न्यूयॉर्क: महिला हक़ की आवाज़ बनीं मुख़्तार माई

  • 22 जनवरी 2014
मुख्तार माई ओपेरा

न्यूयॉर्क शहर में पाकिस्तान की महिला मुख़्तार माई के बारे में एक ओपेरा नाटक का मंचन किया गया. साल 2002 में पाकिस्तान के एक गांव में मुख़्तार माई को उनके भाई के कथित ज़ुर्म की सज़ा के तौर पर सामूहिक बलात्कार का निशाना बनाया गया था.

इस ओपरा नाटक "थंबप्रिंट" या "अंगूठे के निशान" में मुख़्तार माई पर सामाजिक रीति रिवाज के नाम पर किए गए अत्याचार की कहानी को दर्शाया गया है.

मैनहैटन में बरोक थिएटर में ओपरा नाटक थंबप्रिंट का वर्ल्ड प्रीमियर आयोजित किया गया.

इसमें करीब एक दर्जन कलाकारों ने हिस्सा लिया जिनमें कई भारतीय मूल के कलाकार शामिल हैं.

इन सभी ने मिलकर मुख़्तार माई पर किए गए अत्याचार को नाटक में अलग ढंग से दर्शाया है.

मुख़्तार माई का मुख्य किरदार निभाया है भारतीय मूल की कमला संकरम ने. कमला ने ही ओपरा में संगीत और गायन दिया है.

महिला अधिकार की लड़ाई

कमला ने बीबीसी हिंदी से बात करते हुए कहा, "मैंने मुख़्तार माई की जीवनी पढ़ी उसमें से मैंने कुछ हिस्सों पर छोटे छोटे गाने लिखे लेकिन बहुत सी बातों को मैं उनमें शामिल नहीं कर पाई. इसीलिए मैंने उसको ओपेरा की शक्ल में आयोजित करने का प्रस्ताव रखा और फिर हमने ओपेरा बनाया.”

कमला का कहना है कि यह ओपेरा पाकिस्तान के मुसलमानों के बारे में नहीं बल्कि यह तो एक महिला की कहानी है जिनको अपनी आवाज़ उठाने की हिम्मत मिल गई. उन्होंने शिक्षा औऱ महिलाओं के अधिकारों के लिए मुहिम शुरू कर दी.

एक शो के बाद ख़ुद मुख़्तार माई ने भी ओपरा के आयोजकों औऱ अन्य लोगों से इंटरनेट पर वीडियो के जरिए बात की.

उन्होंने ख़ुशी जताते हुए अपने स्कूल और स्वयंसेवी संगठन के बारे में ब्योरा दिया. ख़ासकर उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि उनको अब अपने स्कूल को चलाने में आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और कई स्कूल बंद भी हो गए हैं.

कमला संकरम
मुखतार माई का किरदार भारतीय मूल की कमला संकरम ने निभाया.

लेकिन अभी भी वह एक एंबुलेंस और महिलाओं की मदद के लिए एक केंद्र चला रही हैं.

मुख़्तार माई ने कहा कि उन्होंने अपने ऊपर अत्याचार के बाद कई बार अत्महत्या करने की सोची लेकिन फिर कुछ लोगों की मदद से उनको बच्चों के स्कूल खोलने और महिलाओं की मदद करने की नई राह मिली.

मिलेगी आर्थिक मदद

मुख़्तार माई ने कहा, "स्कूल चलाने और बच्चों का ख्याल रखने में मुझे अब भी आर्थिक मदद चाहिए. मैं तो यह काम करके ख़ुश हूं और अब मैं जीना चाहती हूं. लेकिन मेरा काम पैसे की कमी की वजह से रूक रहा है. मैं तो सब छोड़कर कहीं भी जा सकती हूं लेकिन मेरे कई वर्षों की मेहनत के बाद शुरू हुए काम अधूरे रह जाएंगे.”

अब उम्मीद की जा रही है कि ओपेरा के कामयाब होने के साथ मुख़्तार माई के प्रोजेक्टस के लिए आर्थिक मदद भी मिल सकेगी.

ओपेरा की निदेशक रेचल डिक्स्टाईन ने बताया कि मुख़्तार माई के बारे में तो शायद बहुत से लोग मीडिया के ही ज़रिए जानते हैं, लेकिन उनकी शख़्सियत के बारे में कम ही लोग जानते हैं.

रेचल कहती हैं, "इस ओपेरा के ज़रिए हमने मुख़्तार माई के व्यक्तितव को औऱ उनकी जद्दोजेहद के ज़रिए दूसरों की मदद करने के जज़्बे को भी उजागर करने की कोशिश की है.”

ओपेरा सीन
ओपेरा में खासकर दक्षिण एशियाई मूल के कलाकारों को शामिल किया गया.

इस ओपेरा के लिए ख़ासकर दक्षिण एशियाई मूल के कलाकारों को ही शामिल करने की कोशिश की गई. ओपेरा में मनु नारायण, थ्योडोर हन्सलोवे, और स्टीव गोकुल का भी अहम किरदार है.

इस ओपेरा के संचालक हैं स्यीवन ओसगुड. यह ओपेरा न्यूयॉर्क में करीब 10 दिनों तक चला और सैकड़ों लोगों ने इसको देखा.

शो के बाद बाहर आने वाली एक पाकिस्तानी मूल की अमरीकी महिला उरूस अहमद ने कहा, "मुझे तो बहुत अच्छा लगा. आम तौर पर यहां अमरीका में लोगों को इन सब वाक्यों के बारे में पता तो होता है लेकिन उन्हे विस्तार से नहीं मालूम होता कि आखिर मामला क्या है. इसलिए ऐसे ड्रामों से वह सारी तस्वीर साफ़ हो जाती है. और कई लोगों की आंखों में तो आंसू आए हुए थे.”

इस ओपेरा को बेथ मोरिहसन प्रोजेक्टस और हेयर नामक संस्थाओं ने निर्मित किया है. न्यूयॉर्क में प्रीमियर शो के बाद अब थंबप्रिंट ओपेरा भारत और पाकिस्तान समेत विश्व के कई देशों में भी दिखाने की तैयारी चल रही है.

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