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क्या सच में दुनिया में वाइन की कमी हो गई है?

 शनिवार, 28 दिसंबर, 2013 को 04:41 IST तक के समाचार
वाइन की बोतलें

दुनिया भर की मीडिया में हाल ही में ऐसी ख़बरें आई थीं कि वाइन की मांग उसकी आपूर्ति से अधिक हो गई है. ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक़ दावा किया गया कि 2012 में 30 करोड़ पेटियों की कमी आई. आंकड़ों के मुताबिक़ दुनिया वाइन की गंभीर कमी का सामना कर रही थी.

ये क्लिक करें भयावह आंकड़े यह बता रहे हैं कि एक तरफ़ जहाँ उत्पादन घट रहा है, वहीं दूसरी तरफ़ खपत लगातार बढ़ रही हैं. इसका मतलब यह हुआ कि दुनिया में पर्याप्त वाइन नहीं है.

ये सभी ख़बरें निवेश बैंक मॉर्गन स्टैनली के ऑस्ट्रेलियाई शोध विभाग की ओर से किए गए एक अध्ययन पर आधारित थीं.

आंकड़ों की बाज़ीगरी

लेकिन समाचार एजेंसी रॉयटर्स फ़िनांस के ब्लॉगर फ़ेलिक्स सालमन को ये आंकड़े ज़रा संदिग्ध लगे ख़ासकर तब जब इस रिपोर्ट में ऑस्ट्रेलिया की एक क्लिक करें वाइन कंपनी को बढ़ावा दिया जा रहा था.

वह कहते हैं, ''आप एक निवेश बैंक में क्या करते हैं- आप एक विचार प्रस्तुत करते हैं और उसके पक्ष में मज़बूती से तर्क देते हैं. इसका आशय यह है कि आप एक ख़बर बनाते हैं और अगर आप एक बड़ी ख़बर बना देते हैं, जैसे 'दुनिया में वाइन की किल्लत', तो आप मीडिया में छाने जा रहे हैं.''

"अगर आप स्पेन या फ्रांस जाएं तो पाएंगे कि बहुत से अंगूर के खेत अपनी लागत से भी कम कीमत पर बिक रहे हैं, यह इस बात का अच्छा उदाहरण है कि दुनिया में वाइन की कमी नहीं है"

फेलिक्स सालमन, ब्लॉगर, रॉयटर्स फ़िनांस

यह रिपोर्ट फ्रांस की संस्था ओआईवी के आंकड़ों पर आधारित थी. यह क्लिक करें वाइन बनाने वाले 45 देशों के आधार पर साल में तीन बार वाइन के उत्पादन संबंधित आंकड़े जारी करती है.

फ़ेलिक्स सालमन ने देखा कि मार्गन स्टैनली ने अपने ग्राफ़ में ओआईवी के 2012 तक के आंकड़ों का उपयोग किया गया है जबकि 2013 के उत्पादन के भी आंकड़े उसके पास मौजूद हैं, जिनसे पता चलता है कि वाइन की आपूर्ति में उछाल आया है.

मॉर्गन स्टैनली के इस अध्ययन के मीडिया में सुर्खियां बनने से केवल दो दिन पहले ही ओआईवी ने ये आंकड़े प्रकाशित किए थे.

अच्छी फसल

ओआईवी के महानिदेशक फ़ेडरिको कैसुलिसि कहते हैं, ''कुछ सालों की ख़राब फ़सल के बाद अच्छी फ़सल हुई थी.''

ओआईवी के आंकड़ों के मुताबिक़ कई सालों बाद पहली बार 2013 में उपभोग से कहीं अधिक उत्पादन होने जा रहा है. आंकड़ों के मुताबिक़ लगभग साढ़े 24 करोड़ हेक्टोलीटर की अनुमानित खपत के मुक़ाबले लगभग 28 करोड़ हेक्टोलीटर वाइन का उत्पादन हुआ है. इस तरह लगभग साढ़े तीन करोड़ हेक्टोलीटर या 12 फ़ीसदी अधिक उत्पादन हुआ है.

इसके आधार पर फ़ेडरिको कैसुलिसि कहते हैं कि निश्चित रूप से वाइन की कमी नहीं है. आंकड़ों के मुताबिक 2013 से पहले के छह सालों में उत्पादन में गिरावट आई थी. कैसुलिसि इसके लिए कुछ सालों की ख़राब फ़सल और वाइन उद्योग की पुनर्संरचना को ज़िम्मेदार ठहराते हैं. आंकड़ों के मुताबिक 2006 के बाद से अंगूर की खेती के इलाक़े में तीन लाख हेक्टेयर की कमी आई है.

मॉर्गन स्टैनली के शोध के मुताबिक़ 2012 में मांग की तुलना में आपूर्ति में 30 करोड़ पेटी की कमी आई है. लेकिन इसमें सिरके जैसे ग़ैर वाइन उत्पादों को भी शामिल किया गया था.

अंगूर

लेकिन जब केवल वाइन की ही बात की जाए तो ओआईवी के आंकड़ों के मुताबिक़ 2012 में भी खपत से अधिक वाइन का उत्पादन हुआ, हालांकि यह अंतर बहुत कम था.

फ़ेडरिको कैसुलिसि कहते हैं कि पिछले साल का उत्पादन स्तर बहुत कम था. लेकिन ऐसा नहीं था कि दुनिया वाइन के सूखे के मुहाने पर बैठी है क्योंकि कई देशों ने वाइन को स्टोर कर रखा था. इसके अलावा सिरके और अन्य गैर वाइन उत्पादों को इस साल के वाइन से बनाने की जरूरत नहीं है.

वाइन की कमी का पता लगाने का एक और जरिया यह है कि क्या उसके दाम बढ़ेंगे.

फ़ेडरिको कैसुलिसि कहते हैं, ''साल 2012 में वास्तव में क्या हुआ. वाइन के उत्पादन की लागत बढ़ गई, ख़ासकर पूर्वी यूरोप में.''

क़ीमत की कहानी

मगर वाइन की क़ीमतों में हुई बढ़ोत्तरी इतनी कम थी कि उपभोक्ताओं ने उसे शायद ही महसूस किया हो.

"पिछले साल का उत्पादन स्तर बहुत कम था. लेकिन ऐसा नहीं था कि दुनिया वाइन के सूखे के मुहाने पर बैठी है"

फ़ेडरिको कैसुलिसि, महानिदेशक, ओआईवी

सालमन कहते हैं, ''अगर आपने थोड़ा-बहुत भी चेक किया तो आप पाएंगे कि किसी को यह विश्वास नहीं होगा कि दुनिया में वाइन की कमी है.''

वह कहते हैं, ''अगर आप स्पेन या फ्रांस जाएं तो पाएंगे कि बहुत से क्लिक करें अंगूर के खेत अपनी लागत से भी कम कीमत पर बिक रहे हैं, यह इस बात का अच्छा उदाहरण है कि दुनिया में वाइन की कमी नहीं है.''

वह कहते हैं, ''अंगूर की खेती वाली ज़मीन की क्लिक करें कीमत अविश्वसनीय रूप से कम है.''

सालमन कहते हैं, ''अगर वाइन उत्पादकों को इस बात का पता होता कि वाइन की कमी है तो अंगूर के खेत इतने सस्ते नहीं होते.''

इस विषय पर टिप्पणी करने के लिए मॉर्गन स्टैनली की ओर से कोई उपलब्ध नहीं था.

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