..और दस साल की बच्ची को पीट-पीट कर मार डाला

  • 11 जनवरी 2014
इराम

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में घरेलू नौकर के तौर पर काम करने वाली 10 साल की एक लड़की की हत्या के मामले ने देश में बच्चों के अधिकारों की स्थिति को उजागर किया है.

जिस घर में वह काम करती थी, उसमें रहने वाले लोगों ने उसे पीट पीट कर मारने की बात स्वीकार कर ली है.

मानवधिकार समूहों का कहना है कि पाकिस्तान में श्रम क़ानून देश में बच्चों के शोषण को नज़रंदाज़ करते हैं. पाकिस्तान में लगभग आधी जनसँख्या अठारह साल से कम उम्र की है.

बाल शोषण नज़रंदाज़ करने के कभी-कभी दुखद परिणाम भी होते हैं.

इसके सबूत पंजाब प्रांत के एक छोटे से गाँव में मिलते हैं. यहाँ एक जर्जर घर में मातम की आवाज़ें गूंजती हैं.

लेकिन अब चीज़ें अलग हैं. यहाँ एक छोटी बच्ची की मृत्यु का शोक मनाया जा रहा है.

इरम रमज़ान को लाहौर में एक मध्यवर्गीय परिवार के घर में खाना बनाने के लिए भेजा गया था ताकि उसके परिवार को भर पेट खाना मिल सके.

उसकी दो और बहनें अलग- अलग घरों में घरलू कामगार के तौर पर काम करती हैं.

प्रताड़ना

लेकिन इरम वापस आई तो सफ़ेद कफ़न में लिपटी हुई. यह बिल्कुल साफ़ था कि जिस घर में वो गई थी वहाँ के लोगों ने उसे इतना प्रताड़ित किया कि वो ज़िंदा न रह पाई.

थ्रेशर में अपना हाथ गवाँ चुकीं इरम की माँ ज़ुबैदा बीबी को अपने पति से आर्थिक सहायता नहीं मिलती है.

बच्चे
गैर सरकारी संगठनों का कहना है कि उन्हें हर साल इरम जैसे लगभग 20 मामले मिलते हैं

ज़ुबैदा कहतीं हैं कि उनके पास अपनी बेटियों को घरेलू कामगार के तौर पर भेजने से सिवाय और कुछ अधिक चारा नहीं था.

उन्होंने सोचा था कि सड़क पर रहने से ज़्यादा महफूज़ उनकी बेटियां आर्थिक रूप से बेहतर घरों में रहेंगी. लेकिन वह ग़लत थीं.

उन्हें अपनी सबसे छोटी बेटी को ज़मीन में दफ़नाने की पीड़ा से गुज़रना पड़ रहा है और अब उन्हें नहीं पता है कि वह अपनी ग्लानि को कहाँ दफनाएं.

ज़ुबैदा को किसी बात से तसल्ली नहीं मिल रही. वह कहती हैं," शायद इसकी बजाय हमें कूड़ा बीन घर चलाना चाहिए था. मुझे क्या पता था मैं ऐसे ज़ालिमों के घर अपनी बेटी को भेज रही हूँ."

पिछले साल इरम को लाहौर में रहने वाले एक दूर के रिश्तेदार ने फ़ोन करके तुरंत अस्पताल आने को कहा था.

'एक दुर्घटना'

डॉक्टरों ने बताया था कि उनकी बेटी की मौके पर ही मौत हो गई थी. इरम की कलाइयों और पैरों पर रस्सी की रगड़ से छिलने और शरीर पर मार के निशान थे.

मारने के बाद महमूद परिवार ही उसे अस्पताल लेकर आया था. पुलिस ने तुरंत उन्हें गिरफ्तार कर लिया.

इरम के हाथ पैर रस्सी से बाँध कर उसे लोहे की छड़ से धुना गया था. बाद में वह लोहे की छड़ और रस्सियाँ महमूद परिवार के घर से बरामद हुए.

रमज़ान
नसीरा महमूद ने इरम को बार बार छड़ से पीटने की बात स्वीकारी है.

इस घर में रहने वाली नसीरा महमूद ने इरम को बार बार छड़ से पीटने की बात स्वीकारी. रमज़ान को मारे जाते वक्त नसीरा का 16 साल का बेटा खड़ा-खड़ा देखता रहा.

फिलहाल जेल की सलाखों के पीछे मौजूद नसीरा महमूद चाय के साथ बिस्कुट खा रहीं थीं, जब उनसे पूछा गया कि रमज़ान की मौत कैसे हुई?

उन्होंने लगभग लापरवाही से कहा कि यह सब केवल एक दुर्घटना थी और किसी ने उम्मीद नहीं की थी कि वह मर जाएगी.

उन्होंने कहा, "उसने तीन बार मेरे पैसे चुराए थे. मुझे ग़ुस्सा आ गया. बस इतनी सी बात थी. बाद में उसे नींद आ रही थी तो मैंने उसे रात का खाना बनाने के लिए ऊपर की तरफ़ रस्सी से बाँध दिया ताकि वह झपकी ना ले सके.

पाकिस्तान में 'सोसाइटी फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ द राइट्स ऑफ चाइल्ड' का कहना है कि उन्हें हर साल इरम जैसे लगभग 20 मामले मिलते हैं.

यह केवल बच्चों के मरने के मामलों के आंकड़े हैं. बहुत से मामले केवल प्रताड़ना के होते हैं, जिनमें से कई मामले सामने भी नहीं आते.

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