'आप' की सियासत और 'भाग मुशर्रफ़ भाग'

  • 12 जनवरी 2014
आम आदमी पार्टी

बीते हफ्ते पाकिस्तान में जहां महंगाई से लेकर मुशर्रफ छाए रहे, वहीं भारतीय उर्दू मीडिया की नज़र आम आदमी पार्टी से जुड़ी सियासत और सैफई महोत्सव पर बनी रही.

दिल्ली से छपने वाले हिंदोस्तान एक्सप्रेस ने आम आदमी पार्टी के दफ्तर पर हिंदू रक्षा दल नाम के संगठन की तोड़फोड़ पर संपादकीय लिखा है- सस्ती शोहरत का आसान नुस्खा.

अख़बार कहता है कि गुमनाम लोग और गुमनाम पार्टियां इस ताक में रहती हैं कि किसी तरह उनका नाम और ओछी हरकतें मीडिया की सुर्खियों में आ जाएं.

हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ताओं ने भी इसी फॉर्मूले को अपनाया और कोशिश की कि कुछ शोहरत उन्हें भी मिल जाए और लोग उन्हें पहचानें.

सैफई पर सफ़ाई

अखिलेश यादव
सैफई महोत्सव को लेकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार पर फ़िज़ूलख़र्ची के आरोप लग रहे हैं.

रोज़नामा खबरें का संपादकीय है- सैफई पर सफ़ाई. अखबार के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार पर इसका दबाव बनाया जा रहा है कि राज्य सरकार सैफई में 300 करोड़ रुपए फूंक चुकी है और उसे मुज़फ़्फरनगर के दंगा पीड़ितों की बेबस ज़िंदगी की कोई फिक्र नहीं है.

अखबार के मुताबिक राज्य सरकार भले ही सफाई दे रही है लेकिन आने वाले आम चुनावों में जनता मुख्यमंत्री से ये तो पूछ ही सकती है कि हमारे वोटों से सत्ता हासिल करने के बाद हमें ही क्यों भूल गए.

वहीं हमारा समाज ने भ्रष्टाचार और रिश्वत से निपटने के लिए बनाई गई दिल्ली सरकार की हेल्पलाइन पर संपादकीय लिखा है. इस हेल्पलाइन का वादा अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते समय किया था.

अखबार का कहना है कि केजरीवाल सरकार को ऐसे कदम भी उठाने चाहिए जिनसे लोगों को रिश्वत देने का ख़्याल ही न आए, मसलन हर जगह स्टाफ़ बढ़ाया जाए, ताकि नंबर आने पर दफ्तर का टाइम न ख़त्म हो, अफ़सर और कर्मचारियों का वेतन बढ़ाया जाए ताकि वो अपनी ख़र्चा अच्छी तरह चला सकें.

इसके बावजूद भी अगर कोई रिश्वत लेता है तो उसे कड़ी से कड़ी सज़ा देना ज़रूरी और देशहित में है.

चौधरी असलम

रुख़ पाकिस्तान का करें तो कराची के पुलिस प्रमुख चौधरी असलम की तालिबान के हमले में मौत पर जंग अख़बार ने अपने संपादकीय में लिखा, "चरमपंथ के ख़िलाफ़ युद्ध में पुलिस अफ़सर चौधरी असलम उर्फ़ असलम ख़ान की शहादत ने उनकी ज़िंदगी और मौत दोनों को मिसाल बना दिया."

वहीं दैनिक एक्सप्रेस अख़बार ने अपने संपादकीय में चौधरी असलम को देश का हीरो क़रार दिया.

लापता लोगों के मामले पर नवा-ए-वक़्त लिखता है, "कोई संस्था क़ानून से ऊपर नहीं, फ़ौज़ को संविधान का पाबंद होना चाहिए." इस ख़बर पर रोज़नामा ख़बरें अख़बार की सुर्खी है, "सशस्त्र सेनाओं को संविधान का पाबंद होना चाहिए."

पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ चल रहे मुक़दमे के मामले पर अख़बार नवा-ए-वक़्त लिखता है, "मुशर्रफ़ को दिल की तकलीफ़ नहीं, 16 जनवरी तक अदालत में पेश हों."

भाग मुशर्रफ़ भाग

परवेज़ मुशर्रफ़
पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ अदालती मामलों में बुरी तरह घिर गए हैं.

वहीं इस मामले पर दैनिक ओसाफ़ ने दिलचस्प कार्टून बनाकर चुटकी ली है. कार्टून में बॉलीवुड फ़िल्म 'भाग मिल्खा भाग' की तर्ज़ पर मुशर्रफ़ अदालती मामलों के वज़न के साथ भागते दिखाए गए हैं और शीर्षक लिखा है 'भाग मुशर्रफ़ भाग'.

चरमपंथ के मुद्दे पर एक संपादकीय में एक्सप्रेस लिखता है, "पाकिस्तान में दहशतगर्दी और चरमपंथ को लेकर ताक़तें असमंजस पैदा करने की कोशिशें करती रहती हैं. यह सिलसिला लंबे अर्से से जारी है.

अख़बार कहता है, "आत्मघाती हमलों और चरमपंथ की अन्य वारदात में पाकिस्तानी सैनिक और नागरिक बड़ी तादाद में मारे जा चुके हैं. पाकिस्तान दुनिया का ऐसा अनूठा देश है जहाँ देश और नागरिकों के ख़िलाफ़ लड़ने वालों के साथ हमदर्दी दिखाई जाती है."

अपने संपादकीय में महंगी दवाओं का मुद्दा उठाते हुए जंग अख़बार ने लिखा है, "प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने दवाइयों की क़ीमत में 15 फ़ीसदी बढ़ोतरी रोक दी थी जिस पर देश भर में उनका शुक्रिया अदा किया गया था लेकिन फिर भी दवा कंपनियों ने दवाओं की क़ीमतों में बीस से 80 फ़ीसदी तक इज़ाफ़ा कर दिया है."

रोज़नामा वक़्त की एक ख़बर के मुताबिक पाकिस्तान पीपल्स पार्टी बिलावल भुट्टो को पंजाब में फ़रवरी में मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है. वहीं तालिबान के आत्मघाती हमले को नाक़ाम करते हुए अपनी जान गंवाने वाले 15 साल के स्कूली छात्र ऐतज़ाज़ हसन की सभी पाकिस्तानी उर्दू अख़बारों ने खुलकर तारीफ़ की है.

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