वो दुकान जहां प्रोफ़ेसर और संगीतकार काम करते हैं

  • 29 दिसंबर 2013
क्रिस एजी
क्रिस एजी न्यूयॉर्क के सिटी विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र पढ़ाते हैं

न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन में एक किराने की दुकान में हर रोज़ की तरह सब कुछ सामान्य है. आम दिनों की तरह ही लोग यहां अपने रोजमर्रे की ज़रूरत के सामान खरीद रहे हैं. लेकिन इसके बेसमेंट और कार्यालय में ऐसा कुछ विशेष है जो आपको चकित कर सकता है.

खाद्य पदार्थों की आपूर्ति का काम कर रहे क्रिस एजी अपनी निःशुल्क सेवा दे रहे हैं. असल में वो न्यूयॉर्क की सिटी यूनिवर्सिटी में राजनीति शास्त्र पढ़ाते हैं और खाली समय में यहां काम करते हैं.

क्रिस पार्क स्लोप फूड को-ऑपरेटिव के उन 16,000 सदस्यों में से एक हैं जो इस स्टोर में स्वयंसेवक हैं.

पार्क स्लोप अमरीका के उन चंद स्टोर में शामिल है जहां सदस्यों के लिए श्रमदान करना ज़रूरी होता है.

सस्ते उत्पाद

क्रिस स्वीकार करते हैं कि कुछ लोगों को इस बात पर विश्वास नहीं होगा कि सप्ताहांत पर वो यहां काम भी करते हैं और खरीदारी भी, क्योंकि यहां मिलने वाली खाने-पीने की चीज़ों की गुणवत्ता अच्छी होती है और इनकी क़ीमत भी कम होती है.

क्रिस कहते हैं, ''सबसे बेहतरीन उत्पादों को चुनने के लिए हमने 80 लोगों को काम पर लगाया है, ताकि जब आप यहां से खरीदारी करें तो आपको महसूस हो कि आप प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्द्धक खाद्य पदार्थ ले कर जा रहे हैं.''

वो कहते हैं, ''मैं यहां इसलिए काम करता हूं क्योंकि यहां मुनाफे का हिस्सा नहीं लिया जाता है, जो किन्हीं अज्ञात लोगों के समूह को जाए.''

क्रिस एगी आगे कहते हैं, ''हमें यहां एक-तिहाई रकम की बचत होती है. यहां कोई मुनाफा नहीं रखा जाता है, क्योंकि यह एक को-ऑपरेटिव है.''

वो बताते हैं, ''लोग मुझ से पूछते हैं, 'आप क्या कर रहे थे?' और मैं कहता हूं 'टमाटर रख रहा था.' लेकिन यह मेरे लिए एक मस्ती करने जैसा है और मुझे इस पर गर्व है.''

'दुनिया बदली बदली सी है'

एन हर्पेल बताती हैं कि इस स्टोर में बस ड्राइवर से लेकर शेयर मार्केट में काम करने वाले लोग सदस्य हैं.

को-ऑपरेटिव के सभी सदस्यों को हर चार हफ़्ते में पौने तीन घंटे काम करना पड़ता है. हरेक को यहां सामान की गिनती सुनिश्चित करने से लेकर ऊपरी माले पर स्थित कार्यालय में काम में हाथ बंटाना पड़ता है.

जब भी आप इस स्टोर में आते हैं, प्रवेश द्वार पर मौजूद कर्मी आपके कार्ड का स्कैन करके यह सुनिश्चित करते हैं कि आप अपना श्रमदान कर रहे हैं कि नहीं.

को-ऑपरेटिव के संयोजकों में से एक एन हर्पेल कहती हैं कि जब इसकी स्थापना हुई थी उसी समय सदस्यों के श्रमदान की नीति तय की गई.

वो बताती हैं, ''इस स्टोर को शुरू हुए इस साल 40 वर्ष होने को हैं. उस समय यह तय किया गया था कि एक साथ काम करने की नीति इसकी बुनियाद है.''

वो कहती हैं कि 1970 के दशक में पार्क स्लोप अकेला को-ऑपरेटिव स्टोर नहीं था. आज यह सबसे अलग है क्योंकि बाकी मूल आदर्श से भटक चुके हैं

एन हर्पेल कहती हैं, ''हमें वाकई यह नहीं लगता कि हम बदल चुके हैं बल्कि लगता है कि हमारे इर्द-गिर्द की दुनिया बदल गई है.''

स्वाभाविक विकास

नेशनल को-ऑपरेटिव ग्रोसर्स एसोसिएशन (एनसीजीए) के अनुसार, सदस्यों द्वारा संचालित ऐसे 170 स्टोर हैं लेकिन किसी में भी सदस्यों के लिए श्रमदान अनिवार्य नहीं है.

हालांकि पार्क स्लोप एनसीजीए का सदस्य नहीं है.

को-ऑपरेटिव स्टोर के संचालन को बेहतर बनाने में सहयोग करने वाली फर्म को-ऑपरेटिव वे के परामर्शदाता एडम श्वार्ट्ज कहते हैं कि अन्य को-ऑपरेटिव स्टोर में अनिवार्य श्रमदान की नीति को छोड़ दिए जाने के कई कारण हैं.

वे कहते हैं, ''जैसे-जैसे ब्रिक्री में इज़ाफा हुआ ऐसे श्रमदान से वास्तविक ज़रूरत को पूरा कर पाना मुश्किल होता गया. बाद में वे प्रशिक्षित स्टाफ रखने में सक्षम थे.''

इसके अलावा पारिश्रमिक पाने वाला स्टाफ संगठन को पेशेवर बनाने में भी योगदान करते हैं.

स्वास्थ्यवर्द्धक

शॉन आंसगार्ड, संगीतकार
संगीतकार शॉन आंसगार्ड के लिए काम करने के दौरान लोगों से दोस्ती करना एक बेहतरीन अनुभव है.

संगीतकार शॉन ऑन्सगार्ड पार्क स्लोप स्टोर के छह सालों से सदस्य हैं और को-ऑपरेटिव के बुलेटिन में खाद्य पदार्थों की सुरक्षा के बारे में लिखते हैं.

वो कहते हैं कि सामुदायिक भावना को श्रम के मार्फत विकसित किया जा सकता है.

शॉन ऑन्सगार्ड बताते हैं, "अलमारी में सामान रखने से लेकर ट्रक से सामान उतारने और लोगों से बातचीत करने तक एक किस्म की मस्ती का अहसास कराता है. आप को-ऑपरेटिव में आते हैं तो परिचित लोग भी टकरा जाते हैं और अनजान लोगों से मुलाकात भी दोस्ती में बदल जाती है."

वे कहते हैं, ''यहां काम करते हुए लोगों के साथ जो दोस्ताना रिश्ता बना है वह वाकई बहुत अच्छा लगता है. यह वास्तविक रूप में एक सामुदायिक विकास और दोस्ती बनाने के एहसास जैसा है.''

क्रिस एजी कहते हैं, "को-ऑपरेटिव में काम करना स्वास्थ्य और बचत के लिहाज से तो फायदेमंद है ही समाज में घुलने-मिलने में भी यह मदद करता है."

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