वेश्याओं को पैसे देने वालों पर ज़ुर्माने का समर्थन

  • 1 दिसंबर 2013
फ्रांस

फ्रांस में वेश्याओं की सेवाएं लेने वाले लोगों पर ज़ुर्माना लगाने के लिए लाए जा रहे क़ानून का संसद ने समर्थन किया है.

इस नए क़ानून के तहत वेश्या की सेवाएं लेने वाले व्यक्ति पर 1500 यूरो का ज़ुर्माना लगाया जाएगा.

फ्रांस में वेश्यावृत्ति को क़ानूनी मान्यता प्राप्त है लेकिन यहाँ दलाली और सार्वजनिक स्थानों पर ग्राहकों की तलाश अवैध है.

इस नए क़ानून के समर्थकों का कहना है कि इससे वेश्याएं सुरक्षित रहेंगी जबकि ग्राहकों को ज़ुर्माना चुकाना होगा जबकि विरोधियों का कहना है कि इससे वेश्याओं के लिए ख़तरे और बढ़ जाएंगे.

सांसदों ने विधेयक के कुछ हिस्सों पर शुक्रवार रात वोटिंग की जबकि समूचे विधेयक पर चार दिसंबर को वोटिंग होगी.

ज़ुर्माना

नए प्रावधानों के तहत बार-बार पकड़े जाने वाले ग्राहकों पर 3750 यूरो तक का ज़ुर्माना लग सकता है. इन ग्राहकों को सेक्स व्यापार में ख़तरों के बारे में जागरूक करने वाला पाठ्यक्रम लेने का विकल्प भी दिया जाएगा.

इस नए क़ानून की अधिकतर धाराओं का उद्देश्य विदेशी दलालों के नेटवर्क को ख़त्म करना और वेश्यावृत्ति में फंसी महिलाओं को बाहर निकलने में मदद करना है.

फ्रांस वेश्याएं
विधेयक का विरोध कर रहे लोगों का तर्क है कि इससे वेश्याओं के लिए मुश्किलें बढ़ जाएंगी

नए क़ानून के तहत वेश्याओं को सुरक्षा दी जाएगी और ग्राहकों के लिए नियम कड़े किए जाएंगे.

अभिनेत्री कैथरीन डूनूव उन सैंकड़ों सेलिब्रिटी में से एक हैं जो सरकार से इस क़ानून पर पुनर्विचार करने का आग्रह कर रहे हैं.

स्वास्थ्य चैरिटी 'मेडिसिंस डू मोंडे' से जुड़े टिम लीसेस्टर कहते हैं कि ग्राहकों को दंडित करने से वास्तव में वेश्याओं को नुक़सान होगा.

बहस

टिम लीसेस्टर ने समाचार एजेंसी एपी से कहा, "इससे वेश्याओं के लिए कुछ नहीं बदलेगा. भले ही उन्हें अपनी गिरफ़्तारी का डर नहीं होगा लेकिन अपने ग्राहकों पर ज़ुर्माने का डर होगा. इसलिए वे छुपे रहने के लिए मजबूर रहेंगी. क्योंकि वे पूरी तरह अपने ग्राहकों पर ही निर्भर हैं."

शुक्रवार को जब इस विधेयक पर बहस शुरू हुई तब फ्रांस की संसद के सिर्फ़ 30 सदस्य ही मौजूद थे.

महिला अधिकारों की मंत्री और सरकार की प्रवक्ता नजात वेलॉड ने सांसदों से कहा, "फ्रांस ऐसा देश नहीं है जो वेश्याओं का स्वागत करता हो."

नजात ने कहा, "यहाँ सेक्स मुद्दा नहीं है. हम नैतिक पुलिस बनने की कोशिश नहीं कर रहे हैं. यहाँ सवाल उस पैसे का है जो दलाली को बढ़ावा देता है."

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