पाकिस्तान: सड़कछाप दांत के डॉक्टरों की बहार

  • 4 जनवरी 2014

पाकिस्तान में सड़क किनारे पटरियों पर 13 हज़ार से अधिक दंत चिकित्सक ग़ैरक़ानूनी ढंग से अपना काम करते देखे जा सकते हैं, जो स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च उठाने में असमर्थ लोगों को अपनी सेवाएं मुहैया कराते हैं.

हाल की रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल 78 फ़ीसदी पाकिस्तानी ऐसे हैं, जो मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं जबकि ज़्यादातर पाकिस्तानी निजी स्वास्थ्य सेवाएं लेने के बारे में सोच भी नहीं सकते.

ऐसे ही दंत चिकित्सकों में से एक नूरुद्दीन एक पुराने रेलवे ट्रैक और गंदी लाइनों पर बने पुल पर बैठते हैं.

उनके साथ एक गंदी चादर पर जंग खाई एक ड्रिल मशीन, बिना लेबल लगी बोतलें और कुछ दांत पंक्तियों में रखे नज़र आते हैं.

यही पिछले 20 सालों से नूरुद्दीन का दंत चिकित्सालय है. जहां वह दांतों की हर समस्या का तत्काल इलाज मुहैया कराते हैं.

यह बात दीगर है कि वह जो कुछ करते हैं, उससे संबंधित नूरुद्दीन के पास न तो कोई प्रमाणपत्र है और न कोई डिग्री. इसलिए उनके मरीज़ भी कोई शिकायत नहीं कर सकते.

मेडिकल जर्नल 'द लैंसेट' ने हाल की एक रिपोर्ट में इस तथ्य को उजागर किया है कि पाकिस्तान में किसी तरह की कोई स्वास्थ्य बीमा प्रणाली नहीं है.

यही वजह है कि बहुत से पाकिस्तानियों को स्वास्थ्य सेवाएं लेने के लिए ख़ुद ही ख़र्च करना पड़ता है.

नीति का अभाव

सड़क छाप दंत चिकित्सक
पाकिस्तान में सड़क छाप डॉक्टरों का धंधा बड़ी तेज़ी से फलफूल रहा है.

पाकिस्तान के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का एक फ़ीसदी से भी कम स्वास्थ क्षेत्र में ख़र्च होता है, जो सरकारी बजट के चार फ़ीसदी से भी कम के बराबर है.

जनस्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में कोई ठोस नीति न होने के कारण ग़रीब तबके को बहुत मामूली चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर भी सरकार को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें जीवनयापन के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है. बढ़ती महंगाई के बीच दांतों की देखभाल इन लोगों के लिए एक ऐसी विलासिता है, जिसे वह वहन नहीं कर सकते.

यही नतीजा है कि सड़क पर मुहैया कराई जाने वाली चिकित्सीय सेवाओं का धंधा बड़ी तेज़ी से फल-फूल रहा है.

दूसरी ओर पाकिस्तान डेंटल एसोसिएशन का कहना है कि पटरियों पर बैठने वाले दंत चिकित्सक अधिकतर कस्बों और शहरों में संकरी गलियों में मरीज़ों का ऑपरेशन करते हैं.

इस संबंध में अधिकारियों ने ग़ैरक़ानूनी सड़क छाप चिकित्सकों पर कई बार कार्रवाई की है.

इसके चलते वे अपना चलता-फिरता मेडिकल क्लीनिक समेट लेते हैं और कहीं और काम शुरू कर देते हैं. बहुत सी झुग्गी-झोंपड़ियां हैं, जहां उन्हें ग्राहक मिल जाते हैं.

नूरुद्दीन कहते हैं, "यदि आप पैसे वाले और फैशनेबल हैं, तो किसी विदेशी दंत चिकित्सक के पास जाइए, मैं ग़रीबों का डॉक्टर हूं और मैं जैसा हूं वैसा ही हूं."

इस बीच, पाकिस्तान में ग़रीबों और अमीरों के बीच का अंतर इस्लामाबाद स्थित डॉक्टर अनीस-उर-रहमान की अत्याधुनिक डेंटल क्लीनिक में देखा जा सकता है.

क्लीनिक के अंदर की दीवारें कलाकारी से सुसज्जित हैं. यहां साथ ही क्लासिकल संगीत भी सुना जा सकता है और इसमें दंत चिकित्सक की ड्रिल की तेज़ आवाज सुनाई नहीं देती.

मंहगा इलाज

सड़क छाप दंत चिकित्सक
जो ख़र्चा उठा सकते हैं उनके लिए बेहतरीन सेवाएं भी उपलब्ध हैं.

डॉक्टर रहमान का यह क्लीनिक बेहतरीन इलाज मुहैया कराने का दावा करता है, बेशक उन लोगों को, जो इसका ख़र्च वहन कर सकते.

एक अकेले दांत की पॉलिश का ख़र्च 21,000 रुपए से अधिक आ सकता है, जबकि पाकिस्तान की एक तिहाई से अधिक जनसंख्या ग़रीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करती है.

वहीं हाथों में गुची जैसे महंगे ब्रांड के बैग और जूते पहने इंतजार कर रहे मरीजों से खचाखच भरे कमरों से लगता है कि पाकिस्तान के अमीर और मशहूर लोग एक ख़ूबसूरत मुस्कराहट के लिए कितना भी पैसा ख़र्च कर सकते हैं.

डॉ. रहमान का कहना है कि "जो लोग ख़र्च उठा सकते हैं उन्हें हमारा इलाज उपलब्ध है क्योंकि हम उनकी ख़ूबसूरत दिखने की ज़रूरत को पूरा करते हैं और हर कोई पूर्ण दिखना चाहता है."

पेशेवर दंत चिकित्सकों का दावा है कि दंत चिकित्सा का ख़र्चा बढ़ने की वजह आयातित उपकरण हैं. उनका कहना है कि फ़ीस बढ़ाने की ज़रूरत है.

पाकिस्तान में दंत चिकित्सकों की एक मामूली सी कुर्सी की क़ीमत एक लग्ज़री कार की क़ीमत के बराबर है. उधर बहुत सी लग्ज़री कारें हैं, जो डॉ. रहमान के क्लीनिक के बाहर पार्किंग में खड़ी हुई हैं.

दूसरी ओर, 60 वर्षीय अहमद के लिए सड़क छाप दंत चिकित्सक ही एकमात्र विकल्प हैं.

गंभीर संक्रमण

सड़क छाप दंत चिकित्सक
सड़क छाप दंत चिकित्सक अपने मरीज़ों को कई तरह के विकल्प सुझाते हैं.

वह अपने छह सदस्यीय परिवार का पेट पालने के लिए सब्जियां बेचते हैं. अहमद मधुमेह से पीड़ित हैं और उनके दांत सड़ चुके हैं. अहमद नए दांत लगवाना चाहते हैं.

अहमद कहते हैं कि हो सकता है कि सरकारी अस्पतालों में उनका मुफ़्त इलाज हो जाए, लेकिन उन जैसे लोगों के लिए वहां तक पहुंच ही मुश्किल है.

मैंने देखा सड़क पर काम करने वाले एक दंत चिकित्सक अहमद का नया दांत लगाते समय लाल रंग की दवा का इस्तेमाल कर रहा है, जो छिटककर कभी उसके हाथ, उसके औज़ार या फिर उसके मरीज़ के ऊपर आ गिरती है.

चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि दर्जनों मरीजों पर गंदे उपकरण इस्तेमाल करने से हैपेटाइटिस और गंभीर संक्रमण हो सकता है.

लेकिन यहां जो लोग भी आते हैं उन्हें भयंकर दर्द हो रहा होता है और वे केवल ख़र्चा उठा सकने योग्य इलाज चाहते हैं.

अपना नया दांत दिखाते हुए अहमद बताते हैं, "मैं एक चिकित्सक के पास गया और उसने मुझसे तीन हज़ार रुपए मांगे जबकि यह केवल 250 रुपए ही मांग रहा है. और जब मैंने कहा कि मैं इतने पैसे नहीं दे सकता हूं तो वह 200 रुपये में ही राज़ी हो गया."

मुस्कराहट के साथ वह बताते हैं कि यह अलग तरह की सेवा है.

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