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पाकिस्तान: सिंधु सभ्यता के शहर को 'उत्सव से ख़तरा'

 शुक्रवार, 31 जनवरी, 2014 को 12:51 IST तक के समाचार
मोहन जोदड़ो

पाकिस्तान में संरक्षणकर्ताओं ने यूनेस्को से मोहनजोदाड़ो विश्व धरोहर स्थल पर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम को रोकने की अपील की है.

विद्वानों और पुरातत्ववेत्ताओं के एक ग्रुप का कहना है कि सिंध सांस्कृतिक उत्सव का उद्घाटन समारोह मोहेनजोदाड़ो को बर्बाद कर सकता है.

ये दुनिया का सबसे पुराना और बचा हुआ शहर है, जो सिंधु घाटी सभ्यता का साक्षी रहा है.

ये उत्सव पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के युवा नेता बिलावल भुट्टो ज़रदारी के दिमाग़ की उपज है.

कराची में बीबीसी संवाददाता शाहज़ेब जिलानी का कहना है कि उद्घाटन समारोह के आधिकारिक इंतजाम पूरे जोर-शोर से जारी हैं-लेकिन शीर्ष संरक्षणकर्ता इससे खफ़ा हैं.

अपने गृह प्रांत में इस उत्सव के आयोजन को भुट्टो ज़रदारी के स्थानीय स्तर पर खुद को मजबूत करने के प्रयासों से जोड़कर देखा जा रहा है. ऐसा खासकर उन आलोचनाओं के बाद हो रहा है, जिसमें उन्हें विदेश में शिक्षा-दीक्षा और खास लालन-पालन के चलते जमीन से कटा हुआ बताया जा रहा है.

पूर्व राष्ट्रपति के आसिफ अली ज़रदारी और छह साल पहले हत्या का शिकार हुईं प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के पुत्र बिलावल की जिंदगी का अधिकतर समय विदेश में ही गुज़रा है.

इस सप्ताह बीसीसी की लिस डूसेट को दिए एक खास इंटरव्यू में उन्होंने मोहनजोदाड़ो समेत पाकिस्तान की सांस्कृतिक धरोहरों को बचाए रखने की जरूरत पर भरपूर जुनून दिखाया था. वे धरोहर अब जीर्ण-शीर्ण हाल में हैं और उन्हें पुनरुद्धार की जरूरत है.

इन ऐतिहासिक धरोहरों में मोहनजोदाड़ो भी शामिल है, जहां पीपल्स पार्टी का मजबूत गढ़ है.

स्थल को नुकसान

मोहन जोदड़ो

शीर्ष संरक्षणकर्ता आरोप लगाते हैं कि प्रांतीय सरकार इनके संरक्षण में कोताही बरतती रही है.

उन्हें चिंता है कि उत्सव के उद्घाटन समारोह के लिए किए जा रहे निर्माण कार्यों से पांच हजार साल पुराने इस स्थल को नुकसान पहुंच सकता है. उन्होंने इस बारे में संयुक्त राष्ट्र की धरोहर संस्था यूनेस्को को पत्र लिखकर इसे रोकने की मांग की है.

भुट्टो ज़रदारी इस आलोचना को ख़ारिज करते हुए कहते हैं कि आयोजक पूरी सावधानी बरत रहे हैं और ये इवेंट शनिवार को होगा.

इस इलाके में बड़े पैमाने पर लकड़ियों और लोहे के खंभे गाड़ने के लिए खुदाई हुई है और इससे इसे नुकसान भी पहुंचा है. यहां पर प्रकाश कायर्क्रम के लिए बड़े पैमाने पर उपकरण लगाए गए हैं.

पंजाब विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग के प्रमुख फरजंद मसीह कहते हैं कि इस तरह की गतिविधियों को पुरावस्तु कानून के तहत प्रतिबंधित करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि आप किसी पुरातत्व स्थल पर एक कील भी नहीं ठोक सकते. फिर यहां तो लेज़र और स्पॉट लाइट्स का असर पुरातत्व स्थल पर पड़ेगा जो पहले से कई नकारात्मक कारणों से बुरे हाल में है.

"मैं नहीं समझता कि सांस्कृतिक कार्यक्रम और लाइट्स से कोई नुकसान होगा. मैं व्यक्तिगत तौर पर खुद सारे काम पर नजर रखे हूं और ये तय प्रक्रियागत मानकों के अनुरूप ही हो रहा है"

कासिम अली कासिम, सिंध पुरातत्व विभाग

उनका कहना है कि उन्हें आमंत्रण दिया गया था लेकिन उन्होंने जाने से मना कर दिया.

नुकसान से मना

सिंध पुरातत्व विभाग के प्रमुख कासिम अली कासिम किसी भी तरह के नुकसान से मना करते हैं. उन्हें ही इस बर्बादी के लिए जिम्मेदार बताया जा रहा है.

उन्होंने कहा, "मैं नहीं समझता कि सांस्कृतिक कार्यक्रम और लाइट्स से कोई नुकसान होगा. मैं व्यक्तिगत तौर पर खुद सारे काम पर नजर रखे हूं और ये तय प्रक्रियागत मानकों के अनुरूप ही हो रहा है."

वकील काजी अली अजहर द्वारा दाखिल किए मामले पर शुरुआती आनाकानी के बाद सिंध कोर्ट सुनवाई के लिए सहमत हो गया कि सरकार इस स्थल पर गतिविधियों पर रोक लगाए.

अदालत के मुख्य न्यायाधीश सैयद मकबूल बकीर ने छोटे आदेश के बाद कहा कि अगर शो के लिए अत्यधिक सावधानी नहीं बरती गई तो ये स्थल नष्ट हो जाएगा और ये महान राष्ट्रीय क्षति होगी.

ये स्थल पाकिस्तान की छह यूनेस्को विश्व धरोहरों में एक है. जो खास सांस्कृतिक महत्व का प्रतीक है.

देश के बहुत से ऐतिहासिक स्थलों की हालत बदतर है. न केवल वे तोड़फोड़ की शिकार हैं बल्कि उनके आसपास अवैध अतिक्रमण भी हो रहे हैं.

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