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सीरियाई विद्रोहियों को नहीं मिलेगी अमरीकी-ब्रितानी सहायता

 गुरुवार, 12 दिसंबर, 2013 को 02:36 IST तक के समाचार
सीरिया

अमरीका और ब्रिटेन ने सीरिया के विद्रोहियों को दी जाने वाली सहायता बंद कर दी है. इसका असर मानवीय सहायता पर नहीं पड़ेगा.

अमरीका के एक प्रवक्ता ने तुर्की की राजधानी अंकारा में कहा कि वो इस ख़बर के आने के बाद से चिंतित हैं कि कट्टर इस्लामी गुटों ने पश्चिमी देशों के समर्थित विद्रोही संगठन फ्री सीरियन आर्मी के ठिकानों पर कब्ज़ा कर लिया है.

अमरीका और ब्रिटेन सीरिया के विद्रोहियों को कवच, संचार यंत्र और बख़्तरबंद गाड़ियां मुहैया करवा रहे थे. दोनों मुल्क विद्रोहियों को हथियार देने से इसलिए हिचकिचा रहे थे क्योंकि इस बात का ख़तरा था कि कहीं ये हथियार अल-क़ायदा से जुड़े कट्टरवादी इस्लामी गुटों के हाथ न लग जांए.

हालांकि ऐसी ख़बरे हैं कि उन्होंने ख़ुफ़िया तौर पर विद्रोहियों की हथियारों से भी मदद की है.

पिछले हफ़्ते कट्टरपंथी गुटों ने तुर्की से लगी सीमा के पास मौजूद बॉब अल-हवा में पश्चिमी देशों के समर्थित विद्रोहियों के ठिकानों को अपने क़ब्ज़े में ले लिया था.

व्हाईट हाउस के प्रवक्ता ने मदद के बंद किए जाने की बात को स्वीकारा है.

अमरीकी सरकार ने क्लिक करें सीरिया की विद्रोही सेना 'नेशनल कोलिशन,' स्थानीय विपक्षी परिषदों और फ्री सीरियन आर्मी के सुप्रीम मिलिट्री काउंसिल को खाने के सामान, दवाइयों और सूचना के साधनों और वाहनों जैसे गैर हानिकारक सामानों के मदद में 25 करोड़ डॉलर की मदद देने की प्रतिबद्धता जताई थी.

ब्रिटेन ने गैर हानिकारक सामानों के लिए 20 करोड़ डॉलर देने की बात की थी. इसमें कुछ वाहन, जेनेरेटर, सूचना संयंत्र, पानी साफ़ करने वाली और रासायनिक हथियारों से बचाव करने वाली किट्स शामिल हैं.

विदेशी लड़ाकाओं का स्वागत

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ब्रिटेन ने गैर हानिकारक सामानों के लिए 20 करोड़ डॉलर की सहायता की बात कही थी.

इसमें अल कायदा से जुड़े दल शामिल नहीं हुए हैं लेकिन इसके चार्टर में 'मुहाजिरीन' यानि विदेशी लड़ाकाओं का स्वागत किया गया है.

साथ ही उन्हें 'जिहाद में मदद करने वाले भाई' बताया गया है. इसमें उनका सहयोग करने की इच्छा भी जताई गई है.

पिछले हफ्ते इस्लामिक फ्रंट ने कहा था कि उसने फ्रीक्लिक करें सीरियन आर्मी की सबसे बड़ी सैन्य परिषद् से ख़ुद को अलग कर लिया है.

उनका कहना है कि यह नया इस्लामी फ्रंट एक "स्वतंत्र राजनीतिक, सैन्य और सामाजिक" संरचना है जिसका लक्ष्य राष्ट्रपति बशर अल असद की सरकार को उखाड़ फेंकना और एक इस्लामी राज्य की स्थापना करना है. अमरीका और ब्रिटेन ने तुर्की के रास्ते सीरिया के विद्रोहियों को सहायता सामग्री भिजवाई थी.

अमरीका और ब्रिटेन की तरफ से यह फैसला तब आया है जब सरकारी सेना को विद्रोहियों के खिलाफ युद्ध में बढ़त मिल रही है.

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