चीनः ज़िंदगी बचाने वाले को देनी पड़ी जान

  • 10 जनवरी 2014
ऑनलाइन

वह एक नेक इंसान था. उसने राह चलते एक बुज़ुर्ग को जिंदगी दी. लेकिन, बुज़ुर्ग के परिवार ने उसे ही दोषी करार दे दिया और उससे मुआवज़े की मांग करने लगे. इससे परेशान होकर उसने अपनी ज़िंदगी ख़त्म कर ली.

चीन के 46 वर्षीय वू वेइक्विंग की पत्नी का दावा है कि वू ने परेशान होकर आत्महत्या कर ली.

इस घटना ने चीन के लोगों को एक बार आत्मचिंतन करने पर मजबूर कर दिया है कि चीन का समाज किस दिशा में जा रहा है.

वू की पत्नी ने समाचार पत्र सदर्न मेट्रोपोलिस डेली से कहा कि उनके पति नववर्ष की पूर्व संध्या पर मोटरसाइकिल चला रहे थे तभी उन्होंने एक वृद्ध व्यक्ति को गिरा हुआ देखा.

उन्होंने वृद्ध को अस्पताल पहुंचाया और उनके इलाज का ख़र्च भी उठाया. लेकिन इसके बाद वृद्ध व्यक्ति के परिवार ने उनसे मुआवज़े की मांग की.

जबकि सच्चाई यह थी कि वू ने वृद्ध व्यक्ति को धक्का नहीं मारा था.

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी ने भी कहा है कि वू के पास एक संदिग्ध फोन कॉल आया, जिसमें एक पुलिसकर्मी ने उनसे अच्छी-खासी रकम की मांग की. पैसा नहीं होने और भारी दबाव झेलने के कारण वू ने आत्महत्या कर ली.

हालांकि वृद्ध व्यक्ति के परिवार ने इन दावों को खारिज कर दिया है.

ऑनलाइन मीडिया में चर्चा

वृद्ध व्यक्ति की बड़ी बेटी ने ग्वांझू डेल समाचार पत्र को बताया, ''यदि उन्होंने मेरे पिता को टक्कर नहीं मारी, तो क्यों उन्होंने इतनी दयालुता दिखाई. उन्हें अस्पताल पहुंचाया और इलाज का ख़र्च भी उठाया.''

सच्चाई जो भी हो लेकिन इस घटना की चर्चा चीन के ऑनलाइन मीडिया में ख़ूब हो रही है.

एक माइक्रो ब्लॉगर ने लिखा है, ''हमारे समाज में क्या चल रहा है, कैसे कोई एक अच्छा इंसान बनेगा?''

एक अन्य माइक्रो ब्लॉगर ने लिखा कि यह निःशुल्क इलाज न होने का परिणाम है. जिसने सहायता की वही परेशानी में पड़ गया.

हाल के दिनों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें घायल हुए व्यक्ति ने सहायता करने वाले से ही पैसे ऐंठ लिए.

कई चीनी लोगों का मानना है कि बढ़ते भौतिकवाद के कारण संवेदनाएँ खत्म हो रही है और देश में नैतिकता के लिए कोई जगह नहीं है.

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