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कोलम्बो की ओर बढ़ रहे तमिलों को रोका

 गुरुवार, 14 नवंबर, 2013 को 04:19 IST तक के समाचार
महिंदा राजपक्षे

राष्ट्रमंडल सम्मेल में आमंत्रित नेताओं का कोलम्बो में इस तरह स्वागत किया जा रहा है

श्रीलंका में गृह युद्ध के दौरान या इसके बाद लापता हुए तमिल परिवारों से जुड़े सौ से अधिक लोगों को राजधानी कोलम्बो जाने से रोक दिया गया है जहां राष्ट्रमंडल सम्मेलन होने जा रहा है.

ये लोग उत्तरी मार्ग से बसों के ज़रिये कोलम्बो जाने की कोशिश कर रहे थे जिसे सेना ने नाक़ाम कर दिया.

इसी तरह, ब्रिटेन के टीवी 4 चैनल की एक टीम युद्ध-प्रभावित रहे उत्तरी श्रीलंका के दौरे पर जा रही थी, लेकिन उसे भी रोक दिया गया.

जिस ट्रेन में ये दल सवार था, उसे सरकार समर्थकों ने रोक दिया.

ये ट्रेन अनुराधापुर से आगे नहीं बढ़ पाई. सरकार समर्थकों का आरोप है कि चैनल का दल परास्त हो चुके तमिल टाइगर विद्रोहियों का समर्थन करता है.

चैनल 4 के पुरस्कार प्राप्त वृत्तचित्र 'नो फ़ॉयरज़ोन: श्रीलंका किलिंग फील्ड्स' के निदेशक केलम मेकरेए ने बताया कि पुलिस ने उन्हें राजधानी की ओर लौट जाने के लिए कहा.

पुलिस उन्हें भीड़ से निकालकर कोलम्बो ले गई. इससे पहले उन्होंने ट्वीट करके कहा, ''भीड़ ट्रेन की पटरी पर है, हम आगे नहीं बढ़ सकते.''

नफ़े में नुक़सान

तमिल

श्रीलंका की सरकार पर गृह युद्ध के दौरान युद्ध अपराधों के गंभीर आरोप लगते रहे हैं

राष्ट्रमंडल सम्मेलन में शामिल होने कोलम्बो आए ब्रितानी विदेश मंत्री विलियम हेग ने केलम के साथ हुए इस व्यवहार की आलोचना की है.

उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे को श्रीलंका के विदेशमंत्री जीएल पेइरीस के समक्ष उठाएंगे.

संवाददाताओं का कहना है कि शुक्रवार से शुरू हो रहे इस सम्मेलन में श्रीलंका की गृह युद्ध के बाद की तस्वीर दिखाई जाएगी, लेकिन इससे श्रीलंका को फ़ायदा होता नहीं दिख रहा है क्योंकि राष्ट्रमंडल के कई सदस्य देश मानवाधिकारों के मामले में श्रीलंका के रिकॉर्ड पर सवाल उठा रहे हैं.

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कनाडा के प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर और मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीन रामग़ुलाम इस सम्मेलन में शिरकत नहीं कर रहे हैं.

साल 2009 में तमिल टाइगर विद्रोहियों के ख़िलाफ़ निर्णायक कार्रवाई के साथ ही श्रीलंका में लगभग 25 वर्षों से जारी गृह युद्ध समाप्त हो गया था.

लेकिन दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे पर युद्ध अपराधों का आरोप लगाया है.

फ़ौज पर आरोप है कि उसने आत्मसमर्पण कर रहे विद्रोहियों को निशाना बनाया और अस्पतालों पर बम गिराए. लेकिन सरकार इन आरोपों से इंक़ार करती रही है.

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