे दावे थे, जिनकी हमने पड़ताल की.

(ग़द्दाफ़ी को 'पकड़ने वाले' लड़ाकू की मौत)

अंदरूनी सूत्र

लीबिया गद्दाफी हत्या
त्रिपोली के सीमावर्ती इलाके में मौजूद फ्लाइट संख्या 1103 का मलबा.

इसमें से एक दावा यह था कि 22 दिसंबर 1992 को लीबियाई अरब एअरलाइन्स 727 विमान को ग़द्दाफ़ी के आदेश पर उड़ा दिया गया था.

उस विस्फोट से जहाज में सवार कुल 157 लोग मारे गए. मारे गए लोगों में लीबियाई और विदेशी शामिल थे.

ग़द्दाफ़ी की हत्या के बाद उस विस्फोट में मारे गए एक ब्रितानी नागरिक की पत्नी ने लीबिया की नई सरकार से उस घटना की फिर से जांच करने की गुजारिश की थी.

रिपोर्टरों ने विस्फोट वाले इलाके में सेना के जेट विमानों के पायलटों, एअर ट्रैफिक कंट्रोलर और एअरलाइन के कर्मचारियों से बात की.

इस घटना के बारे में ऑजली के माध्यम से पहली बार किसी अंदरूनी सूत्र से जानकारी मिल रही थी. ऑजली से जब ये पूछा गया कि वे कितने भरोसे के साथ ये कह रहे हैं, तो उनका जवाब था 100 फ़ीसदी.

पश्चिमी आतंकवाद

ऑजली ने बताया कि एक टाइमर बम हवाई जहाज में लगा दिया गया. लेकिन बाद में जब वह नहीं फटा तो ग़द्दाफ़ी ने उड़ते हुए जहाज को त्रिपोली एअरपोर्ट के पास मार गिराने का आदेश दिया.

सवाल ये है कि आखिर ग़द्दाफ़ी ने ऐसा आदेश क्यों दिया?

ऑजली कहते हैं कि ग़द्दाफ़ी इस हवाई जहाज़ को उड़ाकर पश्चिम को बताना चाह रहे थे कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते लीबिया के आम आदमी किस तरह परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. वो ये संदेश देना चाहते थे कि कलपुर्जों को खरीदने के लिए लीबिया पर लगे प्रतिबंधों को हटा दिया जाए, वर्ना विमान सुरक्षित उड़ान नहीं भर पाएंगे.

घटना की आधिकारिक व्याख्या एकदम अलग थी. ग़द्दाफ़ी के शासनकाल में लीबियाई एअरफोर्स के एक पायलट और उनके इंस्ट्रक्टर को इस आरोप में जेल भेज दिया गया कि उसकी वजह से हवाईजहाज दुर्घटनाग्रस्त हुआ.

असंतुष्टों की हत्या

क्रिस्टोफर ओलगिटी
फिल्म 'गद्दाफी सीक्रेट वर्ल्डः मैड डॉग' के निर्देशक क्रिस्टोफर ओलगिटी.

इंस्ट्रक्टर माजिद तयारी त्रिपोली के होटल में हमसे मिलने के लिए तैयार हो गए. उन्होंने जोर देकर बताया कि यह विमान दुर्घटना टकराने के कारण नहीं हुई. उन्होंने 727 की पूंछ को अपनी ओर तेजी से आते हुए देखा था.

विमान पर नीचे से कोई चीज़ टकराई और फिर विस्फोट हो गया. दोनों पायलट बाहर कूद गए. माजिद के अनुसार 727 में पहले ही विस्फोट हो चुका था.

विमान जहां दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, हम वहां पहुंचे. वहां कुछ लोग तैनात थे. यहां से हम पीछे की सड़क पर चलते हुए उस जगह पहुंचे जहां फ्लाइट 1103 का मलबा मिला था.

इस सफर में हमारी मुलाकात ऑजली के अलावा कई दूसरे अंदरूनी सूत्रों से हुई.

हमने लुत्ज कासर से बात की. लुत्ज एक जर्मन रॉकेट डिजाइनर हैं और उन्होंने ग़द्दाफ़ी के लिए साल 1980 में काम किया था.

कासर कहते हैं, "ग़द्दाफ़ी काफी अच्छे और विनम्र व्यक्त थे. उन्हें देख कर ऐसा लगता था कि उन्होंने अपनी कमजोरियों को छिपाने के लिए एक मुखौटा लगा रखा है."

कासर की पत्नी सुसेन ग़द्दाफ़ी को आकर्षक व्यक्तित्व का मालिक मानती थी, मगर बाद में उनका मोहभंग हो गया.

हवाना में हमें फ्रैंक ट्रपिल नाम के एक और शख्स मिले. अदालत से भागे हुए एक अमरीकी भगोड़े. उन पर ग़द्दाफ़ी के कहने पर 1970 में लीबिया के असंतुष्टों की हत्या के अभियान में शामिल होने के आरोप में मुकदमा चल रहा है.

(दफ़ना दिया गया गद्दाफ़ी को 'पकड़ने वाला')

ट्रपिल कहते हैं, "ग़द्दाफ़ी ने हर असंतुष्ट को अपने रास्ते से हटाने की योजना बना रखी थी. इसे सफल बनाने के लिए उन्होंने लंदन में कई लोगों से संपर्क किया."

यौन हिंसा

फ्रैंक ट्रपिल
फ्रैंक ट्रपिल भाड़े के हत्यारे थे और गद्दाफी के लिए काम करते थे.

फिर हमने लड़कियों के साथ ग़द्दाफ़ी के यौन शोषण के आरोपों की सच्चाई जानने के लिए सबूत जुटाने शुरू किए.

(कर्नल गद्दाफ़ी के पास थीं कई 'हरम दासियाँ')

ग़द्दाफ़ी की एक महिला बॉडीगार्ड से हमारी बात हुई. वो फिलहाल अज्ञातवास में रह रही हैं.

ग़द्दाफ़ी का नाम लेते ही उनके चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगती हैं. वो बताती हैं, "एक रात हमारे सामने 17 छात्रों को फांसी दी जानी थी. मगर उन्हें फांसी नहीं दी गई बल्कि गोली मार दी गई. हमें चीखने से मना कर दिया गया. कहा गया कि हम हंसे."

और आखिर में हम गैरी पीटर्स से मिले. गैरी ग़द्दाफ़ी परिवार के आस्ट्रेलियाई अंगरक्षक थे. वो कहते हैं, "ग़द्दाफ़ी अंत तक संघर्ष करते रहे. उन्हें उम्मीद थी कि वो अपना रुतबा फिर से हासिल कर लेंगे. "

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