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'मुसलमान नहीं तो पाकिस्तान का पीएम नहीं'

 रविवार, 29 दिसंबर, 2013 को 13:09 IST तक के समाचार
अरविंद केजरीवाल

केजरीवाल ने संभाली दिल्ली के मुख्यमंत्री की गद्दी

बीते हफ़्ते पाकिस्तान के उर्दू अख़बारों में जहां पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की बरसी और उससे जुड़ी राजनीतिक बयानबाज़ी सुर्ख़ियों में रही, वहीं भारत में दंगा पीड़ितों पर समाजवादी पार्टी मुखिया मुलायम सिंह का विवादास्पद बयान और दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने पर काफ़ी कुछ लिखा गया है.

'हमारा समाज' अख़बार ने समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के इस बयान को संपादकीय का विषय बनाया है जिसमें उन्होंने कहा कि मुज़फ़्फ़रनगर और शामली में बने शिविरों में दंगा पीड़ित नहीं बल्कि भाजपा और कांग्रेस के समर्थक रह रहे हैं.

अख़बार लिखता है कि दंगों की आग तो बुझ कर ठंडी हो गई है, लेकिन ऐसा लगता है कि राजनेताओं के विवादास्पद बयानों का सिलसिले थमने का नाम नहीं ले रहा है.

अख़बार के अनुसार मुलायम सिंह के बयान से न सिर्फ़ दंगा पीड़ितों को ठेस लगी है बल्कि भारत के सभी मुसलमानों, उनके संगठनों और धर्म गुरुओं ने भी इस पर उग्र प्रतिक्रिया दी है.

अख़बार ने कहा है कि ये बड़ी विडंबना है कि भारत में दंगों के बाद मुसलमानों के ज़ख़्मों पर मरहम लगाने की बजाय उन्हें ही कठघरे में खड़ा कर दिया जाता है.

'अफ़सरशाही बेचैन'

गुजरात दंगों में मारे गए कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफ़री की पत्नी ज़किया जाफ़री की याचिका खारिज होने के बाद 'राष्ट्रीय सहारा' का संपादकीय है 'इंसाफ हासिल करने की मुश्किलें.'

"गुजरात दंगे और इससे जुड़े मामलों को इस क़दर पेचीदा बना दिया गया है कि दंगों की साज़िश और इसके असल अपराधियों की निशानदेही आसान नहीं रह गई है."

राष्ट्रीय सहारा, उर्दू दैनिक

अख़बार कहता है कि गुजरात दंगे और इससे जुड़े मामलों को इस क़दर पेचीदा बना दिया गया है कि दंगों की साज़िश और इसके असल अपराधियों की निशानदेही आसान नहीं रह गई है.

अख़बार के संपादकीय के अनुसार इंसाफ़ की ख़ातिर सिर्फ अदालतों पर भरोसा करना ही काफ़ी नहीं है बल्कि उस व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करना होगा जो अदालत को सही और जल्द फ़ैसलों तक पहुंचे में सहायक हो.

दैनिक 'हिंदोस्तान एक्सप्रेस' ने लिखा है कि दिल्ली में सरकार बदलने के साथ ही अफ़सरशाही में बैचेनी है.

अख़बार लिखता है कि भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अभियान और चुनावी मुहिम के दौरान अपनी धाक जमाने वाली आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल का मुख्यमंत्री के रूप में प्रदर्शऩ कैसा होगा, और काम पूरा न होने पर उनका रवैया किस तरह का होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.

अख़बार के मुताबिक सचिवालय में लंबे समय से मलाईदार पदों पर बैठे कई अफ़सरों के चेहरों की हवाइयाँ उड़ रही है. ये लोग नई व्यवस्था में खुद को ढालने की पूरी कोशिश कर रहे हैं.

'सकारात्मक क़दम'

रुख़ पाकिस्तान के अख़बारों का करें तो कराची से छपने वाले 'जंग' ने बीते दिनों भारत और पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन की 14 साल बाद हुई बैठक को सकारात्मक कदम बताया है.

पाकिस्तान

पाकिस्तान मुस्लिम बहुल आबादी वाला देश है

अख़बार लिखता है कि इस साल पाकिस्तान ने जहां भारत पर 416 बार संघर्ष विराम के उल्लंघन का आरोप लगाया वहीं भारत का दावा है कि पाकिस्तान ने 150 बार संघर्षविराम का उल्लंघन किया. इन आरोप-प्रत्यारोपों के कारण दोनों देशों के बीच वो बातचीत शुरू नहीं हो पा रही हैं जो मुंबई हमलों के बाद से लटकी पड़ी है.

ऐसे में, दोनों तरफ से संघर्षविराम के उल्लंघन की शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था को बेहतर बनाने, हॉट लाइन से जुड़ी व्यवस्था को और प्रभावी बनाना और गलती से सीमा पार कर जाने वालों की वापसी सुनिश्चित करने के उपायों पर सहमति स्वागतयोग्य है.

दैनिक 'खबरें' का संपादकीय है कि बिलावल की ख्वाहिश. अख़बार के मुताबिक पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो ज़रदारी का कहना है कि देश का प्रधानमंत्री एक ईसाई होना चाहिए.

अख़बार की राय है कि बिलावल पाकिस्तान की एक बड़ी पार्टी के प्रमुख हैं इसलिए उन्हें ऐसी कोई बात नहीं बोलनी चाहिए जो पाकिस्तान के संविधान के मुताबिक न हो. दरअसल पाकिस्तान के संविधान में कहा गया है कि देश में कोई मुसलमान ही प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बन सकता है.

कुछ विश्लेषकों की राय है कि शायद बिलावल संविधान में बदलाव की इच्छा जाहिर कर रहे हैं. लेकिन अखबार कहता है कि 95 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम आबादी वाले पाकिस्तान में बिलवाल को इस तरह के विवादास्पद बयान देने से बचना चाहिए.

'बच्चे हैं बिलावल'

दैनिक 'वक्त' ने अपने पहले पन्ने पर बिलावल भुट्टो ज़रदारी की बड़ी सी तस्वीर छापी है जिसमें वो अपनी मां बेनज़ीर भुट्टो की छठी बरसी पर हाथ उठा कर विशाल जनसभा को संबोधित कर रहे हैं. बिलावल ने ऐलान किया कि अगले आम चुनाव से पहले बेनज़ीर के तीनों बच्चे राजनीति में सक्रिय हो जाएंगे.

बिलावल भुट्टो ज़रदारी

बिलावल ने साधा विरोधियों पर निशाना

अख़बार के अनुसार न सिर्फ उन्होंने तालिबान की कड़ी आलोचना की बल्कि पाकिस्तान तहरीके इंसाफ़ के मुखिया इमरान ख़ान को बुज़दिल ख़ान बताते हुए कहा कि वो तालिबान नेता हकीमुल्लाह महसूद के ग़म में नेटो की सप्लाई लाइन बंद कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि चार लोटों में पानी डाल कर सूनामी नहीं लाई जा सकती. अख़बार में तहरीके इंसाफ़ पार्टी की ये प्रतिक्रिया भी है कि बिलावल अभी बच्चे हैं और उन्हें तमीज़ नहीं सिखाई गई है.

'औसाफ' ने पाकिस्तान चुनाव आयोग की तरफ सांसदों की संपत्ति के आंकड़ों पर संपादकीय लिखा है जिसके अनुसार प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ लगभग डेढ़ अरब रुपये की संपत्ति के साथ सबसे अमीर सांसद हैं तो कई सांसदों की संपत्ति न होने के बराबर है.

अख़बार के अनुसार नवाज़ शरीफ़ ने कम से कम अपनी संपत्ति सार्वजनिक तो की जिन सासंदों ने बेहद कम संपत्ति दिखाई है, ज़ाहिर वो बहुत कुछ छिपा रहे हैं और इससे उनकी कथनी और करनी का अंतर साफ़ होता है.

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