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मृत पति के शुक्राणु रखने की गुहार

 शनिवार, 7 दिसंबर, 2013 को 08:45 IST तक के समाचार
बेथ वॉरेन

ब्रिटेन में एक महिला ने अपने मृत पति के शुक्राणु नष्ट किेए जाने के ख़िलाफ़ क़ानूनी लड़ाई शुरू की है.

28 साल की बेथ वॉरेन को ब्रिटेन की ह्यूमन फ़र्टिलाइज़ेशन एंड एंब्रियोलॉजी अथॉरिटी ने कहा है कि उनके पति के शुक्राणुओं को अप्रैल 2015 के बाद सुरक्षित नहीं रखा जा सकता.

बेथ के पति वॉरेन ब्रूअर एक स्की इंस्ट्रक्टर थे और फ़रवरी 2012 में उनकी ब्रेन ट्यूमर की वजह से मौत हो गई थी.

वॉरेन ब्रूअर के शुक्राणुओं को इलाज शुरू होने से पहले बर्फ़ में सुरक्षित रख लिया गया था और उन्होंने ये साफ़ कर दिया था कि उनकी पत्नी को उनके मरने के बाद शुक्राणुओं का इस्तेमाल करने की इजाज़त दी जानी चाहिए.

बेथ और वॉरेन आठ साल से साथ रह रहे थे और उन्होंने वॉरेन की मौत से छह हफ़्ते पहले ही शादी की थी.

बेथ कहती हैं, "मैं जानती हूं कि एक ऐसे बच्चे को जन्म देना बड़ा फ़ैसला है जो कभी अपने पिता से नहीं मिल पाएगा. मैं अभी इस बारे में फ़ैसला नहीं कर सकती और मुझे अपनी ज़िंदगी संवारने के लिए और वक़्त चाहिए. हो सकता है कि मैं कभी इलाज के लिए आगे न बढ़ूं लेकिन एक बार मेरा दुख कम हो जाए तो मैं ये तय करने की आज़ादी चाहती हूं"

बेथ, वॉरेन ब्रूअर

वॉरेन ब्रूअर के शुक्राणु साल 2005 में रेडियोथेरैपी शुरू होने के पहले सुरक्षित रख लिए गए थे

उन्होंने आगे कहा, "मेरे पति की मौत से कुछ ही हफ़्ते पहले एक कार हादसे में मेरे भाई की मौत हुई थी इसलिए मुझे इन दो हादसों से निपटना है."

'नियमों में गड़बड़ियां'

बेथ को शुरुआत में बताया गया था कि उनके पति का आख़िरी सहमति पत्र अप्रैल 2013 में ख़त्म हो चुका है. लेकिन इसके बाद उन्हें दी गई मंज़ूरी को दो बार बढ़ाया गया.

वॉरेन के शुक्राणुओं को नॉर्थैम्पटन में एक फ़र्टिलिटी क्लिनिक में रखा गया है.

बेथ वॉरेन के वकील जेम्स लॉफ़र्ड का कहना है कि साल 2009 में लागू नियमों की वजह से उनकी मुवक्किल को न्याय नहीं मिल पा रहा है.

जेम्स लॉफ़र्ड कहते हैं, "सामान्य समझ की बात है कि बेथ को उनके पति और भाई की मौत से मिले दुख से उबरने का वक़्त दिया जाना चाहिए और उन्हें इस तरह का अहम फ़ैसला जीवन के इस मोड़ पर लेने को मजबूर न किया जाए."

लॉफ़र्ड डेविज़ का कहना है कि इन नियमों में कई गड़बड़ियां हैं. लॉफ़र्ड डेविज़ की कंपनी इस मुकदमे के लिए बेथ से पैसे नहीं ले रही है.

वॉरेन के शुक्राणुओं को अप्रैल 2015 तक इस्तेमाल किया जाना है लेकिन अगर इन्हें पिघला लिया गया और भ्रूण बनाने में इस्तेमाल किया गया तो इन्हें सात साल और रखा जा सकता है.

ब्रिटेन में क्या नियम हैं?

  • रेडियोथेरैपी से प्रजजन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं.
  • रेडियोथेरैपी से पहले अक्सर मरीज़ अंडाणु या शुक्राणु हटा देते हैं.
  • शुक्राणु या अंडाणु 55 साल तक सुरक्षित रखे जा सकते हैं
  • हर 10 साल में शुक्राणु या अंडाणु देने वालों को दोबारा सहमति देनी होती है

अप्रैल 2015 की समयसीमा का मतलब है कि बेथ इन शुक्राणुओं से एक ही बच्चे की मां बन सकती हैं.

इन शुक्राणुओं को विदेश भेजने पर भी कोई पाबंदी नहीं है. इसका मतलब ये है कि भविष्य में बेथ वॉरेन का इलाज विदेश में हो सकता है लेकिन ब्रिटेन में नहीं.

इस मामले की सुनवाई अगले साल उच्च न्यायालय के परिवार विभाग में होगी.

अपनी अर्ज़ी में बेथ वॉरेन ने कहा है, "मैं जानती हूं कि भविष्य में अगर मैं किसी से मिलूं और उनके बच्चे की मां बनना चाहूं तो सुरक्षित शुक्राणुओं का ऐसी हालत में इस्तेमाल न करने का फ़ैसला कर सकती हूं."

उन्होंने आगे कहा, "मैं नहीं जानती कि भविष्य में क्या होगा और मैं चाहूंगी कि मैं अपने पति के बच्चे की मां बनने का विकल्प खुला रखूं, जैसी कि उनकी इच्छा थी."

नई बहस

"सामान्य समझ की बात है कि बेथ को उनके पति और भाई की मौत से मिले दु:ख से उबरने का वक़्त दिया जाना चाहिए और इस तरह का अहम फ़ैसला जीवन के इस मोड़ पर लेने को मजबूर न किया जाए."

जेम्स लॉफ़र्ड, बेथ वॉरेन के वकील

वहीं ह्यूमैन फ़र्टिलाइज़ेशन एंड एंब्रियोलॉजी अथॉरिटी (एचएफ़ईए)का कहना है कि उसे बेथ वॉरेन से पूरी सहानुभूति है.

एक बयान में एचएफ़ईए ने कहा है, "हम बेथ वॉरेन के वकीलों से बात कर रहे हैं और हर बार हमें नई जानकारी दी जाती है. हमने क़ानूनी स्थिति को जितना संभव हुआ है समझने की कोशिश की है. लेकिन शुक्राणु या अंडाणु को सुरक्षित रखने पर क़ानून साफ़ है और उनके पति ने जहां तक मंज़ूरी दी है उसके आगे हम इस अवधि को नहीं बढ़ा सकते."

इस मामले से जीवनसाथी की मौत के बाद गर्भधारण की नैतिकता पर बहस फिर शुरू होगी.

साल 1997 में डियान ब्लड ने अपने मृत पति के शुक्राणु से बच्चा पैदा करने का हक़ हासिल किया था. तब अपीली अदालत ने एचएफ़ईए के ख़िलाफ़ फ़ैसला देते हुए कहा था कि डियान ब्लड को विदेश में इलाज की मंज़ूरी मिलनी चाहिए.

लेकिन उस मामले में डियान ब्लड के पति से शुक्राणु तब लिए गए थे जब वे कोमा में थे और उनकी लिखित मंज़ूरी नहीं थी. डियान ब्लड ने बेल्जियम में इलाज के बाद दो बेटों को जन्म दिया था.

वहीं वॉरेन ब्रूअर के शुक्राणु साल 2005 में रेडियोथेरैपी शुरू होने के पहले सुरक्षित रख लिए गए थे और इसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी को इन शुक्राणुओं के इस्तेमाल के अधिकार दिए थे.

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