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मुझे अग़वा किया गया है- मोहम्मद मोर्सी

 बुधवार, 13 नवंबर, 2013 को 22:08 IST तक के समाचार

मिस्र के अपदस्थ राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी का कहना है कि उन्हें अग़वा किया गया है और उनकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ रखा गया है.

जेल में मुलाक़ात करके लौटे मोर्सी के वक़ीलों ने उनका एक बयान पढ़ कर सुनाया जिसमें मोर्सी के ख़िलाफ़ विरोधियों की हत्या के लिए अपने समर्थकों को भड़काने संबंधी आरोपों के मामले में अदालती कार्यवाई को नाजायज़ बताया है.
उन्होंने जनवरी में शुरू होने वाली कार्यवाई के दौरान अपने बचाव के लिए किसी भी वक़ील का नाम लेने से इंकार किया है.

सेना के उन्हें हटाने के क़दम को धोखा कहते हुए मोर्सी ने सेना समर्थित अधिकारियों के ख़िलाफ़ अभियोग चलाने का इरादा जताया है.

चेतावनी

मोर्सी ने चेतावनी दी है कि देश तब तक स्थायित्व हासिल नहीं कर सकता जब तक वो सत्ता में वापिस नहीं आ जाते.

वो उन हज़ारों मुस्लिम ब्रदरहुड पार्टी के सदस्यों में शामिल हैं जिन्हें पिछले चार महीनो के दौरान चरमपंथ के विरूद्ध कथित संघर्ष के दौरान अंतरिम प्रशासन ने पकड़ा है.

सुरक्षा बलों के साथ संघर्ष में हज़ारों लोग मारे गए हैं.

सोमवार को सरकार ने अगस्त महीने से लगाया गया आपातकाल और कर्फ़्यू हटाने की घोषणा की. हालांकि मुख्य सड़कों और केन्द्रों पर सुरक्षा बढ़ा दी जाएगी और कार्यकर्ताओं को लगता है कि प्रदर्शनों पर रोक लगाने के लिए पुलिस को ताक़त देने के लिए एक नया क़ानून लाया जाएगा.

मोर्सी और मुस्लिम ब्रदरहुड के 14 अन्य वरिष्ठ नेताओं के ख़िलाफ़ बीते साल दिसंबर में राष्ट्रपति भवन के बाहर हुई झड़प में प्रदर्शनकारियों की हत्या के लिए उकसाने का आरोप है.

उनकी सरकार के खिलाफ़ जनप्रदर्शन के बाद जुलाई में सेना ने उसे सत्ता से हटा दिया था.

क़ानूनी उपाय

पिछले ही हफ़्ते कड़े सुरक्षा इंताज़ामों के बीच मोर्सी के ख़िलाफ़ अदालती कार्यवाई शुरू हुई है

क़ाहिरा में दिसंबर 2012 में इत्तेहादिया राष्ट्रपति भवन के बाहर हुई हिंसा भड़काने के मामले में सुनवाई शुरू होने के बाद मोर्सी को पिछले हफ़्ते एक सामान्य जेल में स्थानांतरित कर दिया गया था.

मंगलवार को जेल में वक़ीलों के साथ मुलाक़ात के दौरान मोर्सी ने मिस्र के लोगों के नाम एक संदेश दिया.

वक़ीलों ने बुधवार को संदेश पढ़ कर सुनाया जिसमें कहा गया है कि सैन्य शासन टूटने लगा है और यह अटल मिस्रवासियों के सामने मुंह के बल गिरेगा.

मोर्सी ने सैन्य प्रमुख जनरल अब्दुल फ़तह अल सीसी पर उन्हे पद से हटाने का आरोप लगाते हुए भगवान के ख़िलाफ़ धोखा और पूरे राष्ट्र के ख़िलाफ़ धोखा बताया.

मोर्सी ने अपने संदेश में कहा है कि ‘मिस्र में तब तक स्थायित्व नहीं आ सकता जब तक सैन्य शासन का ख़ात्मा नहीं होता और उन उन लोगों को जवाबदेह नहीं बनाया जाता जो मिस्र वासियों का ख़ून बहाने के लिए ज़िम्मेदार हैं.’

ब्रदरहुड के वक़ील मोहम्मद अल दमाती ने कहा कि मोर्सी क़ानूनी कार्यवाई को नाजायज़ मानते हैं इसलिए वो क़ानूनी सहायता लेने से मना कर रहे हैं.

दमाती ने कहा ‘जब हमने उनका मुकदमा लड़ने के लिए वक़ील का नाम दिए जाने का मुद्दा उठाया तो उन्होने कहा कि इस बारे में बात करना जल्दबाज़ी होगी क्योंकि वो अपनी सत्ता को वैध मानते हैं.’

हांलाकि दमाती ने कहा कि वक़ील ‘सैन्य शासन के ख़िलाफ़ क़ानूनी क़दम’ उठाने की प्रक्रिया शुरू करेंगे.

इसमें अभियोग पक्ष से इस बात की शिकायत करना शामिल है कि ‘जो कुछ हुआ वह अपराध था’ या फिर एक प्रशासनिक अदालत में मुकदमा दायर किया जाएगा कि जनरल अल सीसी की कार्यवाई ‘अमान्य’ थी.

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