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देशद्रोह के मुक़दमे की सुनवाई में नहीं पहुँचे मुशर्रफ़

 बुधवार, 1 जनवरी, 2014 को 15:13 IST तक के समाचार
परवेज़ मुशर्रफ़

पूर्व सैन्य प्रमुख परवेज़ मुशर्रफ़ का कहना है कि मुक़दमा राजनीति से प्रेरित है.

पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ उनके ख़िलाफ़ देशद्रोह के आरोप में चल रहे मुक़दमे की सुनवाई में नहीं पहुँचे.

उनके वकीलों ने अदालत को बताया कि उनको पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी गई थी.

यह अभियोग उन पर 2007 में संविधान निलंबित करने और आपातकाल लगाने के मामले में चलाया जा रहा है.

मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ मुक़दमा पिछले हफ़्ते शुरू होने वाला था, लेकिन अदालत के उनके रास्ते में बम मिलने की ख़बरों के बाद मुक़दमा टाल दिया गया था.

मुशर्रफ़ सभी आरोपों से इनकार करते हैं और कहते हैं कि सारे अभियोग राजनीति से प्रेरित हैं.

70 साल के मुशर्रफ़ पहले सैन्य शासक हैं, जिनको क्लिक करें देशद्रोह के अभियोग का सामना करना पड़ेगा. दोष साबित होने पर उनको फांसी या उम्रक़ैद की सज़ा हो सकती है.

उनके ऊपर हत्या और न्यायपालिका पर रोक लगाने की कोशिश के भी आरोप हैं.

बुधवार को न्यायालय में सुनवाई के दौरान उनके वकील अहमद रज़ा कसूरी ने बताया कि इस्लामाबाद के बाहरी इलाक़े में स्थित मुशर्रफ़ के घर के पास और विस्फोटक मिले थे.

उन्होंने कहा, "सुरक्षा ख़तरों के मद्देनज़र मुशर्रफ़ अदालत के सामने पेश होने में असमर्थ हैं."

पक्षपातपूर्ण नज़रिया

"सुरक्षा ख़तरों के मद्देनज़र मुशर्रफ़ अदालत के सामने पेश होने में असमर्थ हैं."

अहमद रज़ा कसूरी, परवेज़ मुशर्रफ़ के वकील

अदालत को बताया गया कि लाहौर में कुछ व्यक्तियों ने उनके ऊपर हमला किया था, वह बग़ैर किसी नुकसान के वहां से बच निकलने में कामयाब हो गए थे मगर पुलिस ने उनकी शिकायत को गंभीरता से लेने से मना कर दिया था.

बचाव पक्ष का कहना है कि पाकिस्तान में उनके ख़िलाफ़ निष्पक्ष मुक़दमा नहीं हो सकता. बचाव पक्ष के वकील अनवर मंसूर ने कहा कि वर्तमान प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ उनके 'मुवक्किल के ख़िलाफ़ पक्षपातपूर्ण नज़रिया' रखते हैं.

परवेज़ मुशर्रफ़ ने 1999 में एक सैन्य तख्तापलट से सत्ता हासिल की थी. वह 2008 तक देश के राष्ट्रपति रहे. इसके बाद एक लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई सरकार ने उन्हें इस्तीफ़ा देने पर मजबूर कर दिया. वह स्व-घोषित निर्वासन में देश छोड़कर लंदन और दुबई में रहे.

मार्च 2013 में अपनी क्लिक करें पाकिस्तान वापसी पर मुशर्रफ़ को उम्मीद थी कि चुनाव में उनकी पार्टी को बढ़त हासिल होगी लेकिन उनको चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित कर दिया गया. इसके बाद वह पाकिस्तान में अपनी सत्ता के दौरान लगे तमाम आरोपों से घिर गए.

अदालत के रास्ते में मिला बम

परवेज़ मुशर्रफ़ के अदालत जाते समय रास्ते में बम मिले थे.

संवाददाताओं के मुताबिक़ पाकिस्तान के अधिकांश लोगों का मानना है कि प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ देश की समस्याओं से लोगों का ध्यान हटाने के लिए मुक़दमे का इस्तेमाल कर रहे हैं. देश की अर्थव्यवस्था ख़राब दौर से गुजर रही है, सांप्रदायिक और अन्य हमले लगातार जारी है. मुशर्रफ़ ने 1999 में नवाज शरीफ की सरकार को सत्ता से बेदख़ल कर दिया था.

24 दिसंबर को मुशर्रफ़ के वकीलों ने कहा कि अदालत के उनके क्लिक करें रास्ते में बम पाया गया था. इसलिए वह सुरक्षा ख़तरों के कारण अदालत में पेश नहीं हो सकते.

इसके बाद न्यायालय ने मुशर्रफ़ को ख़ुद पेश होने से छूट दे दी थी.

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